scriptRail Budget 2016 suresh prabhu kanpur reaction | जानिए प्रभु के रेल बजट पर क्या कह रहे हैं कानपुर वासी | Patrika News

जानिए प्रभु के रेल बजट पर क्या कह रहे हैं कानपुर वासी

प्रभु ने पूरा बजट पढ़ा, और जब आखिरी लाइन पढ़ कर खत्म की, तो कानपुर वासियों के होश ही उड़ गए।

कानपुर

Published: February 25, 2016 09:48:05 pm

कानपुर. मोदी सरकार का तीसरा और सुरेश प्रभु ने बतौर रेलमंत्री दूसरा रेल बजट पेश किया। रेलमंत्री ने जैसे ही 12 बजे बजट पढ़ना शुरु किया तो कानपुर की सड़कों पर सन्नाटा पसर गया। लोग अपने-अपने घरों में टेलीवीजन और सोशल साइट्स से जुड़े रहे और कानपुर शहर को मिलने वाली सौगात के बारे में सुनते रहे। प्रभु ने पूरा बजट पढ़ा, और जब आखिरी लाइन पढ़ कर खत्म की, तो शहरवासियों के होश ही उड़ गए। कारोबारी हो या आमशहरी, नौकरशाह के साथ स्टूडेंट सब निराश दिखे। रेल से सफर करने वालों का कहना था कि बजट में इस बार यात्री किराया में रियायत दिए जाने की उम्मीद थी, लेकिन किराया कम नहीं किया गया। वहीं यहां से कोई नई ट्रेन के साथ ही अन्य सुविधा नहीं दी गई। विपक्षी पार्टियों ने भी रेलवे बजट को हवाहवाई करार दिया।

सेंट्रल स्टेशन को वर्ड क्लास बनाने की कही थी बात, इस बजट में कुछ नहीं खास
सुरेभ प्रभु ने अपने पहले बजट में कानपुर सेंट्रल स्टेशन को वर्ड क्लास की बात के साथ धन देने की बात कही थी, लेकिन जमीन पर आज तक कुछ काम नहीं हुआ। एक प्राइवेट फर्म में कार्यरत विजय सिंह का कहना है कि आस थी कि रेलमंत्री सेंट्रल स्टेशन को वल्ड क्लास सुविधा युक्त करने के लिए अपनी तिजोरी से धन देंगे, पर उन्होंने शहर का एकबार भी नाम नहीं लिया। वहीं गृहणी रेखा निगम का कहना है कि भले ही यात्री किराया कम न हुआ हो लेकिन बुजुर्गों को रियायत दी गई है। अच्छा होता कि युवाओं के लिए भी कोई छूट दी जाती।


पटरियों के आधुनिकीकरण के लिए नहीं की पहल -
जानकारों की माने तो रेल बजट में यात्रियों के साथ सुविधाओं को लेकर भी ज्यादा फोकस नहीं किया गया। सेन्ट्रल स्टेशन पर अक्सर आउटरों पर ट्रेनें आने के बाद प्लेटफार्म खाली न होने के चलते घंटों खड़ी रहती हैं। जिसके चलते यात्री काफी परेशान होते हैं। बजट में इसको लेकर भी कोई विजन नहीं रखा गया और न ही आईआईटी के जरिए इस समस्या को दूर करने की बात की गई। पटरियों को लेकर जरूरी बदलाव भी बजट से दूर हैं। इसमें यात्रियों को बुनायादी सुविधाओं को दिया जाना बेईमानी होगा।

कर्मचारियों को मिली निराशा
बजट को लेकर सबसे ज्यादा आशांवित रेलवे कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारी व कामगार थे। उनको लग रहा था कि इस बार रेल मंत्री कोई सौगात देंगे, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। रेल बजट आने के बाद मुखर
होकर कर्मचारी नेताओं ने कुछ नहीं कहा, लेकिन दबी जुबान में उन्हें बजट को पूरी तरह से निशारा भरा बताया।

