भगवान लोक मर्यादा को भी छोड़कर भक्त का कल्याण करते है - लक्ष्मी प्रिया

कृष्ण ने परम दीनहीन अपने मित्र सुदामा को अपने आसन पर बैठाकर स्वयं

By: Ritesh Singh

Updated: 29 Dec 2020, 09:12 PM IST

लखनऊ। भगवान नारायण अपने द्वारा दिये गये वरदान को सिद्व करने व भक्त के अपने को समर्पण कर देने पर भगवान लोक मर्यादा को भी छोड़कर भक्त का कल्याण करते है, जैसे भौमासुर ने भगवान से वरदान मांगा था कि मेरी मृत्यु मेरी मां के कहने पर हो। इसी कारण पृथ्वी स्वरुपा सत्यभामा के कहने पर भगवान ने भौमासुर का वध किया क्योंकि भौम पृथ्वी का पुत्र है। विश्वनाथ मन्दिर के 29वें स्थापना दिवस के मौके पर श्रीरामलीला पार्क सेक्टर-’ए’ सीतापुर रोड योजना कालोनी में स्थित मन्दिर परिसर में चल रहे।

श्रीमद् भागवत कथा के सातवे व अंतिम दिन मंगलवार को कथाव्यास पूज्या लक्ष्मी प्रिया ने कहाकि भौमासुर के कारागार में बन्द सोलह हजार एक सौ कन्याओं को जब भगवान ने मुक्त कराया तो सभी कन्याओं ने भगवान को ही पति के रुप में प्राप्त करने की इच्छा जाहिर की। तब परम योगी होते हुए भी भक्त पर अनुग्रह करने के लिए भगवान ने सोलह हजार एक सौ कन्याओं का विवाह किया। भगवान श्रीकृष्ण व सुदामा की मित्रता का वर्णन करते हुए पूज्या लक्ष्मी प्रिया ने कहाकि भगवान श्रीकृष्ण ने परम दीनहीन अपने मित्र सुदामा को अपने आसन पर बैठाकर स्वयं अपने हाथों से ब्राह्मण की पूजा कर यह सिद्ध कर दिया कि ब्राह्मण सदा पूजनीय है।

जिस समय सुदामा से भगवान ने सांसारिक सुखों की बात की तो सुदामा ने ब्राह्मण के धर्म को बताते हुए कहाकि ब्राह्मण को परम् संतोषी होना चाहिए। महिला सत्संग मंडल की अध्यक्षा कमलेश दूबे ने बताया कि बुधवार को हवन, पूजन, पूर्णाहुति व विशाल भंडारे के साथ श्रीमद् भागवत कथा का समापन होगा। इस मौके पर पं. वरुण श्याम पांडेय, पं. तरुण श्याम पांडेय, रामकुमारी सोनी, जेएन दुबे सहित काफी संख्या में भक्त मौजूद रहे।

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