जेल में अब कैदियों के लिए बनेगा मशीन से खाना

Ashish Pandey

Publish: May, 17 2018 06:28:39 PM (IST)

Lucknow, Uttar Pradesh, India
जेल में अब कैदियों के लिए बनेगा मशीन से खाना

25 जिलों में शुरू हुई माड्यूलर किचन की व्यवस्था।

 

लखनऊ. अब कैदियों को जेल की रसोई में खाना बनाना नहीं पड़ेगा, वहीं उनका खाना भी अब पहले की अपेक्षा कम समय में तैयार हो जाएगा। यूपी की जेलों में बंद कैदियों को रसोई में खाना पकाने से निजात मिलने वाली है। अक्सर यह शिकायतें रहती हैं कि खाना बनने वाले कैदी बीमार पड़ जाते हैं। उनकी सेहत को देखते हुए जेल प्रशासन अब अंग्रेजों के जमाने की इस व्यवस्था को बदल रहा है। जेलों में आधुनिक मशीनों से खाना पकाने की व्यवस्था की गई है। अभी यह सुविधा सूबे के 25 जिलों के जेलों में दी गई जा रही है। यह व्यवस्था सूबे की सभी 72 जेलों जल्द ही की जाएगी।
अधिकारियों के अनुसार लखनऊ समेत सूबे की 25 जेलों में आधुनिक माड्यूलर किचन की शुरुआत की गई है। इस साल के अंत तक अन्य जेलों में भी यह सुविधा उपलब्ध करा दी जाएगी। पहले चरण में इस काम के लिए जेल विभाग ने चार करोड़ 71 लाख रुपए खर्च किए हैं। इस सुविधा से कैदियों को जहां राहत मिलेगी वहीं उनका सेहत भी पहले से बेहतर होगा और समय पर भोजन भी मिलेगा।

उन्हीं में एक काम खाना पकाना भी है
महानिरीक्षक आईजी जेल प्रमोद कुमार मिश्रा ने बताया कि अंग्रेजों के जमाने से जेल में खाना बनाने का काम कैदी ही करते आ रहे हैं। सजा काटने के दौरान कैदियों को तरह-तरह के कामों में लगाया जाता है, उन्हीं में एक काम खाना पकाना भी है। देखा गया है कि गर्मी में कई-कई घंटे रसोई में खाना बनाने वाले कैदियों के हेल्थ पर इसका विपरित असर पड़ता था और अक्सर वे कैदी बीमार हो जाते थे।

चपेट में आने की आशंका बढ़ जाती है
बताया कि इस नई व्यवस्था में रोटी बनाने से लेकर सब्जी काटने का काम मशीन द्वारा किया जाएगा। भोजनालय में आधुनिक चिमनी लगाई जाएगी जो अंदर की धुंआ को बाहर निकाल देगी। जेल प्रशासन द्वारा करवाए गए एक अध्ययन में पाया गया कि जिन आठ से दस कैदियों को खाना बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई वे बाकी कैदियों की अपेक्षा उनके बीमारी के चपेट में आने की आशंका बढ़ जाती है। जेल प्रशासन ने शासन को इसकी रिपोर्ट भेजी और साथ ही मॉडयूलर किचन का प्रस्ताव भी रखा।

अभी तक पांच से छह घंटा लगता था
शासन से अनुमति मिलने के बाद अब जेलों में आधुनिक उपकरणों से भोजन पकाने की व्यस्था शुरू की जा रही है। उन्होंने बताया कि एक साथ एक से दो हजार कैदियों का भोजन बनाने के लिए अभी तक पांच से छह घंटा लगता था। अब यह काम काफी कम समय में हो जाएगा। आईजी जेल ने बताया कि अभी यह व्यवस्था राज्य के २५ जेलों में लागू की गई है।

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