प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम योजना के तहत 304 करोड़ के प्रोजेक्ट्स पर सहमति

प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम योजना के तहत 304 करोड़ के प्रोजेक्ट्स पर सहमति

Karishma Lalwani | Publish: Nov, 10 2018 03:33:46 PM (IST) | Updated: Nov, 10 2018 03:33:47 PM (IST) Lucknow, Lucknow, Uttar Pradesh, India

PMJVKइस योजना के अंतर्गत यूपी के 44 डिस्ट्रिक्ट्स को प्रपोसल्स देना था, जिसमें से 10 ने अभी तक कोई प्रपोजल नहीं भेजा है

लखनऊ. अल्पसंख्यक समुदायों के पिछड़ापन को दूर करने व उनके विकास के लिए सरकार द्वारा समय-समय पर विशेष योजनाएं चलाई जाती हैं। हर 5 साल में इनके लिए कुछ किया जाता है। ऐसी ही एक स्कीम है मल्टी सेक्टोरल डेवलेप्मेंट स्कीम है, जिसका नाम बदलकर प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम योजना रखा गया है। इस योजना के अंतर्गत यूपी के 44 डिस्ट्रिक्ट्स को प्रपोसल्स देना था, जिसमें से 10 ने अभी तक कोई प्रपोजल नहीं भेजा है। वहीं इस योजना के अंतर्गत 304 करोड़ के प्रोजेक्टस को मंजूरी मिली है।

लखनऊ में नैशनल कमिशन फॉर माइनॉरिटी द्वारा एक कार्यक्रम के दौरान दिए गए प्रस्तावों की समीक्षा की गयी। समीक्षा के दौरान पाया गया कि यूपी के 10 जिलों ने योजना के अंतर्गत कोई प्रस्ताव नहीं भेजे हैं। प्रस्ताव अक्टूबर माह के अंत तक भेजे जाने थे लेकिन अभी तक सारे प्रस्ताव नहीं भेजे गए हैं। नैशनल कमिशन फॉर माइनॉरिटी के चेयरमैन घयोरुल हसन रिजवी के मुताबिक अल्पसंख्यक समुदायों के पिछड़ेपन को दूर करने व उनकी समस्याओं का निपटारा करने के लिए मल्टीसेक्टोरल डेवलेप्मेंट स्कीम का नाम बदलकर प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम योजना रखा गया।

इन जिलों ने नहीं दिया प्रस्ताव

प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम के अंतर्गत जिन जिलों ने प्रस्ताव नहीं भेजे वे गोंडा, अम्बेडकर नगर, हरदोई, सीतापुर, बदायूं, फर्रूखाबाद, शाहजहांपुर, गौतमबुद्ध नगर, हापुर और संबल हैं।

304 करोड़ के प्रोजेक्ट्स पर सहमति

प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम योजना के अंतर्गत अब तक 304 करोड़ के प्रोजेक्ट्स के प्रस्तावों को मंजूरी मिली है। प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम योजना पहले 196 जिलों में सक्रिय थी, जिसकी संख्या अब बढ़कर 308 हो गयी है। यह बढ़ती संख्या इस बात का संकेत है कि एक महत्वपूर्ण अल्पसंख्यक आबादी के साथ राष्ट्रीय औसत और जिलों के बीच विकास कुछ हद तक हुआ है।

इन प्रोजेक्ट्स पर सहमति

योजना के अंतर्गत माइनॉरिटी एरियाज में यूनिवर्सिटी में हासटल्स का होना, कामकाजी महिलाओं के लिए अलग से हासटल होना, कम्प्यूटर प्रोजेक्ट्स, ग्रामीण कारीगरों के लिए अलग से बाजार जैसी बातों रपर फोकस किया गया है।

 

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