ट्रेनों की लेटलतीफी पर प्रभु करें कृपा-
संसद में जिस समय रेल मंत्री रेलवे बजट की खूबियां गिना रहे थे, उस समय सेन्ट्रल स्टेशन पर कई गाडि़यां लेट चल रहीं थी। ऐसे में जब यात्रियों से बजट को लेकर बातचीत की गई तो उनका गुस्सा फूट पड़ा। यात्रियों का कहना है कि प्रभु ऐसी कृपा करो कि ट्रेनें तो सही समय पर आएं। तो वहीं सुरक्षा को लेकर महिलाएं में भी झिल्लाहट देखने को मिली। समय की दुहाई देने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल के दूसरे रेल बजट में भी ट्रेनों की लेटलतीफी पर ठोस कदम नहीं उठाया गया। एक तरफ जहां रेल मंत्री सुरेश प्रभु रेल बजट को आम लोगों की उम्मीदों का बजट बताते है। तो वहीं गाडि़यों के देरी होने पर यात्री इसे आम लोगों के बजट को सिरे से खारिज कर रहें हैं। विजय का कहना है कि प्रधानमंत्री अपने भाषणों में अक्सर समय को पकड़ने की बातें करते हैं। तो रेलवे की ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं करते कि यात्रियों का समय बर्बाद न हो। कालका मेल में जाने के लिए बैठे बुजुर्ग रामरतन ने बताया कि रेलवे की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए कि गाडि़यां समय पर चलें। तभी प्रधानमंत्री को जनता से अपील करने का हक होगा कि समय को बर्बाद न करें। राप्ती सागर के
इंतजार में बैठी गुड़िया का कहना है कि जो लोग इंटरनेट से जुड़े हुए हैं, उन लोगों को स्टेशन में गाड़ी का इंतजार नहीं करना पड़ता। लेकिन हमारे जैसे यात्री गाड़ी के समय पर आकर यहां झल्लाते रहते हैं।

प्रभु ने महिलाओं के लिए कुछ नहीं किया-
रेलवे ने महिलाओं की सुरक्षा को देखते हुए 182 नंबर हेल्पलाइन शुरू की है। लेकिन महिला यात्री अपने को असुरक्षित मान रही हैं। रदनी तिवारी ने बताया कि सरकार चाहे महिलाओं के लिए कितनी भी योजनाएं लागू कर दें। लेकिन जब तक जिम्मेदार लोगों में इच्छाशक्ति नहीं होगी तब तक महिलाएं यात्रा में असुरक्षित महसूस करती रहेंगीं। सलमा ने कहा कि महिलाओं के लिए अलग से बोगी होती है। इसके बावजूद असुरक्षा के चलते उसमें यात्रा करने से महिलाएं बचती रहती हैं।

आवारा जानवर परेशानी का सबब-
सेन्ट्रल स्टेशन में अधिकारियों व कर्मचारियों की लापरवाही से आवारा जानवर यहां पर अपना अड्डा बनाए हुए हैं। आए दिन यात्रियों को खुला घूम रहें सांड चुटहिल कर रहें हैं। तो वहीं बंदरों का आतंक भी यात्रियों पर,भारी पड़ रहा है। कुछ भी खान-पान का सामान बंदरों ने देख नहीं कि तुरंत,झपट्टा मार कर छीन लेतें हैं। अधिकारियों के दौरों के दौरान स्टेशन में कोई भी जानवर दिखाई नहीं देता।

आधे काउंटर बंद जनरल टिकट के लिए सेन्ट्रल स्टेशन में कहने को तो आठ काउंटर बने हुए हैं, लेकिन इनमें आधे अक्सर बंद ही रहते हैं। गुरुवार को जिस समय संसद में रेल बजट पारित हो रहा था उस समय भी ऐसा ही नजारा देखने को मिला। यात्रियों का आरोप है कि स्टेशन के बाहर खुले प्राइवेट काउंटरों की सांठ-गांठ से यहां के कर्मचारी काउंटर नहीं खोलते हैं।

