इटावा में जन्में इस गीतकार पॉलिटीशियन का सम्मान समारोह हुआ रद्द

अपने गानों से लोगों के दिल को छूने वाले मशहूर गीतकार गोपालदास नीरज का आज 93वां जन्मदिन है।

By: Mahendra Pratap

Published: 04 Jan 2018, 07:21 PM IST

लखनऊ. मायानगरी ने कई लोगों के सपने पूरे किए हैं। सुहाने से शहर ने इन तमाम लोगों में प्रसिद्ध गीतकार गोपालदास सक्सेना नीरज के सपनों को भी पनह दी। अपने गानों से लोगों के दिल को छूने वाले मशहूर गीतकार गोपालदास नीरज का आज 93वां जन्मदिन है।

नहीं रास आई मायानगरी

हिन्दी साहित्यकार, शिक्षक और कवि सम्मेलनों के मंचों पर काव्य वाचक और फिल्मों में गीत लेखक के रूप में गोपालदास नीरज की प्रतिभा से हर कोई परिचित है। कवि सम्मेलन में सम्मानित होने के बाद उन्होंने मुंबई का रूख किया। वह पहले व्यक्ति हैं, जिन्हें शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में भारत सरकार की ओर से दो बार सम्मानित किया गया था। उन्हें पहले पद्मश्री से और फिर पद्म भूषण से नवाजा जा चुका है।

लगातार तीन बार मिल चुका है फिल्म फेयर अवॉर्ड

गोपालदास नीरज ने ऐसे गीतों को लिखा है, जो लोगों की जुबां पर आज भी चढ़ा हुआ है। फिल्मों में उमदा गानों के लिए उन्हें 70 के दशक में लगातार तीन बार फिल्म फेयर अवॉर्ड मिल चुका है। जिन गीतोंं पर उन्हें पुरष्कार मिला है, वो हैं- ‘काल का पहिया घूमे रे भइया! (फ‍िल्‍म: चन्दा और बिजली-1970), ‘ बस यही अपराध मैं हर बार करता हूं (फ‍िल्‍म: पहचान-1971) और ‘ए भाई! ज़रा देख के चलो’ (फ‍िल्‍म: मेरा नाम जोकर-1972)। 'प्रेम पुजारी' में देवानंद पर फ़िल्माया उनका गीत 'शोखियों में घोला जाए ..' भी उनके एक लोकप्रिय गीतों में शामिल है जो आज भी सुना जाता है।

गोापलदास का जीवन

गोपालदास नीरज का जन्म 4 जनवरी, 1925 को इटावा जिले में हुआ था। मात्र 6 वर्ष की आयु में उनके पिता गुजर गए थे। गोपालदास ने 1942 में एटा से हाई स्कूल परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। शुरुआत में इटावा की कचहरी में कुछ समय उन्होंने टाइपिस्ट का काम किया मगर उसके बाद सिनेमाघर की एक दुकान पर नौकरी की। इसके बाद उन्होंने कानपुर के डीएवी कॉलेज में क्लर्क की नौकरी की। इसके बाद बाल्कट ब्रदर्स नाम की एक प्राइवेट कंपनी में उन्होंने टाइपिस्ट का काम किया। इस दौरान वह सिर्फ नौकरी नहीं कर रहे थे, बल्कि बीच-बीच में परीक्षाएं भी देते थे। उन्होंने 1949 में इण्टरमीडिएट, 1951 में बीए और 1953 में प्रथम श्रेणी में हिन्दी साहित्य में एमए किया है।

यूपी फिल्म विकास परिषद के अध्यक्ष

उनकी प्रतिभा ने कई लोगों के दिलों पर राज किया है। एक प्रसिद्ध कवि और गीतकार के रूप में खुद को स्थापित करने वाले गोपालदास नीरज को सरकार ने यूपी फिल्म विकास परिषद का अध्यक्ष चुना। नीरज भाषा संस्थान के भी कार्यकारी अध्यक्ष हैं। ये सम्मान उनकी प्रसिद्धी को ध्यान में रखते हुए दिया गया।

अपने असफल प्रेम जीवन पर लिखी कुछ पंक्तियां

'कितना एकाकी मम जीवन, किसी पेड़ पर यदि कोई पक्षी का जोड़ा बैठा होता, तो न उसे भी आंखें भर कर मैं इस डर से देखा करता कि कहीं नजर न लग जाए इनको।'

हरिवंशराय बच्चन से मिली प्रेरणा

कवि हरिवंशराय बच्चन से इन्हें प्रेरणा मिली। कविता लिखने का उनका अंदाज, उनकी हर कविता एक अलग ही मतलब बयां करती है, जो जिंदगी के पहलुओं को छूती हैं। वह अपने कवि बनने का सबसे बड़ा योगदान कवि हरिवंशराय बच्चन को देते हैं। उनकी कविता निशा निमंत्रण ने उन्हें खासा प्रभावित किया। इस कविता को पढ़ने के बाद से ही उन्हें भी कवि बनने का मन किया।

पहली ही फिल्म से चल गया जादू

गोपालदास नीरज ने अपनी पहली ही फिल्म में 'कारवां गुजर गया' गीत लिखा जिसे लोगों ने खूब पसंद किया था। इसके बाद फिल्मों में गीत लेखन का सिलसिला कई सुपरहिट गानों से जारी रहा। उन्होंने मेरा नाम जोकर, शर्मीली और प्रेम पुजारी जैसी फिल्मों में अपने गीत का परचम लहराया। हालांकि बंबईया नगरी ने उन्हें बहुत सम्मान दिया, लेकिन फिर भी एक समय बाद उन्हें ये शहर रास नहीं आया। मुंबई से मन भर जाने के बाद उन्होंने अलीगढ़ का रूख किया, जहां अपनी कवि सम्मेलनों की दुनिया में वह वापस चले गए। उनकी लिखी कविता की एक फेमस लाइन है, ' इतने बदनाम हुए हम तो इस जमाने में लगेंगी सदियाँ हमें भुलाने में। न पीने का सलीका न पिलाने का शऊर ऐसे भी लोग चले आते हैं मयखाने में।'

लोकसभा सीट से निर्दलीय प्रत्याशी

गोपालदास नीरज ने कानपुर लोकसभा से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा था। साफ मन से चुवाव लड़ कर उन्होंने देश की जनता से अपील की थी कि जो भी चोर या भ्रष्ट हों, वे उन्हें वोट न दें। बस उनकी यही बात लोगों के दिलों में उतर गयी और वह 60 हजार वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। उस चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी दूसरे स्थान पर रहे जबकि निर्दलीय चुनाव लड़े एसएम बनर्जी पहले स्थान पर थे।

लखनऊ में मिलना था सम्मान

लखनऊ में इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में 4 जवनरी को पद्म भूषण गोपालदास नीरज को उनके जन्मदिन पर सम्मानित किया जाना था। 'गोपालदास नीरज 94 साल बेमिसाल' नाम का समारोह आयोजित किया जाना था। लेकिन हेल्प यू एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट के संरक्षक हर्षवर्धन ने बताया कि शायर अनवर जलालपुरी के निधन के कारण गोपालदास नीरज के जन्मदिन पर होने वाला ये कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया है।

Mahendra Pratap
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