जायदाद के बाद विजय माल्या की इस कीमती चीज पर ED की नजर, जानिए कैसे कंगाल होगा ये शराब कारोबारी

जायदाद के बाद विजय माल्या की इस कीमती चीज पर ED की नजर, जानिए कैसे कंगाल होगा ये शराब कारोबारी

Dimple Alawadhi | Publish: Jan, 12 2019 11:40:38 AM (IST) कॉर्पोरेट

प्रवर्तन निदेशालय (ED) प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के आदेश का इंतजार कर रहा है ताकि वो विजय माल्या की इक्विटी होल्डिंग्स की नीलामी कर सके और ज्यादा से ज्यादा पैसा वापस ले सके।

नई दिल्ली। बीते दिनों शराब कारोबारी विजय माल्या को आर्थिक भगोड़ा करार दिया गया था। अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के आदेश का इंतजार कर रहा है ताकि वो विजय माल्या की इक्विटी होल्डिंग्स की नीलामी कर सके और ज्यादा से ज्यादा पैसा वापस ले सके।


कर्ज से 200 करोड़ रुपए ज्यादा हैं शेयर्स के दाम

माल्या के शेयर्स का दाम 11,000 करोड़ रुपए है, जो उनके कर्ज से 200 करोड़ रुपए अतिरिक्त है। इस बीच शेयर के दामों में गिरावट की भी उम्मीद जताई जा रही है, जिससे शेयर्स के दाम 11,000 करोड़ रुपए से नीचे आ जाएंगे। ईडी का कहना है कि इससे पहले की शेयर में गिरावट हो, वो उन्हें बेचना चाहते हैं। लेकिन ऐसा सिर्फ तभी हो सकता है जब PMLA कोर्ट शेयर बेचने का आदेश दे क्योंकि माल्या को एक नहीं बल्कि कई पार्टियों को पैसा देना है, जिसमें उनकी सौतेली मां और कर्नाटक की सरकार भी शामिल है। माल्या के शेयर्स की बिक्री का पैसा किसे मिलना है इसका फैसला PMLA कोर्ट अगले महीने यानी फरवरी में लेगी। एक अधिकारी का कहना है कि इसके लिए एक कमिटी का गठन भी किया जाएगा।


UK गृह सचिव के फैसले का माल्या कर रहे इंतजार

इससे पहले माल्या की सौतेली मां ऋतु माल्या ने कहा था कि ईडी ने उनकी दो कंपनियों के 17 फीसदी शेयर भी गलती से अटैच कर दिए थे। बता दें 2017 में कर्नाटक की सिंगल बेंच ने ऋतु माल्या को United Breweries Holdings Ltd (UBHL) की लिक्युडेटर नियुक्त किया था। 11,000 करोड़ रुपए के शेयर्स के अतिरिक्त ईडी ने मालया का मुंबई, नई दिल्ली, तमिल नाडु और बैंगलुरू स्थित बंग्लो भी अटैच किया है। बैंगलुरू की संपत्ति में 1,000 करोड़ रुपए का किंग्फिशर टावर फ्लैट्स और 713 करोड़ रुपए की एक अन्य संपत्ति शामिल है। माल्या यूके गृह सचिव की ओर से 9 फरवरी को आने वाले प्रत्यर्पण के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। अगर उनके प्रत्यर्पण को मंजूरी नहीं मिलती तो भारत सरकार लंदन हाई कोर्ट में अपील करेगी।

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