हाइजैक की अफवाह पड़ी कारोबारी पर भारी, पांच करोड़ का जुर्माना और उम्रकैद की सजा

हाइजैक की अफवाह पड़ी कारोबारी पर भारी, पांच करोड़ का जुर्माना और उम्रकैद की सजा

Saurabh Sharma | Publish: Jun, 12 2019 11:34:29 AM (IST) कॉर्पोरेट

  • 2017 में कारोबारी ने उर्दू में लेटर लिख फैलाई थी अफवाह
  • जुर्माने के रुपयों को क्रू मेंबर्स और यात्रियों में बांटा जाएगा
  • यात्रियों को दिए जाएंगे 25-25 हजार रुपए

नई दिल्ली। हाइजैक की अफवाह उड़ाने वाले एंटी हाइजैकिंग एक्ट के तहत देश में पहली बार सजा सुना दी गई है। यह सजा एक कारोबारी को सुनाई गई है। जिस पर कोर्ट ने पांच करोड़ रुपए का जुर्माना और उम्रकैद की सजा दी है। पांच करोड़ रुपए का फाइन फ्लाइट के क्रू मेंबर्स और यात्रियों में बांटे जाएंगे। कारोबारी का नाम बिरजू सल्ला है। जिसने अपनी महिला मित्र की नौकरी खत्म करने की साजिश रची थी। महिला मित्र उसी एयरलाइंस कंपनी की क्रू मेंबर के रूप में काम कर रही थी। यह मामला 2017 एनआईए कोर्ट में चल रहा है। कोर्ट ने सल्ला की बेल की याचिका 10 बार रिजेक्ट की है।

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अक्टूबर 2017 में फैलाई थी अफवाह
एंटी हाइजैकिंग एक्ट 2016 में बना था। एनआईए ने 2017 में हुए कांड की सजा 2019 में सुनाई। वास्तव में बिरजू सल्ला ने अक्टूबर, 2017 में मुंबई-दिल्ली के बीच जेट एयरवेज की फ्लाइट के टॉयलेट में हाइजैक की धमकी भरा लेटर रख दिया। जिसमें लिखा गया था कि प्लेन में हाइजैकर्स हैं। विमान को सीधे पीओके पर लैंड करें। अगर विमान को कहीं और उतारा गया तो लोगों को मार दिया जाएगा। इसके अलावा प्लेन के कार्गो में बम होने की धमकी दी गई थी।

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फाइन के रुपयों इन लोगों में बांटा जाएगा
एनआईए कोर्ट के जज एमके दवे ने सल्ला पर 5 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। जिसे क्रू मेंबर्स और यात्रियों में बांटा जाएगा। फ्लाइट के पायलट और को-पायलट को भी 1-1 लाख रुपए दिए जाएंगे। दो फ्लाइट अटेंडेट्स को 50-50 हजार रुपए दिए जाएंगे। विमान में सवार हर यात्री को भी 25-25 हजार रुपये की रकम दी जाएगी। कोर्ट ने सल्ला पर जुर्माना लगाने का यह तर्क दिया कि उसके धमकी भरे पत्र से क्रू मेंबर्स और यात्रियों को भीषण मानसिक तनाव हुआ है।

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10 बार निरस्त हुई बेल की मांग
एंटी हाइजैकिंग एक्ट के तहत सजा पाने वाले बिरजू सल्ला पहले व्यक्ति हैं। वहीं वो नो-फ्लाई लिस्ट में शामिल होने वाले पहले नागरिक हो गए हैं। मामले की सुनवाई के दौरान सल्ला को डेढ़ साल तक कैद में रहना पड़ा। इस दौरान सल्ला ने 10 बार बेल के लिए अप्लाई किया। हर बार कोर्ट ने उनकी इस मांग को पूरी तरह से खारिज कर दिया। इस मामले में कोर्ट ने कहा कि सल्ला ने यह कारनामा प्लानिंग के साथ किया था। हैरानी की बात तो ये है कि सल्ला ने अपने लैपटॉप पर पूरा लेटर इंग्लिश में टाइप किया और उसके गूगल ट्रांसलेटर से उसे उर्दू में कंवर्ट किया।

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आखिर क्यों फैलाई थी अफवाह
नेशनल इंवेस्टीगेशन एजेंसी की चार्जशीट के अनुसार बिरजू सल्ला की एक महिला मित्र जेट एयरवेज में कर्मचारी थी। महिला ने सल्ला के साथ रहने से इनकार कर दिया था। सल्ला ने सोचा कि इस तरह के लेटर से एयरलाइन कंपनी अपना काम बंद कर देगी और महिला की जॉब चली जाएगी।

 

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