ऐश्वर्या ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से माँगा जवाब 

ऐश्वर्या ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से माँगा जवाब 
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Ritesh Singh | Updated: 08 Aug 2016, 09:23:00 PM (IST) Lucknow, Uttar Pradesh, India

ऐश्वर्या के सवालों ने चौकाने वाला खुलासा किया

लखनऊ, लगभग सवा दो साल पहले भाजपा द्वारा प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बनाए गए नरेन्द्र मोदी ने उत्तर प्रदेश की बनारस लोकसभा सीट से नामांकन भरने के पहले सार्वजनिक रूप से कहा था पहले मुझे लगा था मैं यहां आया या फिर मुझे पार्टी ने यहां भेजा है, लेकिन अब मुझे लगता है कि मैं मां गंगा की गोद में लौटा हूं, तब मोदी ने सार्वजनिक रूप से भावुक होते हुए कहा था न तो मैं आया हूं और न ही मुझे भेजा गया है। दरअसल मुझे तो मां गंगा ने यहां बुलाया है। यहां आकर मैं वैसी ही अनुभूति कर रहा हूं, जैसे एक बालक अपनी मां की गोद में करता है।

मोदी ने उस समय यह भी कहा था कि वे गंगा को साबरमती से भी बेहतर बनाएंगे। पर अब लखनऊ की कक्षा 10 की छात्रा और आरटीआई कार्यकर्ता के नाम से विख्यात 14 वर्षीय ऐश्वर्या पाराशर की एक आरटीआई पर भारत सरकार के जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय द्वारा दिए गए जबाब को देखकर लगता है कि प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी चुनाव से पूर्व गंगा नदी की सफाई पर किये गए अपने बड़े-बड़े वादों को शायद भूल गए हैं और गंगा नदी की साफ-सफाई के लिए नरेंद्र मोदी सरकार की बहुप्रचारित नमामि गंगे योजना महज फाइलों, सरकारी विज्ञापनों, राजनैतिक आयोजनों और राजनैतिक बयानबाजी तक ही सिमट कर रह गयी है।दरअसल ऐश्वर्या ने बीते 9 मई को प्रधानमंत्री कार्यालय में एक आरटीआई अर्जी देकर नमामि गंगे योजना पर केंद्र सरकार द्वारा किये गए खर्चों, प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित बैठकों और गंगा के प्रदूषण को रोकने के सम्बन्ध में 7 बिन्दुओं पर जानकारी चाही थी।

प्रधानमंत्री कार्यालय के अपर सचिव और केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी सुब्रतो हाजरा ने बीते 6 जून को ऐश्वर्या को सूचित किया कि नमामि गंगे योजना से सम्बंधित कोई भी जानकारी प्रधानमंत्री कार्यालय में नहीं है और ऐश्वर्या की अर्जी अधिनियम की धारा 6(3) के अंतर्गत भारत सरकार के जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग को अंतरित कर दी। जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय के राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के अवर सचिव एवं जन सूचना अधिकारी के.के. सपरा ने बीते 4 जुलाई के पत्र के माध्यम से ऐश्वर्या को जो सूचना दी है वह अत्यधिक चौकाने वाली है और नमामि गंगे योजना के क्रियान्वयन को लेकर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वास्तव में गंभीर होने पर एक बहुत बड़ा प्रश्नचिन्ह लगा रही है।

ऐश्वर्या को दी गयी सूचना के अनुसार केन्द्र सरकार बनने के बाद से अब तक केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने गंगा की साफ-सफाई के लिए निर्धारित बजटीय आवंटन में कटौती तो की ही है साथ ही साथ सरकार आवंटित बजट की धनराशि को खर्च करने में भी विफल रही है।

जबकि पिछले वित्तीय वर्ष 2014-15 में गंगा सफाई के राष्ट्रीय अभियान के लिए 2137 करोड़ रुपयों का बजटीय आवंटन निर्धारित किया गया था जिसमें 84 करोड़ की कटौती कर संशोधित आवंटन 2053 करोड़ किया गया किन्तु सरकार इस वित्तीय वर्ष में महज 326 करोड़ रुपये ही खर्च कर पाई तो वहीं वित्तीय वर्ष 2015-16 में इस अभियान के लिए 2750 करोड़ रुपयों का बजटीय आवंटन निर्धारित था जिसमें 1100 करोड़ की भारी-भरकम कटौती कर संशोधित आवंटन 1650 करोड़ किया गया किन्तु सरकार इस वित्तीय वर्ष में भी 1632 करोड़ रुपये ही खर्च कर पाई।

इस प्रकार केंद्र सरकार वितीय वर्ष 2014-15 में आवंटित धनराशि में से 1727 करोड़ रुपये खर्च नहीं कर पाई और वितीय वर्ष 2015-16 में भी 1100 करोड़ की भारी-भरकम कटौती के बाद किये गए संशोधित बजटीय आवंटन में से भी 18 करोड़ रुपये खर्च नहीं कर पाई है।

 20 जून को तैयार की गई इस सूचना के अनुसार वित्तीय वर्ष 2016-17 में गंगा सफाई के राष्ट्रीय अभियान के लिए 2500 करोड़ रुपयों का बजटीय आवंटन निर्धारित किया गया है पर इस आवंटन के सापेक्ष संशोधित आवंटन या वास्तविक खर्चों की कोई भी सूचना केंद्र सरकार के पास नहीं है। जिससे यह पता चलता है कि नरेन्द्र मोदी सरकार, मनमनोहर सरकार से भी इस मामले में काफी पीछे है।

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