नौकरी से निकाले जाने के बाद चंदा कोचर का आया बयान, लोन देने का फैसला नहीं था एकतरफा

नौकरी से निकाले जाने के बाद चंदा कोचर का आया बयान, लोन देने का फैसला नहीं था एकतरफा

Saurabh Sharma | Publish: Jan, 31 2019 07:48:00 AM (IST) | Updated: Jan, 31 2019 08:26:03 AM (IST) कॉर्पोरेट

आईसीआईसीआई की पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी चंदा कोचर ने बुधवार को कहा कि बैंक में कर्ज देने का कोई भी फैसला एकतरफा नहीं किया गया था।

नर्इ दिल्ली। संकट में फंसी आईसीआईसीआई की पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी चंदा कोचर ने बुधवार को कहा कि बैंक में कर्ज देने का कोई भी फैसला एकतरफा नहीं किया गया था। कोचर ने यह प्रतिक्रिया वीडियोकॉन समूह को दिए गए 3,250 करोड़ रुपये के विवादास्पद ऋण मामले में न्यायमूर्ति श्रीकृष्ण समिति द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद दी।

कोचर ने बुधवार शाम को जारी एक बयान में कहा, "मैं फैसले से बुरी तरह निराश, आहत और परेशान हूं। मुझे रिपोर्ट की कॉपी तक नहीं दी गई। मैं फिर दोहराती हूं कि बैंक में कर्ज देने का कोई भी फैसला एकतरफा नहीं किया गया।"

उन्होंने आगे कहा, "आईसीआईसीआई स्थापित मजबूत प्रक्रियाओं और प्रणालियों वाला संस्थान है, जहां समिति आधारित सामूहिक निर्णय लेने की प्रक्रिया है तथा इसमें कई उच्च क्षमता वाले पेशेवर भी शामिल होते हैं।" उन्होंने कहा, "इसलिए संगठन का डिजायन और संरचना हितों के टकराव की संभावना को रोकता है।"

इससे पहले समिति ने कहा कि इस ऋण को देने में बैंक के आचार संहिता का उल्लंघन किया गया जिसमें हितों का टकराव का आचरण भी शामिल था, क्योंकि इस कर्ज का एक हिस्सा उनके पति दीपक द्वारा चलाई जा रही कंपनी को दिया गया, जिससे उन्हें विभिन्न वित्तीय लाभ प्राप्त हुए।

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