भविष्य को लेकर फिक्रमंद है राजधानी का युवा, इसलिए है इस बीमारी का शिकार

भविष्य को लेकर फिक्रमंद है राजधानी का युवा, इसलिए है इस बीमारी का शिकार
depression

Rohit Singh | Updated: 10 Oct 2016, 02:56:00 PM (IST) Lucknow, Uttar Pradesh, India

जिसमें ज्यादातर मानसिक रोगी 17 से 35 साल के थे। उनकी काउंसिलिंग करने पर पता चला कि अधिकतर युवा नौकरी और अपने भविष्य की टेंशन से परेशान हैं।

लखनऊ। नवाबों की राजधानी लखनऊ का युवा नवाबी शौक के साथ अपने भविष्य को लेकर दिन-रात सोचता रहता है। इस वजह से वह डिप्रेशन का शिकार हो गया है। ये खुलासा लोहिया अस्पताल के मानसिक रोग विभाग की ओर से की गयी एक स्टडी में हुआ है। जिसमें पाया गया है कि पढ़ाई में अच्छे नंबर, नौकरी में प्रोन्नति सहित घरेलु कलह के चलते 70 प्रतिशत युवा टेंशन में है।


जिसके बाद युवा दवाई खाकर अपना डिप्रेशन दूर करने की कोशिश कर रहा है। इस बारे में मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. देवाशीष शुक्ला ने बताया कि जुलाई और अगस्त में इलाज के लिए ओपीडी में आए 2778 मरीजों पर स्टडी की गयी। जिसमें ज्यादातर मानसिक रोगी 17 से 35 साल के थे। उनकी काउंसिलिंग करने पर पता चला कि अधिकतर युवा नौकरी और अपने भविष्य की टेंशन से परेशान हैं।

टेंशन के कारण
नौकरी में प्रमोशन न मिलना, पढ़ाई के दौरान नंबर कम आना, जॉब में टेंशन, क्लास में कम नंबर आना
घर में अंदरूनी कलह होना आदि।

लक्षण
लोगों के साथ घुलने-मिलने में परेशानी, भूख न लगना, कम नींद आना, चिड़चिड़ा स्वभाव हो , आत्महत्या का ख्याल आना।
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