...जब सोकर जागे तो खत्म हो चुका था लोकतंत्र 

 ...जब सोकर जागे तो खत्म हो चुका था लोकतंत्र 
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देश में बहुत सारे लोग 25 जून 1975 की रात नींद में सोये, तो उन्हें इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि जब वे नींद से जागेंगे तो देश का लोकतंत्र कैद हो चुका होगा। 

लखनऊ. देश के लोकतंत्र पर आपातकाल को सबसे बड़े धब्बे के रूप में याद किया जाता है। देश में बहुत सारे लोग 25 जून 1975 की रात नींद में सोये, तो उन्हें इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि जब वे नींद से जागेंगे तो देश का लोकतंत्र कैद हो चुका होगा। इसके विरोध में बहुत सारे लोगों ने बिगुल फूँका। जेल गए। इन सब परिस्थितियों और संघर्षों के लगभग 22 महीने बाद देश में लोकतंत्र की वापसी हुई। देश की लोकतंत्र की वापसी के समय को याद करने और उस समय संघर्ष की आवाज  बुलंद करने वालों को सम्मानित करने के मकसद से लखनऊ में लोकतंत्र सेनानी समारोह का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में उन सेनानियों का सम्मान किया गया जिन्होंने आपातकाल के दौरान सत्ता के जुल्मों के खिलाफ संघर्ष किया था। 

इन सेनानियों का हुआ सम्मान 

गोमती नगर स्थित संगीत संगीत नाटक अकादमी सभागार में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में लखनऊ के पूर्व सांसद लाल जी टंडन मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर विनय कुमार पाठक ने की। इस मौके पर सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और आज का भारत विषय पर संगोष्ठी का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में ओम पाल सिंह, विंध्यवासिनी कुमार, रमा शंकर उपाध्याय, राजेंद्र तिवारी, मणि पाल, सतीश चंद्र राय, रमा शंकर त्रिपाठी, अजित कुमार सिंह, महेंद्र सिंह, गणेश राय का सम्मान किया गया।

इस तरह साझा किये अनुभव 

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद पूर्व सांसद और वरिष्ठ भाजपा नेता लाल जी टंडन ने आपातकाल के दौर को याद करते हुए जेपी आंदोलन का उल्लेख किया। टंडन ने इस बात का जिक्र किया कि जब इमरजेंसी के खिलाफ आंदोलन का जेपी नेतृत्व कर रहे थे तब जेपी के आंदोलन में किस तरह समाजवादी लोग बाधा पैदा कर रहे थे। उन्होंने इस आंदोलन में जनसंघ, नानाजी देशमुख, पंडित दीन दयाल उपाध्याय सहित खुद की भूमिका की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि जब आपातकाल लागू हुआ तब लखनऊ में सबसे पहले उनकी गिरफ़्तारी हुई थी। कार्यक्रम में मौजूद लोकतंत्र सेनानी ओम पाल सिंह ने कहा कि जेल में अपने वरिष्ठ सहयोगी से मिलने गए थे। उसी समय उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया गया। ओमपाल ने महात्मा गांधी की हत्या के बाद गुरु गोलवरकर को जेल भेजे जाने के प्रसंग का भी जिक्र किया। इस मौके पर कार्यक्रम के संयोजक कमल ज्योति पत्रिका के प्रबंध सम्पादक राज कुमार ने सभी का धन्यवाद दिया। 

 
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