25 साल पहले खरीदे गए इंफोसिस के 10 हजार रुपए के स्टाॅक्स की कीमत हो गर्इ ढार्इ करोड़ रुपए

25 साल पहले खरीदे गए इंफोसिस के 10 हजार रुपए के स्टाॅक्स की कीमत हो गर्इ ढार्इ करोड़ रुपए

Saurabh Sharma | Publish: Jun, 14 2018 03:44:20 PM (IST) कॉर्पोरेट

इंफोसिस ने शेयर मार्केट में अपनी लिस्टिंग के 25 साल पूरे कर लिए हैं। जहां एक आेर कंपनी अपनी सिल्वर जुबली को सेलीब्रेट कर रही है, वहीं दूसरी आेर कंपनी में शुरुआती दौर में निवेश करने वाले करोड़पति हो चुके हैं।

नर्इ दिल्ली। वैसे देश आैर दुनिया में आर्इटी सेक्टर की कर्इ नामी कंपनियां है। लेकिन जो तरक्की इंफोसिस ने की वो शायद ही कोर्इ दूसरी कंपनी कर पार्इ। ये बात सही है कि कुछ महीने पहले कंपनी के साथ विवाद हुआ, लेकिन उसकी विश्वसनियता पर किसी ने आज तक शक नहीं किया। आज इंफोसिस ने शेयर मार्केट में अपनी लिस्टिंग के 25 साल पूरे कर लिए हैं। जहां एक आेर कंपनी अपनी सिल्वर जुबली को सेलीब्रेट कर रही है, वहीं दूसरी आेर कंपनी में शुरुआती दौर में निवेश करने वाले करोड़पति हो चुके हैं। आइए आपको भी बताते हैं कि कंपनी ने अपने निवेशकों को कितना फायदा पहुंचाया।

इंफोसिस का 25 सालों का सफर
इंफोसिस कंपनी 14 जून 1993 को करीब 25 साल पहले शेयर बाजार में लिस्ट हुई थी। इंफोसिस कंपनी टीसीएस के बाद आईटी सेक्टर की दूसरी बड़ी कंपनी में शुमार है। कंपनी सिर्फ आईटी कंपनी के दायरे में ही सीमित नहीं रही बल्कि वो एक ब्लूचिप कंपनी भी बनकर उभरी। इंफोसिस ने कॉर्पोरेच गवर्नेंस को एक अलग परिभाषा देते हुए शानदार रिटर्न भी दिया।

करीब 37 साल पहले हुर्इ थी कंपनी की शुरुआत
इन्फोसिस कंपनी की शुरुआत साल 1981 में हुई थी। इस साल एनआर नारायणमूर्ति ने अपने 6 दोस्तों के साथ इंफोसिस की शुरुआत की थी। इंफोसिस ने 250 डॉलर की पूंजी के साथ पुणे में शुरुआत की गर्इ थी। हैरानी की बात तो ये है कि यह कंपनी शेयर मार्केट में लिस्ट होने वाली पहली आईटी कंपनी है।

निवेशक बन गए करोड़पति
इस कंपनी में शुरूआती तौर पर निवेश करने वाले आज करोड़पति बन चुके हैं। कैसे आइए आपको भी बताते हैं, अगर किसी भी व्यक्ति ने शुरुआती समय में इंफोसिस में 10,000 रुपए का भी निवेश किया होगा तो आज इसकी वैल्यू 2.55 करोड़ रुपये हो गई होगी। फिलहाल कंपनी का मार्केटकैप 2.77 लाख करोड़ रुपए का है।

एेसे बढ़ा कंपनी का रेवेन्यु
इंफोसिस कंपनी का हेड आॅफिस बेंगलुरू में हैं। शुरुआती दौर में कंपनी में कर्मचारियों की संख्या 250 से भी कम थी हालांकि वर्ष 2017 में कर्मचारियों की संख्या 2 लाख के आंकड़े को पार कर गई। वहीं लिस्टिंग के दौरान कंपनी का रेवेन्यू 5 मिलियन डॉलर यानी करीब 33.80 करोड़ रुपए था, जो मार्च 2018 तक 61,941 करोड़ रुपए के स्तर तक पहुंच गया।

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