अलग हो गई थी धमनी की लेयर, मुख्य नस को छोड़ दूसरे जगह से हो रहा था ब्लड सर्कुलेशन, डॉक्टरों ने इस तरह की सर्जरी

Laxmi Sharma

Publish: Jun, 14 2018 06:08:08 PM (IST) | Updated: Jun, 15 2018 03:53:38 PM (IST)

Lucknow, Uttar Pradesh, India
अलग हो गई थी धमनी की लेयर, मुख्य नस को छोड़ दूसरे जगह से हो रहा था ब्लड सर्कुलेशन, डॉक्टरों ने इस तरह की सर्जरी

किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के डॉक्टरों ने एक ऐसे मरीज की सर्जरी करने में सफलता हासिल की है, जिसके शरीर में रक्त का प्रवाह अपनी मूल जगह से नहीं हो रहा था

लखनऊ. किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के कार्डियक वैस्कुलर थोरेसिक सर्जरी विभाग में डॉक्टरों ने एक ऐसे मरीज की सर्जरी करने में सफलता हासिल की है, जिसके शरीर में रक्त का प्रवाह अपनी मूल जगह से नहीं हो रहा था और इससे शरीर में रक्त का प्रवाह रुकने की संभावना बन गई थी। डॉक्टरों ने इस जटिल और दुर्लभ शल्य क्रिया को करते हुए एक नया आयाम हासिल किया है।

कई अंगों में खून पहुंचना हो गया था बंद

राजधानी लखनऊ की 35 वर्षीय सुशीला को विभाग में एओर्टिक वाल्व रिप्लेसमेंट (Aortic valve replacement) के लिए 28 अप्रैल को कार्डियोलाॅजी विभाग में भर्ती कराया गया था। यहाँ से उसे कार्डियक वैस्कुलर थोरेसिक सर्जरी विभाग में रेफर किया गया था, जिसकी सर्जरी एक सप्ताह पूर्व की गई है। मरीज को जब 7 जून को शल्य क्रिया के दौरान हार्ट लंग मशीन पर डाला गया और और उसकी शल्य क्रिया प्रारम्भ की गई। इस दौरान पता चला कि तो पता चला कि मरीज को महाधमनी विच्छेदन नामक समस्या है। इसमें महाधमनी की तीन लेयरों मे से सबसे अंदर की लेयर इंटीमा अलग हो गई थी जिसकी वजह से रक्त का प्रवाह मुख्य नस में न होकर एंटीमा और मीडिया के बीच से होने लगता है और इसकी वजह से मरीज के विभिन्न अंगो में रक्त प्रवाह बाधित हो जाता है।

डॉक्टरों ने इस तरह की सर्जरी

डॉक्टरों के सामने यह एक चुनौती थी, जहां पर मरीज को सर्कुलेटरी अरेस्ट के साथ डीप हाइपोथर्मिया की अवश्यकता थी। जिसमें मरीज के शरीर के तापमान को 18 डिग्री सेल्सीयस तक ले जाया जाता है। इस अवस्था मे मरीज के सेल्स अपने अंदर मौजूद रक्त से ही जीवित रहते है। इस सर्जरी में मरीज के वाल्व को रिपेयर करने के लिए डेकराॅन पैच का इस्तेमाल किया गया जिसकी किमत लगभग 10 हजार होती है। इसके अलावा इस बीमारी में प्रयोग होने वाले वैस्कुलर प्रोस्थेटिक ग्राफ्ट की कीमत करीब 1.5 लाख रूपये होती है। इस सर्जरी में कम लागत के साथ ही साथ मरीज के एओर्टिक वाल्व को भी बचा लिया गया।

टीम में ये लोग रहे मौजूद

इस सर्जरी को करने वाली टीम में सीवीटीएस विभाग के सह-आचार्य डाॅ0 अम्बरीश कुमार, डाॅ0 शैलेन्द्र कुमार, डाॅ0 विकास, डाॅ0 अजयंद एवं निश्चेतना विभाग से डाॅ0 दिनेश कौशल, डाॅ0 अंजन, डाॅ0 भारतेष, डाॅ आरीफ, डाॅ0 अंचल एवं परफ्यूजनिस्ट मनोज श्रीवास्तव शामिल रहे। डॉक्टरों के मुताबिक यह समस्या एक लाख व्यक्तियों में से किसी तीन को होती है। यह बेहद ही दुर्लभ केस है। इस प्रकार की सर्जरी उत्तर प्रदेश में पहली बार की गई।

यह थी शुरुआती समस्या

डॉक्टरों ने बताया कि प्रारंभ में मरीज को लाॅरी कार्डियोलाॅजी विभाग मे श्वांस फूलने, खाॅसी और सीने मे दर्द की समस्या के लिए लाया गया था। इस दौरान इको में यह पाया गया कि मरीज को वाॅल्व की समस्या है इसलिए कार्डियोलाॅजी विभाग से मरीज को सीवीटीएस विभाग रेफर किया गया।

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