तो नहीं दम तोड़ता यात्री-
जहां एक ओर संसद भवन में रेलमंत्री प्रभू जनता को बेहतर सुविधा देने के लिए अपना बजट पेश कर रहे थे तो वहीं कानपुर सेन्ट्रल स्टेशन पर इलाज की सुविधा न मिलने पर एक युवक ने तड़प-तड़प कर ट्रेन में जान दे दी। बेटे की मौत के बाद यात्रियों की शोरगुल में पिता की रोने की आवाज गुंज उठी। मामले की जानकारी पर पहुंची जीआरपी ने शव को नीचे उतारा और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। हालांकि रिपोर्ट में युवक की मौत हार्ट अटैक से हुई है | मूलरुप से बिहार भागलपुर गांव में रहने वाला किसान अरुण कुमार का 16 वर्षीय बेटा सोनू को दिल की बिमारी थी। परिवार ने गांव के डाक्टरों को दिखाया तो चिकित्सकों ने इलाज के लिए दिल्ली रेफर कर दिया। बुधवार की शाम किसान बेटे को लेकर इलाज के लिए विक्रमशिला एक्सपे्रस ट्रेन में बैठकर दिल्ली के लिए रवाना हुए थे। आज सुबह ट्रेन कानपुर स्टेशन पर रुकी कि अचानक सोनू के दिल में दर्द उठा। यह जानकारी पिता ने ट्रेन में मौजूद कोच अटेंडेन्ट को जानकारी देते हुए डाक्टरों को मुहैया करने की बात कही। लेकिन जबतक डाक्टर पहुंचते तबतक सोनू मौत हो चुकी थी।

क्या बोले जनप्रतिनिधि-
रेलमंत्री ने कानपुर के लोगों के साथ छल किया है। यूपीए की सरकार के दौरान बुंदेलखंड के लिए कानपुर से धार्मिक नगरी चित्रकूट के लिए इंटरसिटी ट्रेन खजुराहो तक ट्रैक के बाद ट्रेन शुरु हुई थी। मोदी सरकार अपने तीसरे रेल बजट ने शगरवासियों के साथ बुंदेलखंड के साथ भेदभाव किया है। सुरेश प्रभु ने कानपुर के लिए पिछले बजट में की गईं घोषणाएं अभी तक पूरी नहीं की हैं।

बजट में कानपुर शहर की उपेक्षा की गई
बजट 2016 अब तक सबसे निराशा कर देने वाला रहा | यह बात बिल्हौर की विधायक व यूपी की मंत्री अरुणा कोरी ने कही | मिनिस्टर ने रेल बजट पर कहा की इस बजट में कुछ भी खास और नया नहीं है। इस बार बजट से पहले हमारे सीएम अखिलेश यादव ने कानपुर के लिए रेल मंत्री को पत्र लिखकर कुछ मांग भी की थी। उन्होंने कहा की केंद्र सरकार हमेशा ही उत्तर प्रदेश की उपेक्षा करती रही है और बजट का हमारा हिस्सा भी हमें नहीं दिया गया है इससे यह साफ है की केंद्र की भाजपा सरकार उत्तर प्रदेश के साथ हमेशा ही पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाती है।

बजट में कानपुर शहर की उपेक्षा की गई-
बजट 2016 अब तक सबसे निराशा कर देने वाला रहा | इस बजट में कुछ भी खास और नया नहीं है। कानपुर से भोपाल और इंदौर के लिए एक - एक नई ट्रेन शुरु करने के लिए मंत्री को पत्र लिखा था, लेकिन उस पर उन्होंने विचार तक नहीं किया | कहा की केंद्र सरकार हमेशा ही उत्तर प्रदेश की उपेक्षा करती रही है और बजट का हमारा हिस्सा भी हमें नहीं दिया गया है |

रेलमंत्री ने मैनचेस्टर के साथ भेदभाव किया है, जिसका खामियाजा मोदी जी को विधानसभा चुनाव में यहां के लोग अपने मत के जरिए देंगे। यूपीए सरकार के टाइम ही सबसे ज्यादा रेलवे कानपुर को मिला। मोदी सरकार का बजट सिर्फ कागजों में ही सिमटा।

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