इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला, बालिग को अपनी मर्जी से शादी करने का अधिकार, किसी को हस्तक्षेप का हक नहीं

बालिग लड़का और लड़की के साथ रहने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वीकृति दी है। कोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा है दो बालिग लड़का और लड़की साथ रह सकते हैं

By: Karishma Lalwani

Updated: 29 May 2020, 03:28 PM IST

लखनऊ. बालिग लड़का और लड़की के साथ रहने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad Highcourt) ने स्वीकृति दी है। कोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा है दो बालिग लड़का और लड़की साथ रह सकते हैं। इसमें पारिवारिक रिश्तेदार या कोर्ट को हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। यह फैसला जस्टिस प्रकाश पाडिया की एकलपीठ ने हाथरस की रेशमा देवी व अन्य की ओर से सुरक्षा की मांग में दाखिल याचिका पर दिया।

परेशान करने वालों के खिलाफ कार्रवाई

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए परिवार द्वारा बालिग लड़का और लड़की और साथ रहने से रोकने या उनकी स्वतंत्रता में हस्तक्षेप करने से रोकने का आदेश देने से इंकार करते हुए याचिका खारिज कर दी है। हालांकि, कोर्ट ने याची को फौरी तौर पर राहत नहीं दी है। लेकिन कोर्ट ने अपने फैसले में यह जरूर कहा कि याची उसे परेशान करने वालों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई कर सकती है।

अपनी मर्जी से परेशान करने पर परिजन कर रहे थे परेशान

दरअसल, याची रेशमा देवी ने अपनी मर्जी से एक युवक से 6 सितम्बर 2019 को शादी की थी। इसको लेकर रेशमा के परिजन उन्हें और उनके पति को परेशान कर रहे थे। याची ने परिजनों से सुरक्षा की मांग को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में मई 2020 में याचिका दाखिल की थी। याची ने कहा था कि उसने अपनी मर्जी से शादी की है और अपने पति के साथ शांतिपूर्वक रह रही है। लेकिन शादी से नाखुश उसके घर वाले दोनों को परेशान कर रहे हैं। अपर महाधिवक्ता एमसी चतुर्वेदी ने याचिका को यह कहते हुए खारिज करने की अदालत से मांग की थी कि याची ने जिस समय शादी की उस समय वह नाबालिग थी।

कोर्ट के सामने महाधिवक्ता एमसी चतुर्वेदी की ये थी दलील

एमसी चतुर्वेदी ने कोर्ट के सामने दलीली दी कि नाबालिग को संरक्षण देने का अधिकार माता-पिता को ही है। लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि याची वर्तमान समय में 18 वर्ष से अधिक आयु की है और वह अब बालिग हो चुकी है। ऐसे में उसे अपनी स्वतंत्रता से शादी करने का अधिकार है।

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Karishma Lalwani
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