स्वच्छता मिशन का उड़ाया जा रहा है मजाक, बिना छत-दीवार के 6 हजार में बनाये जा रहे शौचालय

स्वच्छता मिशन का उड़ाया जा रहा है मजाक, बिना छत-दीवार के 6 हजार में बनाये जा रहे शौचालय

Akansha Singh | Publish: Sep, 07 2018 12:07:01 PM (IST) | Updated: Sep, 08 2018 07:43:27 AM (IST) Lucknow, Uttar Pradesh, India

जहां एक और केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर स्वच्छता मिशन को पंख लगाकर उड़ाने की कोशिश कर रही है।

ललितपुर. जहां एक और केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर स्वच्छता मिशन को पंख लगाकर उड़ाने की कोशिश कर रही है। जिससे शहर से लेकर गांव तक स्वच्छता का वातावरण हो यह मिशन इसलिए चलाया गया कि ज्यादातर आबादी खुले में शौच जाती थी जिससे बीमारियां फैलने का खतरा रहता था। इसीलिए केंद्र सरकार की पहल पर स्वच्छता मिशन बड़ी ही जोर शोर से चलाया गया। बड़े रूप में इसका प्रचार प्रसार कर जनता को स्वच्छता मिशन के बारे में समझाया गया।

सरकारें स्वच्छता मिशन पर करोड़ों रुपया पानी की तरह बहा रही हैं तो वहीं दूसरी ओर इस स्वच्छता मिशन का खुलकर मजाक उड़ाया जा रहा है। सरकारें शौचालय बनवाने के लिए लाभार्थियों के खाते में पैसा भेजने का काम कर रही हैं तो वहीं दूसरी ओर नगर पालिका नगर पंचायत के साथ ग्रामीण क्षेत्र में ग्राम प्रधान इस योजना का जमकर मजाक उड़ाते हुई जमकर भ्रष्टाचार भी कर रहे हैं। इसी तरह के एक भ्रष्टाचार का मामला जनपद की नगर पंचायत पाली में सामने आया है। जहां स्थानीय कस्बे में शौचालयों का निर्माण ठेकेदारी पद्धति से हो रहा है। शौचालय का निर्माण कुछ इस तरह हो रहा है कि 2 प्लास्टिक की नीली टंकियों को लेकर जमीन में गाड़ दिया जाता है और एक पाइप डालकर उसके ऊपर सीट लगा दी जाती है। ठेकेदारों द्वारा इन शौचालयों की ना तो दीवार बनाई जाती है और ना ही गेट लगाया जाता है।

कहने का तात्पर्य है कि सरकार प्रयास कर रही है कि जनता खुले में शौच ना जाए तो वहीं सरकार की इस योजना का मजाक उड़ाते हुए स्थानीय प्रशासन की मदद से बाहर से आए ठेकेदार बिना दर-ओ-दीवार छत के शौचालय बनाकर तैयार कर देती है। और बदले में शौचालय बनवाने वाली लाभार्थी से ₹6000 वसूले है।


शौचालय बनवा रहे एक लाभार्थी मर्दन सिंह ने बताया कि हमारे यहां बिना छत बिना गेट और बिना दीवारों के शौचालय बनाए जा रहे हैं। ठेकेदारों द्वारा इस शौचालय की कीमत 6000 वसूल की जा रही है। तो वहीं दूसरे लाभार्थी ने बताया कि जमीन में गड्ढा कर उसमें प्लास्टिक की टंकी या लगा दी जाती है एवं ऊपर से सीट रख दी जाती है और ₹6000 ठेकेदार द्वारा वसूले जा रहे हैं और पैसा देने के लिए एसडीएम ने कहा था । ठेकेदार की एक कारीगर शहजाद ने बताया कि जिस तरह के शौचालय यहां बनाई जा रहे हैं उन शौचालयों की कीमत लगभग ₹4000 के आसपास है और शौचालय बनवाने वाले लाभार्थी से ₹6000 वसूले जा रहे हैं । आधे अधूरे शौचालय बनवाने के बाद पाली नगर पंचायत को ओडीएफ नगर पंचायत भी घोषित कर दिया जबकि पाली नगर पंचायत की बहुत सी आबादी अभी भी खुले में शौच जाने के लिए मजबूर है उनके घर में कोई शौचालय नहीं बनाया गया है ।



क्या कहते हैं प्रशानिक अधिकारी
इस मामले में जब हमने पाली एसडीएम नरेंद्र सिंह से बात की तो उन्होंने कहा कि इस तरह के शौचालय पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बनाए जा रहे हैं जो बहुत ही सफल है। इसीलिए इस ठेकेदार को यहां शौचालय बनाने के लिए भेजा गया है। ठेकेदार से कहा गया है कि जो भी लाभार्थी ₹6000 दे उसका शौचालय बना दो। एसडीएम ने यह भी बताया कि लाभार्थी के पास जो ₹2000 बचते हैं उसमें से वह शौचालय की छत दीवारें बनवा तथा गेट लगवा सकता है। उन्होंने तो दबी जुबान में यह भी कहा कि क्या ₹8000 में भी शौचालय बनता है अब कैसे बनता है यह सरकार जाने यह हमारा मुद्दा नहीं है हमें तो केवल बनवा कर देना है जैसे भी बने।



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