मुश्किल में फंसे जेट एयरवेज के मालिक नरेश गोयल ने रतन टाटा व मुकेश अंबानी से मांगी मदद

जेट एयरवेज के परिचालन को लेकर वित्तीय संकट का सामना कर रहे मालिक नरेश गोयल ने रतन टाटा व मुकेश अंबानी से मदद मांगी है।

By: Ashutosh Verma

Updated: 29 Oct 2018, 11:49 AM IST

नर्इ दिल्ली। जेट एयरवेज (इंडिया) लिमिटेड को जरूरी पूंजी जुटाने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ रहा है। अब इस विमान कंपनी के संस्थापक नरेश गोयल ने दो एशियार्इ अरबपतियों से मदद मांगी है। इन अरबपतियों में रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी व टाटा ग्रुप के चेयरमैन रतन टाटा का नाम शामिल है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, जेट एयरवेज में 51 फीसदी की हिस्सेदारी रखने वाले नरेश गोयल ने 15 दिन पहले ही रतन टाटा से इस बाबत बात की है।


मुकेश अंबानी से व्यक्तिगत तौर पर मांगी मदद

इसके पहले रिलायंस इंडस्ट्रीज एविएशन सेक्टर में किसी भी तरह के निवेश की बातों को हमेशा खारिज करती आर्इ है। बता दें कि रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास दिवालिया हो चुकी किंगफिशर एयरलाइंस में निवेश करने का विकल्प था। लेकिन इस बार नरेश गोयल ने व्यक्तिगत तौर पर मुकेश अंबानी से बात की है। हालांकि इस मामले से जुड़े सूत्रों का कहना है कि मुकेश अंबानी ने गोयल को अभी तक कोर्इ जवाब नहीं दिया है।

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टाटा रख सकते हैं यह शर्त

सूत्राें ने कहा कि टाटा समूह जेट एयरवेज में हिस्सेदारी लेने में रूचि तो रखती है लेकिन यह इस बात पर निर्भर करता है कि गोयल उन्हें परिचालन नियंत्रण का भी जिम्मा देते है या नहीं। एक अन्य सूत्र का कहना है कि गोयल कंपनी में हिस्सेदारी बेचने को लेकर सहमत तो हैं लेकिन परिचालन नियंत्रण किसी आैर को देने की बात के बारे में आने वाले समय में ही पता चल सकेगा। बता दें कि पहले टाटा ग्रुप के पास एयर एशिया प्राइवेट लिमिटेड में हिस्सेदारी है। इसके साथ ही सिंगापुर एयरलाइंस लिमिटेड में भी टाटा ग्रुप की भी हिस्सेदारी है।


समय रहते जेट एयरवेज काे संभलना होगा

गौरतलब है कि जेट एयरवेज में अबू-धाबी के एतिहाद एयरवेज की 24 फीसदी हिस्सेदारी है। यदि इस विमान कंपनी को अपना परिचालन बनाए रखना है तो उसे समय रहते पूंजी जुटाने के साथ परिचालन खर्च का भी प्रबंध करना होगा। इस मामले से जुड़े जानकारों का कहना है कि घरेलू विमान सेवाआें में बढ़ते प्रतिस्पर्धा, र्इंधन की कीमतों में तेजी व अन्य खर्चों के बाद से जेट एयरवेज को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

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पहले भी मुकेश अंबानी से मांगी जा चुकी है मदद

बताते चलें कि यह कोर्इ पहला मामाला नहीं है जब मुकेश अंबानी के पास किसी ने मदद की गुहार लगार्इ है। इसके पहले साल 2010 में भारत के दूसरे सबसे बड़े होटल चेन EIH लिमिटेड के पृथ्वी राज सिंह आेबेराॅय ने भी मुकेश अंबानी से मदद मांगा था। उस समय मुकेश अंबानी ने कंपनी में 14.12 फीसदी की हिस्सेदारी खरीदा था। साल 2012 में नेटवर्क 18 के संस्थापक राघव बहल ने भी 2012 में, एक जटिल संरचना के माध्यम से रिलायंस ने वैकल्पिक रूप से परिवर्तनीय डिबेंचर (ओसीडी) के रूप में नेटवर्क 18 संस्थापक राघव बहल को प्रमोटर वित्तपोषण बढ़ाया। उन्होंने उस वक्त अधिग्रहण को वित्त पोषित करने और अपने कर्ज के हिस्से को रिटायर करने के लिए आय का उपयोग किया।

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