एक महीने में भारत आ सकता है विजय माल्या, जानिए सुप्रीम कोर्ट को दिए हलफनामे में केंद्र सरकार ने क्या दी जानकारी

  • केंद्र ने कहा, यूके होम ऑफिस के अनुसार एक और कानूनी मुद्दे को प्रत्यर्पण से पहले हल करने की जरुरत
  • गृह मंत्रालय ने हलफनामे में कहा, माल्या के भारत में आत्मसमर्पण को 28 दिनों के भीतर पूरा किया जाना चाहिए

By: Saurabh Sharma

Updated: 07 Oct 2020, 03:46 PM IST

नई दिल्ली। गृह मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि ब्रिटेन गृह कार्यालय (यूके होम ऑफिस) ने सूचित किया है कि एक और कानूनी मुद्दा है, जिसे विजय माल्या के प्रत्यर्पण से पहले हल करने की आवश्यकता है और यह मुद्दा है 'बाहर और इसके अलावा' प्रत्यर्पण प्रक्रिया। एक हलफनामे में गृह मंत्रालय ने कहा कि माल्या के भारत में आत्मसमर्पण को 28 दिनों के भीतर पूरा किया जाना चाहिए। मंत्रालय ने शीर्ष अदालत को बताया कि हालांकि यूके होम ऑफिस ने कहा है कि आगे एक कानूनी मुद्दा है, जिसे प्रत्यर्पण होने से पहले हल करने की जरूरत है।

यह भी पढ़ेंः- 10 साल के हुए Instagram की इन बातों को आप भी नहीं जानते होंगे

हलफनामे में कहा गया है कि ब्रिटेन पक्ष ने आगे कहा है कि यह मुद्दा बाहर और प्रत्यर्पण प्रक्रिया से अलग है, लेकिन इसका प्रभाव यह है कि ब्रिटेन के कानून के तहत प्रत्यर्पण तब तक नहीं हो सकता है, जब तक कि इसे हल नहीं किया जाता है। मंत्रालय ने कहा कि ब्रिटेन ने यह भी सूचित किया है कि यह अलग कानूनी मुद्दा प्रकृति में न्यायिक और गोपनीय है। इससे पहले केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या के प्रत्यर्पण का मामला समाप्त हो चुका है, लेकिन ब्रिटेन में इस मामले में कुछ गोपनीय कार्यवाही चल रही है, जिसकी जानकारी भारत को भी नहीं दी गई है। केंद्र ने कहा कि भारत को माल्या के प्रत्यर्पण में देरी की जा रही है।

यह भी पढ़ेंः- Flipkart Big Billion Days Sale: एसबीआई से लेकर बजाज और पेटीएम तक जाने कितना होगा फायदा

केंद्र का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायमूर्ति यू.यू. ललित की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया कि ब्रिटेन की शीर्ष अदालत ने प्रत्यर्पण का आदेश दे दिया था, लेकिन इस पर अमल नहीं हो रहा है। कुछ गुप्त कार्यवाही हो रही है, जिसके बारे में भारत सरकार को भी अवगत नहीं कराया गया है। भारत सरकार को न तो कोई जानकारी दी गई है और न उसे पक्षकार बनाया गया है। पीठ ने माल्या के वकील अंकुर सहगल से कहा कि वे इन गोपनीय कार्यवाहियों की प्रकृति के बारे में अदालत को सूचित करें।

यह भी पढ़ेंः- Amazon Prime Day Sale : ग्रेट इंडियन फेस्टिवल 17 अक्टूबर से होगी शुरू, जानिए कितना मिलेगा डिस्काउंट और ऑफर्स

न्यायमूर्ति ललित ने सहगल से कहा कि वह अदालत को सूचित करें कि उनका मुवक्किल शीर्ष अदालत के समक्ष कब पेश होगा, ताकि अदालत की अवमानना के लिए सजा पर सुनवाई उनकी उपस्थिति में की जा सके, जिसके लिए वह पहले ही दोषी पाए जा चुके हैं। शीर्ष अदालत ने माल्या के वकील से दो नवंबर तक इन सवालों के जवाब देने को कहा है। सहगल ने कहा कि वह अपने मुवक्किल से निर्देश लेंगे। 31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने 2017 के फैसले की समीक्षा की मांग वाली माल्या की याचिका को खारिज कर दिया था, जिसने उन्हें अदालत की अवमानना के लिए दोषी ठहराया था। शीर्ष अदालत ने पांच अक्टूबर को अदालत के समक्ष माल्या को उपस्थित होने का निर्देश दिया था।

यह भी पढ़ेंः- चने के बाद अरहर की दाल भी हो सकती है थाली से गायब, 150 रुपए प्रति किलो तक पहुंचे दाम

शीर्ष अदालत ने माल्या को अवमानना का दोषी माना था, क्योंकि शराब कारोबारी ने अपनी संपत्ति का पूरा हिसाब नहीं दिया था। न्यायाधीश यूयू ललित और अशोक भूषण की पीठ ने पुनर्विचार याचिका को खारिज करते हुए कहा कि मामले में फिर से सुनवाई की अनुमति नहीं दी जा सकती है। विजय माल्या बंद हो चुकी किंगफिशर एयरलाइंस के लिए बैंकों से लिए नौ हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के कर्ज की अदायगी नहीं करने के मामले में आरोपी है। इस समय वह ब्रिटेन में रह रहा है, जिसके प्रत्यर्पण के लिए सरकार कोशिश कर रही है।

Show More
Saurabh Sharma
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned