scriptAfter 14 years, the price of matches will increase see how much you | 1 दिसंबर से माचिस भी होगी महँगी, आखिरी बार 2007 में बढ़े थे दाम | Patrika News

1 दिसंबर से माचिस भी होगी महँगी, आखिरी बार 2007 में बढ़े थे दाम

पेट्रोल-डीजल, गैस के बाद अब माचिस के दाम भी बढ़ने वाले हैं। पिछले 14 सालों से माचिस ने हर महँगाई को धता बताते हुए कभी खुद का दाम बढ़ने नहीं दिया। मगर इस बार 1 दिसंबर से माचिस के दाम बढ़ने जा रहे हैं। अब 1 दिसंबर से एक रुपये में मिलने वाली माचिस दो रुपये में मिलेगी।

लखनऊ

Published: October 23, 2021 12:06:28 pm

पिछले 14 सालों से महँगाई की हर मार को झेलते हुए माचिस उद्योग ने माचिस के दाम कभी बढ़ने नहीं दिये। आखिरी बार माचिस की कीमत 2007 में बढ़ी थी। उस वक्त इसकी कीमत 50 पैसे से बढ़ाकर 1 रुपये की गयी थी। मगर 1 दिसंबर से माचिस अब 1 रुपये के बजाय 2 रुपये में मिलेगी। तमिलनाडु के शिवकाशी में "ऑल इंडिया चैंबर ऑफ मैच इंडस्ट्री" (All Inida Chamber of Match Industries) की बैठक में ये फैसला लिया गया।
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पांच प्रमुख माचिस उद्योग निकायों के प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से 1 दिसंबर से माचिस का एमआरपी 1 रुपये से बढ़ाकर 2 रुपये करने का फैसला लिया है। माचिस की कीमत में वृद्धि का फैसला गुरुवार को शिवकाशी में ऑल इंडिया चैंबर ऑफ मैचेस की बैठक में लिया गया।
उद्योग के प्रतिनिधियों ने कच्चे माल की कीमतों में हाल ही में हुई वृद्धि को कीमत बढ़ाने का कारण बताया। निर्माताओं ने कहा कि माचिस बनाने के लिए 14 कच्चे माल की जरूरत होती है। एक किलोग्राम लाल फास्फोरस 425 रुपये से बढ़कर 810 रुपये हो गया है। इसी तरह मोम 58 रुपये से 80 रुपये, बाहरी बॉक्स बोर्ड 36 रुपये से 55 रुपये और भीतरी बॉक्स बोर्ड 32 रुपये से 58 रुपये तक पहुंच गया है। कागज, स्प्लिंट्स, पोटेशियम क्लोरेट और सल्फर की कीमत में भी 10 अक्टूबर से वृद्धि हुई है। डीजल की बढ़ती कीमत ने भी और बोझ डाला है।
600 माचिस का बंडल मिलता है 300 रुपये में

नैशनल स्मॉल मैचबॉक्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के सचिव वीएस सेथुरथिनम ने टीओआई को बताया कि निर्माता 600 माचिस (प्रत्येक बॉक्स में माचिस की 50 तीलियां) का एक बंडल 270 रुपये से लेकर 300 रुपये तक में बेच रहे हैं। हमने अपनी इकाइयों से बिक्री मूल्य 60% बढ़ाकर 430-480 रुपये प्रति बंडल करने का फैसला किया है। इसमें 12% जीएसटी और परिवहन की लागत शामिल नहीं है।

तमिलनाडु में 4 लाख लोग जुड़े हैं इस इंडस्ट्री से
पूरे तमिलनाडु में इस उद्योग में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से लगभग चार लाख लोग कार्यरत हैं और प्रत्यक्ष कर्मचारियों में 90% से अधिक महिलाएं हैं। उद्योग कर्मचारियों को बेहतर भुगतान करके एक अधिक स्थिर कार्यबल को आकर्षित करने की उम्मीद कर रहा है। इसकी वजह है कि कई लोग मनरेगा के तहत काम करने में रुचि दिखा रहे हैं क्योंकि वहां भुगतान बेहतर है।

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