दलितों के लिए BJP का नया 'नारा', अमित शाह आज करेंगे संबोधित

राहुल की राह पर चलते हुए अमित शाह भी दलित वोट बैंक पर निशाना साधना चाहते हैं।

लखनऊ. कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की राह पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी चल पड़े हैं। आज वह लखनऊ में 50 हजार दलितों को संबोधित करेंगे। रैली के बाद वे पार्टी के अन्य नेताओं के साथ दलितों के घर लंच करेंगे। मानवता सद्भावना समारोह के नाम से आयोजित होने वाली इस महारैली को पार्टी अध्यक्ष अमित शाह संबोधित करेंगे। रैली के जरिये शाह बसपा सुप्रीमो को अपनी पार्टी की दलित शक्ति का प्रदर्शन दिखाएंगे।

भाजपा अभी तक राहुल गांधी के दलितों के घर भोजन करने के कदम की आलोचना करती रही है लेकिन अब खुद पार्टी अध्यक्ष अमित शाह दलितों को साधने के लिए राहुल के नक्शेकदम पर चल रहे हैं। इसके तहत न केवल वह दलितों के साथ लंच करेगें बल्कि उनकी रैली को भी संबोधित करेंगें।

पूर्व बसपा नेता को मिली जिम्मेदारी
सूत्रों के मुताबिक रैली की जिम्मेदारी बसपा के पूर्व क्षेत्रीय संयोजक जुगल किशोर को दी गई है। जुगल किशोर इस साल जनवरी में भाजपा में शामिल हो गए थे। रैली का आयोजन लखनऊ के स्मृति उपवन में किया जाएगा। दिलचस्प बात है कि इस उपवन का विकास मायावती की सरकार में हुआ था।

बीजेपी में सभी वर्गों का सम्मान
जुगल किशोर ने बताया कि पूरे राज्य से लगभग 50 हजार दलित इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। अमित शाह उन्हें संबोधित करेंगे। उन्होंने कहा कि इसके जरिए संदेश दिया जाएगा कि भाजपा सबका साथ सबका विकास की नीति में विश्वास करती है और समाज के सभी वर्गों दलितों, गरीबों व वंचितों का सम्मान करती है।

बिना भेदभाव के साथ लोग करेंगे लंच
दलितों के घर लंच करने की थीम मानव-मानव एक समान, हर मानव का हो सम्मान रखी गई है। उत्तर प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य के अनुसार सभी जातियों के लोग साथ में लंच करेंगे। पार्टी अध्यक्ष उनसे बातचीत भी कर सकते हैं। बताया जाता है कि भाजपा ने यूपी में अनुसूचित जाति वाली विधानसभाओं में अपनी जमीनी पकड़ बनाने के लिए तकरीबन 21 सांसदों को जिम्मेदारी दी  है। ये सांसद मोदी सरकार की कल्याणकारी और वित्तीय सशक्तिकरण योजनाओं की जानकारी देंगे।

अमित शाह की लंच पॉलिटिक्स
उत्तर प्रदेश में दलितों को जोडऩे के लिए अमित शाह ने लंच पॉलिटिक्स का फार्मूला भी अपनाया है। इसी साल 31 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में एक दलित परिवार के घर पर भोजन किया था। पार्टी ने इस भोजन को 'समरसता भोज' का नाम दिया था। काकोरी में तिरंगा-यात्रा के बाद उन्होंने पार्टी के दलित सांसद कौशल किशोर के घर पर खाना खाया था।

नरेंद्र मोदी लखनऊ में कर सकते हैं सभा  
फिलहाल दलितों को अपनी पार्टी से जोडऩे के लिए बीजेपी बौद्ध भिक्षुओं की धम्म चेतना यात्रा को भी समर्थन दे रही है। यह यात्रा पूरे राज्य से गुजर रही है और नरेंद्र मोदी की तारीफ  कर रही है। साथ ही साथ ये चेतना यात्रा उत्तर प्रदेश में दलितों के लिए भाजपा को एकमात्र उम्मीद बता रही है। बताया जाता है कि ये  यात्रा अगले महीने लखनऊ में संपन्न होगी। उम्मीद की जा रही है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसे संबोधित कर सकते हैं।


