scriptAbility to think is decreasing due to pollution in Lucknow | प्रदूषण से कम हो रही सोचने की क्षमता, सांस के मरीज भी बढ़े, क्या करें? क्या न करें? | Patrika News

प्रदूषण से कम हो रही सोचने की क्षमता, सांस के मरीज भी बढ़े, क्या करें? क्या न करें?

उत्तर प्रदेश में बढ़ते प्रदूषण के बाद सरकार भी हर तरह के जरूरी कदम उठाते हुए आर्टिफ़िशियल बारिश पर ज़ोर दे रही है। वहीं राजधानी लखनऊ के हॉस्पिटल में इन दिनों पिछले एक महीने से सांस के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है।

लखनऊ

Updated: November 17, 2021 03:39:38 pm

पत्रिका न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ. उत्तर प्रदेश भर मे प्रदूषण का स्तर लगातार 'उच्च' बना हुआ है, वहीं ठंड भी बढ़ रही है। जिसके चलते सांस लेने संबंधी बीमारियों की शिकायत करने वाले रोगियों की संख्या बढ़ रही है। डॉक्टरों के मुताबिक पहले से ही सांस की बीमारी से जूझ रहे लोगों की हालत इस साल काफी ज्यादा खराब हो गई है। ऐसे मरीजों की संख्या लगातार लखनऊ के होस्पिटल्स में बढ़ती जा रही है। जिसमें सिविल हॉस्पिटल, बलरामपुर, लोहिया हॉस्पिटल और केजीएमयू मे लगातार सांस संबन्धित केसों में बढ़ोत्तरी हो रही है। एक्सपर्ट की मानें तो इसका सीधा असर यहाँ के युवाओं की सोचने की क्षमता पर हो रहा है। जिससे मानसिक अवसाद भी बढ़ रहे हैं।
si.jpg
लखनऊ में प्रदूषण का असर सीधे फेफड़े खराब कर रहा
किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में पल्मोनरी और क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ वेद प्रकाश ने कहा कि प्रदूषक, पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे पार्टिकुलेट मैटर, श्वासनली और फेफड़ों में बाधा डालते रहते हैं, जिसके परिणामस्वरूप सूजन होती है।
अस्थमा, मेंटल डिसोर्डर, कैंसर को जन्म
"विदेशी वस्तुओं और हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली के बीच इस लड़ाई में, हमारे वायुमार्ग की रीमॉडेलिंग होती है, जो लंबे समय में क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिसऑर्डर, कैंसर, अस्थमा और अन्य श्वसन पथ की समस्याओं को जन्म दे सकती है।"
उन्होंने कहा कि सीओपीडी के मरीजों में निश्चित तौर पर इजाफा हुआ है। वायु प्रदूषण, हवा में सूखापन और मौसमी बदलाव हमारे श्वसन पथ में वायरस और बैक्टीरिया के विकास में योगदान दे रहे हैं।
लोक बंधु राज नारायण अस्पताल के निदेशक डॉ अजय त्रिपाठी ने कहा कि डॉक्टरों ने पाया है कि दिवाली के बाद सांस के रोगियों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है। एक दिन में औसतन लगभग 70 रोगियों से, संख्या एक दिन में 90 रोगियों तक पहुंच गई है। इनमें से अधिकांश रोगियों में पहले से ही दूसरी बीमारियां भी हैं। "ठाकुरगंज के टीबी अस्पताल में मरीजों की औसत संख्या 30 से बढ़कर 45 हो गई है। ज्यादातर मरीजों को सुबह और शाम को सांस लेने में तकलीफ और आंखों में जलन की शिकायत है। न केवल बुजुर्ग मरीज, बल्कि मध्यम आयु वर्ग के लोग और युवा इस समस्या को लेकर हमारे पास आ रहे हैं।"
महानगर के बीआरडी अस्पताल में चिकित्सा अधीक्षक डॉ मनीष शुक्ला ने कहा, "हर साल हम प्रदूषण और मौसम परिवर्तन के कारण सीओपीडी, अस्थमा और ब्रोंकाइटिस के रोगियों में वृद्धि देखते हैं, खासकर दिवाली के बाद। हर गुजरते साल के साथ यह प्रवृत्ति बढ़ रही है।"
क्या करें? क्या न करें?

हर से बाहर जितना हो सके कम से कम जाएँ।

बहूत जरूरी होने पर मास्क लगाकर निकलें।

ज्यादा से ज्यादा घर से खाना पानी लेकर ही निकलें। बाहर कुछ भी खाने से बचें।
सार्वजनिक वाहन का इस्तेमाल करें। कम से कम गाड़ी का प्रयोग करें।

हॉर्न का प्रयोग कम करें। घर में भी लाइट का इस्तेमाल कम से कम ही करें। सांस के मरीज भीड़ भाड़ वाले इलाकों से दूर रहे। इयर फोन का इस्तेमाल न करें।

सबसे लोकप्रिय

शानदार खबरें

Newsletters

epatrikaGet the daily edition

Follow Us

epatrikaepatrikaepatrikaepatrikaepatrika

Download Partika Apps

epatrikaepatrika

बड़ी खबरें

Copyright © 2021 Patrika Group. All Rights Reserved.