टेलिकॉम सेक्टर के बाद अब रियल एस्टेट में धूम मचाने उतरे मुकेश अंबानी, ऐसे बदलेंगे भारतीय शहरों की तस्वीर

  • रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की इस प्रोजेक्ट पर 10 साल में खर्च होंगे 75 अरब डॉलर।
  • जानकारों ने किया दावा, इस प्रोजेक्ट से बदल सकता है भारतीय शहरों का ढांचा।
  • 80 के दशक में ही मुकेश अंबानी के पिता धीरूभाई अंबानी ने इस प्रोजेक्ट पर किया था विचार

By: Ashutosh Verma

Updated: 08 Apr 2019, 07:07 PM IST

नई दिल्ली। एशिया के सबसे बड़े धनकुबेर मुकेश अंबानी रिलायंस जियो से टेलिकॉम सेक्टर में धूम मचाने के बाद अब रियल एस्टेट सेक्टर जोरदार एंट्री करने जा रहे हैं। मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ( RIL ) ने मुंबई के पास एक वर्ल्ड क्लास मेगासिटी बनाने के लिए ब्लू प्रिंट तैयार कर लिया है। मीडिया रिपोट्र्स के मुताबिक, मुकेश अंबानी का यह मेगासिटी कितना बड़ा होगा, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि रिलायंस समूह का एकमात्र सबसे बड़ा प्रोजेक्ट होने जा रहा है। इसका हर एक हिस्सा अपने आप में एक प्रोजेक्ट होगा।


बदल सकती है भारतीय शहरों में बुनियादी ढांचे की तस्वीर

अंबानी की कंपनी इस प्रोजेक्ट को सिंगापुर के तर्ज पर तैयार करेगी। इस मेगासिटी में एयरपोर्ट, पोर्ट तथा सी लिंक की कनेक्टिविटी होगी। इस मेगासिटी में करीब 5 लाख लोगों के रहने की व्यवस्था होगी। इस प्रोजेक्ट की खास बात यह भी है कि इसमें हजारों कंपनियों के लिए भी जगह होगी। शुरुआती अनुमान के मुताबिक इस प्रोजेक्ट पर एक दशक में करीब 75 अरब डॉलर का खर्च आ सकता है। जियो की तरह ही इस प्रोजेक्ट को मुकेश अंबानी व्यापकर स्तर पर लॉन्च कर सकते हैं। कई जानकारों का मानना है कि मुकेश अंबानी की यह महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट रियल एस्टेट सेक्टर को उसी तरह प्रभावित करेगी जैसे साल 2016 में लॉन्च के बाद रिलायंस जियो ने टेलिकॉम सेक्टर में किया था। कयास लगाया जा रहा है कि इससे भारतीय शहरों में बुनियादी ढांचे की तस्वीर बदल जाएगी।


किफायती होंगी घरों की कीमतें

रिपोर्ट में एक रियल एस्टेट जानकार का हवाला देते हुए कहा गया है कि इस मेगासिटी के अस्तित्व में आने के बाद मुंबई का अंदाज बदल सकता है। उनका मानना है कि यह रिवर्स माइग्रेशन का कारण बन सकता है। इसके पीछे की वजह यह बताई जा रही है कि इस मेगासिटी में घरों की कीमतें मुंबई के रियल एस्टेट कंपनियों द्वारा बेचे जा रहे घरों की तुलना में काफी कम होगी। कंपनी खुद ही इस प्रोजेक्ट को डेवलप करेगी जोकि इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत है। डेवलपमेंट ही नहीं बल्कि इस मेगासिटी के अस्तित्व में आने के बाद कंपनी खुद ही इसका प्रशासन अपने नियंत्रण में करेगी। कंपनी इसके लिए 'स्पेशल प्लानिंग अथॉरिटी' ( Special Planning Authority ) लाइसेंस भी ले लिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस कदम से कंपनी द्वारा इस प्रोजेक्ट को डेवलप करने के लिए कम लागत आएगी।


पिता धीरूभाई अंबानी का सपना करेंगे साकार

गौरतलब है कि रिलायंस समूह के संस्थापक व मुकेश अंबानी के पिता धीरूभाई अंबानी ने ही पहली बार नवी मुंबई में एक विश्वस्तरीय शहर बसाने का आइडिया लेकर आए थे। 80 के दशक में ही धीरूभाई अंबानी ने इसपर विचार किया था। ऐसे में इस प्रोजेक्ट आने के बाद उम्मीद भी की जा रही है कि मुंबई को भीड़भाड़ से भी निजात मिल जाएगी। बता दें कि पिछले माह ही वैश्विक स्तर का एक इकोनॉमिक हब डेवलप करने के लिए मुकेश अंबानी ने नवी मुंबई एसईजेड ( NMSEZ ) से 2,100 करोड़ रुपए की शुरुआती भुगतान पर 4,000 एकड़ जमीन को लीज पर लेने का घोषणा किया था। एनएमएसईजेड को मुकेश अंबानी, जय कॉर्प इंडिया, स्कील इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और सिटी ऐंड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन प्रोमोट करती है।

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