ILFS Case : मनी लॉड्रिंग केस में ED ने दो पूर्व अधिकारियों को किया गिरफ्तार

ILFS Case : मनी लॉड्रिंग केस में ED ने दो पूर्व अधिकारियों को किया गिरफ्तार

Shivani Sharma | Updated: 20 Jun 2019, 12:46:23 PM (IST) कॉर्पोरेट

  • ILFS Case में ED ने दो अधिकारियों को गिरफ्तार है
  • इससे पहले SFIO ने अप्रैल में दो अधिकारियों की गिरफ्तारी की थी
  • याह मामला साल 2018 से चल रहा है

नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय ( ED ) ने आईएलएंडएफएस ( ILFS ) केस लंबे समय से चर्चा में है। कंपनी पर वित्तीय गड़बड़ियों को लेकर जांच की जा रही है। ईडी ने इसी जांच के सिलसिले में दो सीनियर अधिकारियों को गिरफ्तार किया है। आईएलएंडएफएस फाइनेंशियल सर्विसेज (आईएफआईएन) के पूर्व ज्वाइंट एमडी अरुण के साहा और आईएलएंडएफएस ट्रांसपोर्टेशन नेटवर्क (आईटीएनएल) के पूर्व एमडी रामचंद को ईडी ने मुंबई में गिरफ्तार कर लिया है।


मुंबई की विशेष अदालत में किया जाएगा पेश

अधिकारियों ने जानकारी देते हुए बताया कि जिन अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया है उनको आज यानी गुरुवार को मुंबई में एक विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया जाएगा। वहीं पर इन अधिकारियों से बातचीत की जाएगी और मामले में हुई धोखाधड़ी के बारे में जानकारी ली जाएगी।


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ईडी के द्वारा की गई पहली गिरफ्तारी है

आईएलएंडएफएस मामले में ईडी के द्वारा यह पहली गिरफ्तारी की गई है। बता दें कि इससे पहले सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (SFIO) ने अप्रैल में आईएलएंडंएफएस फाइनेंशियल सर्विसेज के पूर्व एमडी रमेश बाबा और आईएल एंड एफएस के पूर्व वाइस चेयरमैन हरि शंकरन को गिरफ्तार किया था। फिलहाल इस समय दोनों ही अधिकारी न्यायिक हिरासत में हैं।


SFIO ने दायर की थी चार्जशीट

SFIO ने 31 को मुंबई के स्पेशन कोर्ट में 800 पन्नों की चार्जशीट दायर की थी। इस चार्जशीट में 30 कंपनियों और व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है। इसमें कंपनी के ऑडिटर्स बीएसआर ऐंड कंपनी और डेलॉयट हैस्किन्स ऐंड सेल्स (डीएचएस), ऑडिट कमिटी मेंबर्स और इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स के नाम भी शामिल हैं।


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क्या था मामला?

बता दें कि आईएलएंडएफएस पर 91,000 करोड़ रुपए का कर्ज है। यह मामला साल 2018 से चल रहा है। इस मामले मेें पिछले साल ग्रुप की कंपनियों ने लोन चुकाने में गड़बड़ी की थी, जिसके बाद याह मामला प्रकाश में आया था। कंपनियों के द्वारा किए गए डिफॉल्ट के बाद ही कर्ज और वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा हुआ था। इस केस से बैंकों को भी काफी नुकसान उठाना पड़ा था और शेयर बाजार में भी इस मामले के बाद काफी गिरावट देखने को मिली थी। सरकार ने 1 अक्टूबर 2018 को आईएलएंडएफएस के बोर्ड को भंग कर उदय कोटक की अध्यक्षता में नया बोर्ड बनाया था।

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