BSNL और MTNL को 74 हजार करोड़ रुपये का राहत पैकेज देगी केंद्र सरकार

BSNL और MTNL को 74 हजार करोड़ रुपये का राहत पैकेज देगी केंद्र सरकार

Ashutosh Kumar Verma | Updated: 03 Jul 2019, 03:38:34 PM (IST) कॉर्पोरेट

  • कर्मचारियों को VRS के तहत आकर्षक प्लान देने की तैयारी।
  • Cabinet को भेजा गया प्रस्ताव।
  • दोनों कंपनियों की कुछ संपत्तियों को बेचकर पूंजी जुटाने का भी प्रयास।

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ( Central government ) पूंजी की भारी कमी से जूझ रही भारत संचार निगम लिमिटेड ( bsnl ) और MTNL के लिए 74,000 करोड़ रुपये की राहत पैकेज ( bailout package ) देने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। इसमें दोनों कंपनियों के हजारों कर्मचारियों को बेहतर एग्जिट पैकेज देने का प्लान भी बनाया जा रहा है। इस VRS को आकर्षक बनाने के लिए सरकार 5 फीसदी का अतिरिक्त कम्पेनसेशन देने पर भी विचार कर रही है।

कर्ज के बोझ से जूझ रही सभी सरकारी कंपनियों में बीएसएनएल शीर्ष पर है। इस कंपनी पर कुल 13,804 करोड़ रुपये का कर्ज है। वहीं, इस मामले में एमटीएनएल तीसरे स्थान पर है, जिसपर कुल 3,398 करोड़ रुपये का कर्ज है। केवल एअर इंडिया ही है, जो सबसे अधिक कर्ज के मामले में एमटीएनएल से उपर है।


कैसे जुटाई जाएगी पूंजी

एक अंग्रेजी अखबार से बातचीत में इस मामले से जुड़े अधिकारी ने बताया, इस प्रस्ताव को कैबिनेट भेज दिया गया है। 20 हजार करोड़ रुपये का 4G स्पेक्ट्रम सरकार द्वारा जारी किया जाएगा। वहीं, पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग द्वारा 13,000 कराेड़ रुपये का वहन किया जायेगा। वीआरएस पैकेज के लिए सरकार 40,000 करोड़ रुपये जारी करेगी।


क्या है सरकार के पास विकल्प

राहत पैकेज को लेकर टेलिकाॅम डिपार्टमेंट ने कहा है कि दो पीएसयू कंपनियों को बंद करने से 1.2 लाख करोड़ रुपये का नुकसान होगा। डिपार्टमेंट ने यह भी कहा कि टेलिकाॅम सेक्टर में पहले से ही दबाव को लेकर रणनीतिक विनिवेश के लिए भी कोई खरीदार नहीं मिलेगा। हालांकि, ज्वाइंट वेंचर सरकार के लिए एक विकल्प हो सकता है।


दोनों कंपनियों ने बीते दो दशक में खोया मार्केट शेयर

गौरतलब है कि बीते दो दशक में खराब प्रबंधन, कर्मचारियों के उच्च वेतन और गैर-जरूरी रूप से सरकार की दखलअंदाजी की वजह से बीएसएनएल और एमटीएनएल की माली हालत लगातार खराब होती गई है। एक तरफ देश की टेलिकाॅम सेक्टर 4G के बाद 5G की तैयारी कर रहा है, वहीं ये दोनों सरकारी कंपनियां इस मामले में भी पीछे हैं। मोबाइल सर्विस बिजनेस में भी इन दोनों कंपनियों ने अपना मार्केट शेयर खो दिया है।


वीआरएस की मदद से खर्च कम करना चाहती है सरकार

अब सरकार का मानना है कि रिटायरमेंट उम्र को 60 से कम कर 58 साल करने और आकर्षक वीआएस पैकेज की वजह से कंपनियों के ऑपरेटिंग काॅस्ट में कमी आ सकती है। इसके बाद वे अक्रामक टैरिफ प्लान्स के जरिए मार्केट शेयर हासिल कर सकती हैं। सरकार इन कंपनियों की परित्यक्त संपत्तियों को बेचकर भी पूंजी जुटाने पर विचार कर रही है, जिसमें टाॅवर्स, जमीन और ऑप्टिकल फाइबर हैं।

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