YES Bank Scam: रवनीत गिल का आरोप, राणा कपूर ने गलत तरीके से दिए DFHL को लोन

- ED ने पूर्व एमडी रवनीत गिल के 11 मार्च के बयान को Chargesheet में किया दाखिल
- Yes Bank के Co Founder राणा कपूर पर चल रहा है मनी लांड्रिंग का केस, लगे हैं गंभीर आरोप

By: Saurabh Sharma

Updated: 07 May 2020, 04:52 PM IST

नई दिल्ली। यस बैंक घोटाला ( YES Bank Scam ) को लेकर प्रवर्तन निदेशालय की ओर से तैयार की गई चार्जशीट कई परतें खोल रही हैं। ईडी की चार्जशीट बैंक के पूर्व एमडी रवनीत गिल ( Ravneet Gill ) के बयान को शामिल किया गया है, जिसमें कहा गया है कि बैंक के डूबने ( Yes Bank Collapse ) की असल वजह डीएफएचएल ( DHFL ) को दिया गया 3700 करोड़ रुपया है, जो अभी तक नहीं लौटाया गया है। वहीं उन्होंने राणा कपूर ( Rana Kapoor ) पर यह यह भी आरोप लगाया गया है कि डीएफएचएल की दूसरी कंपनियों को भी गलत तरीकों से भी लोन बांटा गया। आपको बता दें कि राणा कपूर के हटने के बाद रवनीत गिल को यस बैंक का मैनेजिंग डायरेक्टर बनाया गया था। रवनीत गिल ने 11 मार्च को प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों के सामने बयान दिया था। जिसे ईडी ने राणा कपूर के खिलाफ तैयार की गई चार्जशीट में भी शामिल किया गया है।

3700 करोड़ रुपए
एजेंसी के अनुसार यस बैंक ने डीएफएचएल के डिबेंचर्स खरीदें थे। यह डिबेंचर्स अप्रैल से जून 2018 के बीच खरीदे गए, जिनकी कीमत 3700 करोड़ रुपए थी। जानकारी के अनुसार डीएफएचएल प्रमोटर्स ने राणा कपूर एंड फैमिली को बिल्डर लोन के तहत 600 करोड़ रुपए दिए। खास बात तो ये है कि डीएफएचएल प्रमोटर्स ने यस बैंक के 3700 करोड़ रुपए नहीं लौटाए तो डिबेंचर्स में लगे थे। आपको बता दें कि ईडी ने राणा कपूर की बेटियो के खिलाफ भी चार्जशीट दाखिल की है। राणा कपूर 8 मार्च को गिरफ्तार के बाद से न्यायिक हिरासत में है।


डीएफएचएल की दूसरी कंपनी को दिया 750 करोड़ रुपए का लोन
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार यस बैंक की डीएफएचएल पर मेहरबानी यहीं खत्म नहीं हुई। बैंक ने डीएफएचएल दूसरी रियल एस्टेट कंपनी बिलीफ रिएलटर प्राइवेट लिमिटेड को 750 करोड़ रुपए लोन के रूप में दिए। इस लोन को कपूर की अध्यक्षता में बैंक की मैनेजमेंट क्रेडिट कमिटी ने 18 जून 2018 को पास किया था। यह लोन के देने के बाद बैंक की रेटिंग में गिरावट देखने को मिली। ताज्जुब की बात तो ये है कि लोन के लिए बिल्डर से एंड-यूज सर्टिफिकेट या वैल्यूएशन के तहत एक भी डॉक्युमेंट नहीं दिया। इस बात की छूट भी बैंक की कमेटी ने ही दी थी। गिल के अनुसार रियल एस्टेट कंपनी को लोन देना काफी जोखिम भरा था।

आखिर किस तरह के थे जोखिम
- बिलीफ रिएलटर प्राइवेट लिमिटेड के प्रोजेक्ट्स को कई लेवल लेना था अप्रूवल।
- रीहैबिलिटेशन के लिए स्लम की ओर से लेनी एनओसी।
- प्रोजेक्ट के प्रीमियम रेजिडेंशियल अपार्टमेंट की शुरुआती कीमत 20 करोड़ रुपए थी।
- जबकि मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन में महंगे घरों की डिमांड में काफी कम थी।

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Saurabh Sharma Desk/Reporting
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