विजय माल्या केस में बैंकों को मिली बड़ी कमायबी, वापस मिले 963 करोड़ रुपये

भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआर्इ) के मुताबिक बैंकों ने विजय माल्या से करीब 963 करोड़ रुपये वसूल लिए हैं।

नर्इ दिल्ली। भारतीय स्टेट बैंक को विजय माल्या से संपत्ति जब्त करने को लेकर एक बड़ी कामयाबी हासिल हुर्इ है। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआर्इ) के मुताबिक बैंकों ने विजय माल्या से करीब 963 करोड़ रुपये वसूल लिए हैं। इसके बारे में एसबीआर्इ के प्रबंध निदेशक (एमडी) अरिजीत बसु ने बताया कि विजय माल्या की भारतीय प्राॅपर्टी के जरिए बैंकों ने अब तक कुल 963 करोड़ रुपये की रिकवरी की है। बसु ने आगे कहा कि बैंक की कोशिश होगी वो अधिक से अधिक रकम वसूल लें।


संपत्ति फ्रिज करने के लिए यूके हार्इकोर्ट ने दिया था अादेश

कर्इ भारतीय बैंक विजय माल्या की संपत्ति जब्त करने को लेकर यूनाइटेड किंगडम की अथाॅरिटी से लगातार संपर्क में हैं। बसु ने कहा कि हम यूके कोर्ट के इस आदेश से खुश हैं। इस तरह के अादेशों से बैंकों को संपत्ति जब्त करने में मदद मिलेगी। आपको बात दें कि यूके प्रवर्तन ने पहले आदेश दिया था कि माल्या की विदेशाें आैर भारत की सभी संपत्ति को फ्रिज किया जाए। इसी को लेकर भारतीय बैंक लगातार यूके अथाॅरिटी के संपर्क में हैं। ज्ञात हो कि एसबीआर्इ उन 13 बैंकों के कंसाॅर्टियम का प्रमुख हिस्सा है जिनसे माल्या ने कर्ज लिया था।


बसु ने कहा- कोर्ट के अादेश से हम खुश

बसु के मुताबिक बैंक लंदन में वकीलों और सरकार से रकम की रिकवरी के लिए काम कर रहा है। उनके मुताबिक विजय माल्या की अधिकतर संपत्ति देश में न होकर विदेशों में है। आपको बता दें कि विजय माल्या पर देश के 17 बैंकों का 9 हजार करोड़ रुपए से अधिक का कर्ज बकाया है। बसु के मुताबिक लंदन के कोर्ट के आदेश से हम बहुत खुश हैं। यूके की कोर्ट ने 13 बैंकों के कंसाॅर्टियम के पक्ष में फैसला देते हुए कहा कि वो विजय माल्या की प्रॉपर्टी को जब्त कर सकते हैं।


लंदन के निकट हर्टफोर्डशायर की संपत्ति की तलाशी

कोर्ट ने अपने आदेश में माल्या की उस संपत्तिक की भी तलाशी लेने का अादेश दिया था जो लंदन के निकट हर्टफोर्डशायर में स्थित है। ब्रिटिश कोर्ट ने यूके प्रवर्तन अधिकारियों आैर उनके एजेंट्स को इस तलाशी की अनुमति दे दी है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि यदि एजेंट्स को तलाशी के लिए बल प्रयोग करना पड़े तो उन्हें इस बात की भी अनुमति है। हालांकि ये प्रवेश का निर्देश नहीं है। इसका मतलब ये है कि बैंकों के लिए यह एक साधन है आैर इसका इस्तेमाल वो बकाए की रकम की वसूली के लिए कर सकते हैं। कोर्ट के अादेश में साफ-साफ कहा गया है कि प्रवर्तन अधिकारी या उसके तहत कोर्इ प्रवर्तन एजेंट जरूरत पड़ने पर संपत्ति में प्रवेश के लिए पर्याप्त बल का इस्तेमाल कर सकते हैं।

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Ashutosh Verma
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