बाल सुधार गृह से भाग रहे बंदी, प्रशासन पर खड़े हुए सवाल

बाल सुधार गृह से भाग रहे बंदी, प्रशासन पर खड़े हुए सवाल
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बाल संप्रेक्षण गृह (बाल सुधार गृह) में अमानवीय व्यवहार तो नहीं बाल बंदियों के भागने की वज़ह। बाल संप्रेक्षण गृह के जिम्मेदारों को नहीं लग रही इनकी योजनाओं की भनक।

लखनऊ. राजधानी स्थित बाल संप्रेक्षण गृह (बाल सुधार गृह) लगातार चर्चाओं में बना हुआ है। यहां कभी नशा और बच्चों की पिटाई का मामला तुल पकड़ लेता है, तो कभी प्रशासन की लापरवाही बड़ी चर्चा का विषय बन जाती है। अधीक्षक के मुताबिक यहां पर चार जिलों के 121 विचाराधीन बच्चे बंद हैं। लेकिन इन्हें बाल संप्रेक्षण गृह की चार दिवारी के अंदर सही सलामत रखना प्रशासन के लिए चुनौती साबित हो रहा है। यह नाबालिग विचाराधीन बंदी संप्रेक्षण गृह की सुरक्षा को हर बार फेल कर भागने में कामयाब हो रहे हैं। वहीं प्रशासन और अधिकारी हर बार हाथ पर हाथ धरे बैठा रह जाता है। कुछ केयर टेकर व अधिकारियों के निलंबन के आलावा करीब एक साल में यहां कोई बदलाव नहीं आया है।

भाग रहे विचाराधीन बाल कैदी
मोहान रोड स्थित बाल संप्रेक्षण गृह में लखनऊ, रायबरेली, बाराबंकी और उन्नाव जिले के विचाराधीन नाबालिग बंदियों को रखा गया है। सुरक्षा के मद्देनज़र यहां सीसीटीवी कैमरे जरुर लगाए गए हैं, लेकिन सूत्रों की माने तो ज्यादातर खराब पड़े हैं, या इन्हें देखने वाला कोई नहीं है। इसी लापरवाही के चलते सोमवार को 8 बाल कैदी फरार होने में कामयाब हो गए। यह सभी दूसरी मंजिल पर कमरे में बने इग्जॉस्ट फैन को खोलकर चादर की रस्सी के सहारे भाग निकले। लापरवाही का आलम यह था कि देर शाम तक किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी। वहीं इन बाल बंदियों ने कई दिन पहले ही बरैक में लगे कैमरे के तार काट दिए थे।
वहीं इससे पहले भी दो जून को तीन बंदी भागने में कामयाब हो गए थे, फिर एक बंदी वापस लौट आया। लेकिन उसी शाम गिनती के दौरान एक बंदी जिम्मेदारों की मौजूदगी में भाग निकला था। इससे पूर्व में भी लगातार ऐसे घटनाएं होती रही हैं, लेकिन न तो संबंधित जिम्मेदार न ही संबंधित प्रशासन।

बहका व धमका कर दोहरा अपराध करा रहे
आठ बाल कैंदियों के सोमवार को भागने की घटना से हड़कंप मच गया। अभी तक पुलिस इन्हें पकड़ नहीं सकी है। लेकिन एक बाल बंदी खुद ही बाल संप्रेक्षण गृह वापस आ गया। अधीक्षक ध्रुव त्रिपाठी ने बताया कि वापस आए कैदी का कहना है कि अन्य कैंदियों ने उसे ऐसा करने के लिए बहकाया और धमकाया था।
यहां पर पहले भी जांच में यह बात सामने आ चुकी है कि रेप, हत्या, हत्या के प्रयास, डकैती, लूट व अन्य संगीन मामलों के विचाराधीन बंदी अन्य बंदियों को अपने अदब में लेते आए है। साथ ही वह कई बार दूसरे बंदियों की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा बन जाते हैं।

सुधारने वाले पर बिगाड़ने का आरोप
बाल संप्रेक्षण गृह में बल कैदियों को बेरहमी से पिटने का हाल में ही खुलासा हुआ था। बाल संप्रेक्षण गृह में बच्चों को मारने-पीटने की जानकारी होने पर 8 जून को विधि सेवा प्राधिकरण के सचिव ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी ने औचक निरीक्षण किया था। इस दौरान कई बच्चों को जानवरों की तरह पीटने के साक्ष्य प्रत्यक्ष रुप से मिले थे। इसके बाद तीन केयर टेकर को निलंबित कर दिया गया था। वहीं बाल संप्रेक्षण गृह के पूर्व अधीक्षक अशोक अवस्थी पर बच्चों को पीटने के साथ नशे का आदि बनाने और बेचने के लिए मजबूर करने के आरोप में निलंबित किया गया था। वहीं अवस्थी पर पारा थाने में केस भी दर्ज हुआ था।

अमानवीय व्यवहार बना सकता है और भी खुंखार
सूत्रों के मुताबिक बाल संप्रेक्षण गृह में बंदियों के साथ अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है। खाने के नाम पर खर्च तो खूब हो रहा है, बकायदा मेन्यू तक बना हुआ है, लेकिन असलियत में अच्छा खाना तक नहीं दिया जाता। वहीं अंदर तैनात जिम्मेदार किसी भी बात पर इन बंदियों को बेरहमी से पीटते हैं। ऐसे में जो बच्चे सुधरने का प्रयास कर भी रहे हैं, उन पर और भी खुंखार होने का खतरा यहां का अमानवीय व्यवहार पैदा कर रहा है।

क्या कहते हैं जिम्मेदार
सोमवार को भागे बच्चों में से लौटकर आए एक बच्चे के मुताबिक कुछ बच्चे उन्हें भड़का रहे हैं। ऐसे में हमारा प्रयास जारी है कि परिसर को बढ़ाया जाए और सुधर रहे बच्चों को अलग रखा जाए। साथ ही बच्चों के प्रति यहां तैनात सभी के व्यवहार पर भी नज़र रखी जा रही है। - ध्रुव त्रिपाठी, अधीक्षक (बाल संप्रेक्षण गृह) 
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