बहराईच लोकसभा सीट के बारे में बताएगी जनता-PM इनका दीन्ह, हमका एकव पैसा मिला

Anil Ankur

Publish: Apr, 29 2019 04:22:23 PM (IST) | Updated: Apr, 29 2019 06:59:15 PM (IST)

Lucknow, Lucknow, Uttar Pradesh, India

Anil K. Ankur
लखनऊ। बहराईच लोकसभा सुरक्षित सीट से भाजपा की मौजूदा सांसद साध्वी सावित्री बाई फुले अब कांग्रेस की टिकट से चुनाव लड़ रही हैं। वहीं भाजपा विधायक अक्षयवर गौड़ भाजपा की टिकट से यहां चुनाव मैदान में उतरे हैं। उनके सामने यहां पर सपा बसपा गठबंधन के उम्मीदवार शब्बीर अहमद बाल्मीकी अपनी किस्मत अजमा रहे हैं। अब सवाल यह उठता है कि अक्षयवर गौड़ देवरिया के नेता के रूप में यहां जाने जाते हैं और साध्वी को लोग संत मानने को तैयार नहीं हैं और इसी प्रकार शब्बीर अहमद बाल्मीकी को लोग मुसलमान के रूप में कबूल नहीं कर रहे हैं। अब देखना होगा कि ये सच्चाई सामने होने के बाद इन तीन उम्मीदवारों में जनता किस पर अपनी रहमत दिखाती है।

बाहरी उम्मीदवारों ने मारी बाजी
1950 से अब तक16 लोकसभा चुनाव हुए हैं। इनमें अब तक बहराइच संसदीय सीट से आठ बार बाहरी प्रत्याशी चुनाव जीते। सांसदों का रिपोर्ट कार्ड देखिए तो बमुश्किल चार सांसद ऐसे मिलेंगे, जब बहराईच जिले ने विकास में कोई उल्लेखनीय प्रगति की हो। बचे हुए ने चुनाव जीतने के बाद बहराइच की ओर रुख नहीं किया। इससे जनता काफी नाराज है।

पहले डीएम रहे फिर यहां से बन गए सांसद
यूपी की नेपाल सीमा पर इस जिले का दुर्भाग्य है कि यह रेलमार्ग से प्रदेश मुख्यालय से नहीं जुड़ पाया है। यह सब तब है जब यहां के सांसद आईएएस सेवा के अधिकारी भी रह चुके हैं। बहराइच में पहली बार बाहरी प्रत्याशियों में वर्ष 1967 में फैजाबाद के डीएम रहे कुमार केके नैयर रहे। नैयर के कार्यकाल के दौरान अयोध्या में गर्भ गृह में रामलला की मूर्ति रखी गई थी। इसी के बाद उनका राजनीति में आगमन हुआ। उस चुनाव में नैयर बहराइच से और उनकी पत्नी शकुंतला नैयर कैसरगंज से मैदान में उतरे और दोनों चुनाव जीते। तीन बार बुलंंदशहर के आरिफ मोहम्मद खां यहां से चुनाव जीते।

जिनको मिला धन वे खुश बाकी नाराज
मौजूदा सासंद भाजपा रहीं अब कांग्रेस की प्रत्याशी सावित्री का भाजपा और बसपा बसपा गठबंधन के उम्मीदवार से उनका सीधा संघर्ष है। जनता भी यहां की ऐसी है कि वह किसी एक व्यक्ति के लिए अंधाधुंध वोट देने के मूड में नहीं है। किसी गरीब किसान के खाते में 2000 रुपए आ गए तो वह मोदी-मोदी चिल्ला रहा है और जिसके खाते में नहीं गए वह मुहं फुलाए दूसरी पार्टी के लिए नारे लगा रहा है।


यहां पर करीब 17 लाख मतदाता हैं। इन मतदाताओं में सबसे ज्यादा ओबीसी और एससी हैं। इसके बाद मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 19 प्रतिशत के करीब है। ब्राह्मण मतदाताओं का भी यहां अच्छा रोल रहता है। लेकिन यह क्षेत्र पिछड़े पन के कारण पैसे को ज्यादा तरहजीह देता है। नौकरी और गांव में सुविधाओं की फरमाईशइस लोकसभा सीट के लोग खुलकर बोलते हैं। टकीरा गांव में मिली जुली जनसंख्या रहती है। लोगों से बात करने में उन्होंने बताया कि जो शौचालय यहां बनाए गए हैं उन शौचालयों का यहां उपयोग नहीं होता। बूढी सावित्री देवी का कहना है कि मोदी शौचालय दे सकते हैं, पर सबको शौचालय के अंदर तो नहीं भेज सकते। हां, मुझे कोई सुविधा मोदी से नहीं मिली है। पर हम उन्हें ही वोट देंगे। वहीं पर खड़े बारिश लाल बोले भाजपा सांसद पांच साल में कभी नहीं आईं। अब वोट मांगने आ रही हैं। पासी समाज के राम केवल का कहना था कि मोदी सरकार ने उनके लिए बहुत कुछ किया। खाते में रुपए भी आए और पांच लाख का कार्ड भी बन गया। उसकी बात सुनते ही सियाराम ने कहा कि हमे तो कुछ नहीं मिला, हम काहे वोट दें। हमारा वोट तो कांग्रेस को जाएगा। कुल मिलाकर लाभा और हानि के आधार पर यहां वोट बट रहे हैं। इकबाल अहमद का आरोप है कि जब गठबंधन का उम्मीदवार मुसलमान है ही नहीं तो नाम से उसे मुसलमान कैसे माना जाए।

 

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