जब चंदा कोचर ने ठुकरा दिया था करीब दो करोड़ रुपए का बोनस, जानिये क्यों?

चंदा कोचर किसी बैंकिंग सेवा देने वाली कंपनी में सीर्इआे बनने वाली पहली महिला थीं।

By: Saurabh Sharma

Published: 30 Mar 2018, 01:15 PM IST

नई दिल्ली। देश में बैंकिंग सेवा प्रदान करने वाली तीसरी सबसे बड़ी कंपनी आर्इसीआर्इसीअार्इ की सीर्इआे चंदा कोचर को अपने संस्थान से क्लीनचिट मिल गर्इ है। चंदा कोचर को आर्इसीआर्इसीआर्इ का साथ मिलना कोर्इ हैरत की बात नहीं है। हैरत की बात हम आपको बताएंगे। जो चंदा ने दो साल पहले कंपनी की भलार्इ के लिए किया था। शायद ही उससे पहले किसी सीर्इआे ने अपनी कंपनी को हालत को देखते हुए एेसा किया हो। आइए आपको भी बताते हैं...

पहले बात करते हैं चंदा कोचर की इनकम की
चंदा कोचर किसी बैंकिंग सेवा देने वाली कंपनी में सीर्इआे बनने वाली पहली महिला थीं। यह मुकाम पाना कोचर के लिए आसान नहीं था। पुरुष प्रधान के उस दौर में एक महिला का बैंकिंग सेवा में इतना बड़ा नाम होना बड़ी बात थी। खास बात यह थी कि उन्होंने अपनी सैलरी से भी सभी चौंका दिया था। फोर्ब्स मैगजीन में दुनिया की 100 सबसे ताकतवर महिलाओं में 32वां पायदान हासिल करने वाली चंदा कोचर को एक दिन की मिलने वाली सैलरी के बारे में सुनेंगे तो आप भी अपने दांतों तले उंगली दबा लेंगे। करीब छह माह पहले आने वाली एक रिपोर्ट के अनुसार उनकी एक दिन की कमाई करीब 2.18 लाख रुपए है। बैंक की एनुअल रिपोर्ट के अनुसार चंदा कोचर की बेसिक सैलरी 2.31 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 2.66 करोड़ रुपए कर दी गई थी।

कुछ एेसा है चंदा कोचर का सैलरी स्ट्रक्चर
चंदा कोचर को बेसिक सैलरी के अलावा आैर भी कर्इ तरह के भत्ते आैर अलाउंस दिए जाते हैं। पिछले वित्त वर्ष में कॉन्ट्रैक्ट बोनस, भत्ता और मुनाफा, प्रोविडेंट फंड, रिटायरमेंट फंड और ग्रेच्युटी फंड मिलाकर चंदा कोचर का कुल वेतन 4.76 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 6.09 करोड़ रुपए कर दिया गया था। वहीं चंदा कोचर को 2.20 करोड़ रुपए का बोनस भी दिया गया था। पिछले वित्तीय वर्ष के मुकाबले भत्ते और लाभ में भी 47% की बढ़ोत्तरी की गई थी। इस हिसाब से उन्होंने एक दिन में करीब 2.18 लाख रुपए कमाए।

जब चंदा ने कर दिया था बोनस लेने से इनकार
इस बात को बहुत कम लोग ही जानते हैं। चंदा कोचर कंपनी के हिसाब से काम ? करने के लिए जानी जाती है। कंपनी को आगे के बढ़ाने के लिए उन्होंने काफी मेहनत भी की है। इसलिए वो कंपनी की सीर्इआे भी बनी। लेकिन दो साल पहले जब जब कंपनी ने उनकी सैलरी में बोनस बढ़ाया गया तो चंदा ने लेने से साफ इनकार दिया। वित्तीय वर्ष 2016 में, बैंक की एमडी एवं सीर्इआे चंदा कोचर ने मार्च 2016 को समाप्त वित्त वर्ष के लिए अपने बोनस को छोड़ने का फैसला इसलिए किया था क्योंकि उस साल चौथी तिमाही में कंपनी के शुद्ध लाभ में गिरावट दर्ज की गई थी।

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