पीएम मोदी की दलितों को साथ लाने की कोशिश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दलितों को साथ लाने की हमेशा कोशिश की है। दलित समाज में अपनी पैठ बनाने के लिए मोदी हमेशा कुछ न कुछ करते रहते हैं। मोदी ने दलित समाज को आगे लाने के लिए कई योजनाएं भी बनाईं और उसको अमल में लाने के लिए पूरा जोर लगा दिया। ताकि वो दलित समाज के दिल में कुछ जगह बना सकें। क्योंकि मोदी भी ये भलीभांति जानते हैं कि अगर यूपी में बीजेपी का परचम लहराना है तो दलित वोट बेहद अहम है।

अंबेडकर भवन स्मारक का किया उद्घाटन 
प्रधानमंत्री मोदी बाबा साहब अंबेडर को सम्मानित करने वाले कई कदम उठा चुके हैं। पिछले साल नवंबर में उन्होंने लंदन में अंबेडकर भवन स्मारक का उदघाटन किया। 26 नवंबर को अंबेडकर की 125वीं जयंति पर संविधान दिवस मनाने की शुरुआत की और बाबा साहेब पर डाक टिकट भी जारी किया। उनके इन कदमों ने बीजेपी को दलितों के करीब लाने का काम किया।

अंबेडकर की याद में स्मारक
11 अक्टूबर 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुंबई में बाबा साहब अंबेडकर की समाधि चैत्य भूमि पर श्रद्धांजलि देकर और इंदुमिल में बाबा साहब अंबेडकर की याद में बनाए जा रहे स्मारक का शिलान्यास करके नई पहल की। बाबा साहब जैसे महानायक को सम्मानित करने की मोदी की यह पहल दलितों को अपने साथ जोडऩे की ओर एक कदम थी। 

प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले साल बिहार चुनाव के दौरान भी पिछड़ों-दलितों को बीजेपी के साथ जोडऩे की भरपूर कोशिश की। अपने चुनावी भाषणों में अपनी सामाजिक पृष्ठभूमि का जिक्र करके उनके साथ अपनी एकजुटता का संदेश दिया। लोकसभा में सबसे ज्यादा दलित सांसद बीजेपी के पास हैं और संघ भी दलितों के बीच अपनी पैठ बढाऩे में लगा हुआ है। संघ दलितों तक अपनी पहुंच बढ़ाना चाहता है ताकि वोट बैंक का दायरा बढ़ाया जा सके।

जातीय समीकरण सहेजने की कवायद
इसके अलावा मिशन 2017 के लिए पासी, राजभर और अन्य पिछड़ा वर्ग के वोट बटोरने के लिए बहराइच के राजा सुहेलदेव के इतिहास को झाड़-पोछकर जनता के सामने लाया गया। सुहेलदेव की विरासत को भुनाने के लिए कई कार्यक्रम किए गए। उनकी स्मृति में भाजपा ने 11वीं शताब्दी के राजा की कर्मस्थली बहराइच में 24 फरवरी को एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने शिरकत की। इसके बाद पूरे राज्य में पासी सम्राट से जुड़े कई अन्य कार्यक्रम चलाने की योजना बनाई गई। दलित राजा बिजली पासी, वीरांगना ऊदा देवी और महारानी अहिल्याबाई होलकर से जुड़े कार्यक्रमों को करने की रूपरेखा बनाई गई। राज्य की तकरीबन 20 फीसदी दलित आबादी में जाटव समाज की आबादी 65 फीसदी है। बसपा प्रमुख मायावती के साथ जाटव वोट बैंक जुड़ा रहा है। लेकिन, गैर जाटव दलित बिरादरी पासी और राजभर जिनकी जनसंख्या करीब 16 प्रतिशत यह वोट बैंक बिखरा हुआ है। इस पर भाजपा और सपा अपनी दावेदारी जताते रहे हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश में पासी और राजभर बड़ी संख्या में इसलिए सभी दल इन पर अपनी नजरे गड़ाए हैं।


क्या कुर्सी के लिए वोट की गारंटी है दलित
यह सवाल इसलिए क्योंकि बदलते सामाजिक दौर में भी दलितों को इस्तेमाल किया जा रहा है। विकास योजनाओं का लाभ उन्हें मिले या ना मिले, दलित वोट बैंक जरूर बन जाता है। जो लोग दलितों के नाम पर अपनी दुकानदारी चलाते हैं, उन्हें भी दलितों की चिंता नहीं है, जबकि वे उनके लिए कैडर वोटर हैं। उत्तर प्रदेश में दलित वोटर 20.5 प्रतिशत हैं. राजनीति के जानकारों का मामना है कि दलितों के पास विकल्प नहीं है जिसके कारण वे इस्तेमाल हो जाते हैं।
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नितिन श्रीवास्तव
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