पीडब्ल्यूडी के कई अफसर अनियमितता में फंसे, कई निलंबित, कई पर होगी कार्रवाई

पीडब्ल्यूडी के कई अफसर अनियमितता में फंसे, कई निलंबित, कई पर होगी कार्रवाई
PWD Department

Shatrudhan Gupta | Publish: Oct, 14 2017 06:44:13 PM (IST) Lucknow, Uttar Pradesh, India

लाख कोशिश व हिदायतों के बावजूद पीडब्ल्यूडी अफसर भ्रष्टाचार से अपने को अलग नहीं कर पा रहे हैं।

लखनऊ. प्रदेश की योगी सरकार भले ही यह कहे कि विभागों से भ्रष्टाचार खत्म हो रहा है, लेकिन यह जमीन पर नहीं दिख रहा है। उत्तर प्रदेश के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में प्रदेश सरकार की लाख सख्ती के बावजूद भ्रष्टाचार कम होता नहीं दिख रहा है। लाख कोशिश व हिदायतों के बावजूद पीडब्ल्यूडी अफसर भ्रष्टाचार से अपने को अलग नहीं कर पा रहे हैं। लगातार विभाग में अनियमितता मिल रही है, जिस कारण प्रदेश सरकार की भी किरकिरी हो रही है। पीडब्ल्यूडी में एक और भ्रष्टाचार पकड़ा गया है।

इसका खुलासा राज्य शासन द्वारा गठित टीम की रेंडम जांच में हुआ है। मालूम हो कि इसके पहले प्रदेश के उप मुख्यमंत्री व पीडब्ल्यूडी मंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने अनियमितता के आरोप में 11 अधिकारियों को निलंबित कर दिया था और 88 को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था। इस कार्रवाई के बाद विभाग में हड़कंप मच गया था। बावजूद इसके एक बार फिर अनियमितता की शिकायतें मिलने लगी हैं।

दावे से इतर, हकीकत कुछ और...

प्रदेश सरकार को सौंपी गई रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रदेश के 17 जिलों की 54 सड़कें बनते ही टूट गईं। इसमें प्रदेश सरकार के कराड़ों रुपए बर्बाद हो गए। रिपोर्ट आने के बाद इस ूपूरे मामले में 104 पीडब्ल्यूडी अधिकारियों को नोटिस जारी किया गया है। दरअसल, उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश को गड्ढामुक्त करने की घोषणा की थी, इसके लिए बजट भी जारी किया गया था। हालांकि, बारिश की वजह से बीच में ही काम को रोक दिया गया था, लेकिन सरकार ने दावा किया था कि प्रदेश की ७० फीसदी से ज्यादा सड़कें बन चुकी हैं। लेकिन, हकीकत कुछ और ही बयां करती है। प्रदेश की अधिकतर सड़कें टूटी हुई हैं। राजधानी लखनऊ के कई क्षेत्रों की सड़कें गड्ढे में तब्दील हैं।

भाजपा विधायकों व सांसदों ने की थी शिकायत

मालूम हो कि यूपी में भाजपा सरकार बनने के बाद सबसे पहले प्रदेश की सड़कों को गड्ढामुक्त करने की घोषणा की गई थी, जिसके तहत करीब 85 हजार किलोमीटर सड़कों को जून माह तक गड्ढामुक्त करने का लक्ष्य रखा गया था। इस लक्ष्य के तहत विभाग ने 74 हजार किलोमीटर सड़कों को गड्ढामुक्त करने का दावा किया था, लेकिन इसके बाद भाजपा विधायक और सांसदों ने ही शिकायत की कि सड़कें गड्ढामुक्त नहीं हुईं है। इन शिकायतों के बाद डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य टीम गठित कर प्रदेश की गड्ढामुक्त सड़कों की जांच कराई तो विभाग के अधिकारियों की पोल खुल गई। खास बात यह रही कि जांच रिपोर्ट में केशव के गृह जिले इलाहाबाद में भी सड़क निर्माण में अनियमितता पाई गई।

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