अयोध्या में अब राम मंदिर मॉडल पर विवाद

राम मंदिर मॉडल को श्री रामालय ट्रस्ट ने किया खारिज कहा, विश्व का सबसे ऊंचा स्वर्ण मंदिर बनाएंगे

अयोध्या : राम मंदिर के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अयोध्या विवाद थमा ही नहीं था कि फैसला आते ही राम मंदिर के लिए बनने वाले ट्रस्ट व मॉडल को लेकर नया विवाद खड़ा हो गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरकार द्वारा बनाए जाने वाले नए ट्रस्ट में शामिल होने के लिए जहां कई बड़े संत एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने का कार्य किया जा रहा है तो वही अब विहिप द्वारा तैयार किए गए राम मंदिर मॉडल को श्री रामालय ट्रस्ट ने खारिज कर विश्व की सबसे ऊंची स्वर्ण मंदिर बनाने का दावा कर रही है।

श्री रामालय ट्रस्ट के सचिव अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा है कि वर्षों के बाद जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण का अवसर आया है। देश के सभी सनातन धर्मियों की भावना है कि विश्व की सबसे बड़ी मंदिर बने। जिसमें दक्षिण और उत्तर के शैली का सामंजस्य कर वास्तु व विधान शास्त्र के अनुसार भव्य मंदिर बनाना चाहेंगे। जिसका शिखर 1008 फुट ऊंचा सोने का होना चाहिए। उन्होंने बताया कि विहिप के बने मॉडल को खारिज नहीं किया गया है। परन्तु पहले ही प्लाट मिलने के बाद नक्शा बनाए जाने की बात कही गई थी लेकिन जल्दबाजी में पहले ही नक्शा बनाकर मंदिर मॉडल के लिए पत्थर बनाने कार्य शुरू कर दिया। वह भी एक राम भक्त हैं इसलिए उनसे कोई प्रतिस्पर्धा नहीं है। और सभी राम भक्त मिलकर एक अच्छा वातावरण बनाते हुए उन सभी पत्थरों को उस मंदिर में समायोजित कर लिया जाएगा।

राम मंदिर को लेकर देश के गृहमंत्री अमित शाह का भी कहना था कि गगन चुम्बी मंदिर बनेगा। ऐसे ने 130 फुट ऊंचा विहिप का मॉडल आकाश चुम्बी नहीं है। लेकिन इस मॉडल में भावनाएं जुड़ी हुई हैं देश विदेशों से राम भक्त शिलाएं दी है जिसको भी उसी परिसर में समायोजित किया जाएगा।

वही अयोध्या पहुंचे जगद्गुरु वासुदेवानंद सरस्वती ने श्रीरामालय ट्रस्ट के किए गए दावों को गलत बतातेेेे हुुुए कहां की सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि भारत सरकार ट्रस्ट बनाएगी और वही ट्रस्ट मंदिर का निर्माण करेगा। उसी के अनुसार मंदिर का निर्माण हो। उन्होंने कहा कि श्री रामालय ट्रस्ट एक व्यक्तिगत संस्था है। उससे हिन्दू समाज का कोई संबंध नही है। वह एक राजनैतिक स्पर्धा है।

विहिप के तैयार मॉडल का समर्थन करते हुए जगद्गुरु वासुदेवानंद सरस्वती ने कहा कि भारत का प्रत्येक नागरिक समर्पित हो चुका है। और यही मॉडल का प्रारूप सुप्रीम कोर्ट में भी रहा है। इसलिए इसी मॉडल से बनाना चाहिए और इसी में चाहे जितना विस्तार किया जाना चाहिए। लेकिन मॉडल नही बदलना चाहिए। साथ ही ट्रस्ट निर्माण को लेकर कहा कि राम जन्मभूमि न्यास को लेकर ही भारत के बुद्धि जीवों के साथ ट्रस्ट बनाया जाए।

राम जन्मभूमि न्यास सदस्य महंत कमल नयन दास ने कहा कि यह सब झूठ बोल रहे है। किसी को कोई अधिकार नही है। राम मंदिर निर्माण को लेकर स्वर्गीय अशोक सिंघल ने पहले से ही पूरी तैयारी कर रखी है। सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय उसी को दिया है। और कभी भी पीएम मोदी उनकी भावना को हटा नहीं सकते हैं। मंदिर निर्माण के लिए प्रारूप पहले से ही तैयार है उसी के अनुसार मंदिर बनेगा। उन्होंने कहा कि इस प्रकार से समाज के बीच विवाद फैलाने वालों को सजा मिलनी चाहिए।

विश्व हिंदू परिषद के प्रांतीय प्रवक्ता शरद शर्मा ने कहा कि पहले भी कंबोडिया मॉडल तैयार किया गया था यह विवाद का विषय नहीं है। अयोध्या में राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण को लेकर न्यास के द्वारा तरासी का कार्य किया जा रहा है, जो 30 वर्षों से चल रहा है आज जिस मॉडल को लेकर जन जन तक आंदोलन हुआ, जिसमें लाखों लोगों ने अपने प्राणों के बलिदान दिए आज उस मॉडल को नकारा नहीं जा सकता, रामालय ट्रस्ट समाज को भ्रमित करने का कार्य कर रही है जो दुर्भाग्यपूर्ण है। अयोध्या के संत धरना चारों ने पूर्ण रूप से इस मॉडल पर मोहर लगाई है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर के पक्ष में पैसे आने के बाद इस प्रकार के तमाम दोस्त सामने आ रहे हैं, यह लोग सिर्फ राम मंदिर निर्माण में बाधा पहुंचाने का काम कर रहे हैं इन लोगों का मंदिर निर्माण से कोई संबंध नहीं है। वह कहां थी भगवान श्री राम का भव्य मंदिर कोई संगठन नहीं बल्कि समाज द्वारा बनाया जाना है।

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