7वें सीपीए सम्मेलन की हुई शुरुआत, ओम बिरला ने कहा संसदीय परंपराओं को ऊंचा उठाना हम सबकी जिम्मेदारी

कॉमनवेल्थ पार्लियामेंटरी एसोसिएशन इंडिया (सीपीए) रीजन के 7वें सम्मेलन का गुरुवार को लखनऊ में लोकसभा अध्यक्ष ने उद्घाटन किया.

लखनऊ. कॉमनवेल्थ पार्लियामेंटरी एसोसिएशन इंडिया (सीपीए) रीजन के 7वें सम्मेलन का गुरुवार को लखनऊ में लोकसभा अध्यक्ष ने उद्घाटन किया। इस मौके पर ओम बिरला, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित, मध्यप्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन समेत कई दिग्गजों ने सदन को संबोधित भी किया। 17 जनवरी तक चलने वाले इस सम्मेलन में संसदीय प्रणाली व विधायी कार्यों को लेकर मंथन किया जा रहा है। सम्मेलन में खासतौर से इस बात पर जोर दिया गया कि विधानसभा या लोकसभा के सत्र के दौरान हंगामे के कारण बाधित होने की स्थिति में कामकाज को और कैसे बढ़ाया जाए? साथ ही जनप्रतिनिधियों की कार्यकुशलता वृद्धि और सदन की बैठकों का स्तर बेहतर बनाने पर चर्चा होगी। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल शुक्रवार को इसका समापन करेंगी।

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संसदीय परंपराओं को ऊंचा उठाना हम सबकी जिम्मेदारी- ओम बिरला

ओम बिड़ला ने कहा कि सदस्यों को अपनी बात संसदीय अनुशासन व शालीनता से कहनी चाहिये। संसद व विधानमंडल कैसे बिना व्यवधान व बाधा के चले, इसके लिये कानून बनना चाहिये।आजाद भारत के बाद हर चुनाव में मतदान प्रतिशत बढ़ना, ये बताता है कि लोगों का लोकतंत्र पर विश्वास बढ़ा है। इसलिए जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी भी बढ़ी है। लोकतंत्र व्यवस्था में जनप्रतिनिधि का सबसे महत्वपूर्ण भूमिका रही है। सदन के सभी सदस्यों को भी ये अधिकार मिलना चाहिए कि सरकार उनके विचारों को गंभीरतापूर्वक ले, जिससे जनता को वो जवाब दे सकें। संसदीय परंपराओं को कैसे ऊंचा उठा सकें, ये हम सबकी जिम्मेदारी है। ये सदन गरीब व वंचित लोगों के लिए सार्थक परिणाम देने के लिए है। जनता के विश्वास को जीतने की हमारी बड़ी भूमिका होती है। इसलिए हमारी जिम्मेदारी है कि, सदन में जनता की बात को रखा जाए, पर विपक्ष को एक दायरे में रहकर अपनी बात कहनी चाहिए। इसी के साथ उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी लोकतंत्र में निर्वाचित प्रतिनिधि सरकार और जनता के बीच सेतु का काम करता है क्योंकि जनप्रतिनिधि निरंतर जनता के साथ अंतर-संवाद करता रहता है। अत: विधायकों का यह कर्त्तव्य बनता है कि किसी भी नीति के निर्माण के समय उनका पक्ष मजबूती से सदन में रखे और आम नागरिकों के सरोकारों के अनुरूप सरकार की नीतियों को प्रभावित करे।

सदस्यों का क्षमता निर्माण आवश्यक- ओम बिरला
सम्मेलन के पहले विषय ’बजटीय प्रस्तावों की संवीक्षा के संबंध में विधायकों का क्षमता निर्माण’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि बजट सरकार का सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक नीति उपकरण है और बजट पर संसद और विधान सभाओं में सार्थक और उपयोगी चर्चाएं हो सके, इसके लिए सदस्यों का क्षमता निर्माण आवश्यक है। इसके अतिरिक्त संसदीय समितियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा की संसदीय और विधान मंडलों की समितियां सरकार के बजट, नीतियों, कार्यक्रमों, योजनाओं, परियोजनाओं एवं उसके कार्यान्वयन का मूल्यांकन करती है और इनके सदस्यगण विभिन्न् मुद्दों पर अपनी दलगत प्रतिबद्धता से ऊपर उठकर कीमती सुझाव समिति को देते हैं। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि संसदीय समितियां सुशासन का मार्ग प्रशस्त करने के अतिरिक्त, पारदर्शिता और जवाबदेही के लक्ष्य को प्राप्त करने में भी बड़ी भूमिका निभा रही हैं। इसलिए बजट पर संसद और विधान सभाओं में सार्थक और उपयोगी चर्चाएं सुनिश्चित करने के लिए सदस्यों का क्षमता निर्माण आवश्यक है। दूसरे विषय अर्थात ‘’विधायी कार्यों की ओर विधायकों का ध्यान केंद्रित करना’ का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सदस्यों को नियमों और प्रक्रियाओं का गहन ज्ञान और संवैधानिक प्रावधानों की पर्याप्त समझ होनी चाहिए ।

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सरकार तभी काम कर सकती है, जब सदन बाधित न हो- सीएम योगी

सीएम योगी ने अपने संबोधन में कहा कि इस सम्मेलन से ठोस निष्कर्ष निकलेंगे, जिनसे लोकतंत्र और मजबूत होगा। सरकार तभी काम कर सकती है, जब सदन बाधित न हो। इस दौरान सीएम योगी ने दिसंबर में लगतार 36 घंटे चले सदन का उदाहरण देते हुए कहा कि उसका हमें अन्य योजनाओं को पूरा करने का लाभ मिला। उन्होंने कहा कि सीपीए के सभी सदस्यों को आगे आना होगा।

ऐसी व्यवस्था हो, जिससे संसदीय गतिरोक रुके- हृदय नारायण दीक्षित

सदन में विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने संबोधन में कहा कि यह ऐतिहासिक सदन है, जो देश की सबसे बड़ी जनसंख्या का नेतृत्व करता है। यहां हम दो दिनों तक विचार विमर्श करेंगे। हमें ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए कि, आपसी सामंजस्य से संसदीय गतिरोध रोकने के लिए गहन विचार करना चाहिए। उत्तर प्रदेश ने देश को 9 प्रधानमंत्री दिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी यूपी की वाराणसी से सांसद हैं।

एमपी के राज्यपाल बोले- लक्ष्मण रेखा पार नहीं होनी चाहिए
मध्य प्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन ने कहा कि सत्ता का काम सरकार चलाना होता है। उसी तरह विपक्ष को अपनी बात कहने का पूरा हक है, लेकिन दोनों पक्षों को बोलने के दौरान लक्ष्मण रेखा पार नहीं करनी चाहिए। यही सच्चे लोकतंत्र की पहचान है। आलोचना होनी चाहिए पर आचरण का भी ख्याल रखा जाना चाहिए।

Abhishek Gupta Desk/Reporting
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