बाल सम्प्रेक्षण गृह: दिन में दो रोटी और दस डंडे खाते हैं बच्चे, अधिकारी बदलें नहीं बदला दस्तूर!

मोहान रोड़ स्थित संप्रेक्षण गृह में बच्चों के साथ नहीं थम रहा अमानवीय व्यवहार।

By: Dhirendra Singh

Published: 22 Aug 2017, 04:52 PM IST

लखनऊ. राजधानी में मोहान रोड़ स्थित संप्रेक्षण गृह से बच्चों के भागने के मामलों पर प्रशासन अभी तक अपनी इमेज सुधार नहीं पा रहा है। वहीं यहां एक किशोर की मौत होने के मामले से मामला फिर गरमा गया है। आरोप है कि यहां तैनात स्टाफ किशोरों के साथ अमानवीय व्यवहार करता है। इसमें ऊपर तक सभी मिले हुए हैं। किशोर द्वारा किसी बाहरी से इसकी शिकायत करने पर उन्हें तरह-तरह के टॉर्चर से गुजरना पड़ता है। आलम यह हो गया है कि दो रोटियां भले ही नसीब न हो लेकिन यहां बंद कई किशोरों को हर रोज कई डंड़े मार में जरुर खाने पड़ जाते हैं। यहां के कई अधिकारियों के तबादले हुए लेकिन अब तक संप्रेक्षण ग्रह की सूरत नहीं बदली। स्थिति बद से बदतर होती जा रही है।

संप्रेक्षण गृह में करीब 148 किशोर विभिन्न अपराधों में सुनवाई के चलते यहां सुरक्षा में रखे गए हैं। लेकिन महज चार महीने में ही संप्रेक्षण गृह से करीब 17 किशोर भाग चुके हैं। हालांकि उनमें से कुछ को काफी कोशिशों के बाद पकड़ा जा सका। वहीं सोमवार को एक बच्चे की मौत होने का मामला सामने आया। इन सभी मामलों में संप्रेक्षण गृह के स्टाफ और अधिकारियों पर सवाल खड़े किए गए। इन पर अमानवीय व्यवहार करने का भी आरोप लगा। बच्चों के भागने के मामले में दो अधीक्षक, दो जिला प्रोबेशन अधिकारियों को हटाया भी जा चुका है। वहीं कई केयर टेकर व स्टाफ का निलंबन तक किया गया। लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। इसी लापरवाही के चलते सोमवार को भी एक किशोर की भी मौत हो गई। नाम न बताते कि शर्त पर संप्रेक्षण गृह के सूत्रों ने बताया कि उक्त किशोर को स्टाफ द्वारा बुरी तरह पीटा गया था। उसके कान से भी 15 दिन से खून बह रहा था। हाल में प्रधान मजिस्ट्रेट सीतापुर संप्रेक्षण गृह के औचक दौरे पर आए थे। यहां उस बच्चे ने उन्हें उसके साथ स्टाफ द्वारा हो रही मारपीट की शिकायत भी की थी। इस संबंध में उन्होंने जांच के आदेश दिए व मेडिकल रिपोर्ट मांगी थी। लेकिन विभागीय डॉक्टर की मदद से गलत रिपोर्ट दे दी गई। बच्चे की सोमवार को काफी तबीयत खराब हुई और अधिक खून बहने से उसकी मृत्यु हो गई। वहीं इससे पहले भी अवमानीय व्यवहार, मारपीट व अन्य कारणों से बच्चों के भागने की कोशिशों की बात सामने आ चुकी है। 8 जून को विधि भी सेवा प्राधिकरण के सचिव ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी के औचक निरीक्षण में किशोरों को बुरी तरह पीटने के साक्ष्य मिले थे। इस पर तीन केयर टेकर निलंबित भी हुए।

खाना मिले न मिले डंड़े जरूर मिलेते हैं-
संप्रेक्षण गृह में किशोरों के परोसे जाने वाले खाने को लेकर काफी शिकायत हो चुकी है। सूत्रों के मुताबिक वर्तमान संप्रेक्षण गृह उदय शंकर मालवीय को प्रशासन द्वारा खराब खाने के लिए चेताया जा चुका है। वहीं इससे पूर्व भी खाने की खामियों को लेकर किशोरों ने विरोध किया। लेकिन जब-जब उन्होंने विरोध किया उन्हें अच्छे खाने के बजाय डंड़े, गालियां व अमानवीय व्यवहार मिला। अंदर के सूत्रों का कहना है कि यहां बच्चे अगर किसी बात का विरोध करते है तो उन्हें मारा जाता है। वहीं किसी से शिकायत करने पर सजा दोगुनी हो जाती है।

बदले अधिकारी नहीं बदली सूरत
लगातार बच्चों के भागने और उनके साथ होने वाली घटनाएं उजागर होने पर पिछले साढ़े तीन महीने में दो अधीक्षक और एक जिला प्रोबेशन अधिकारी को हटाया गया। अधीक्षकों में अशोक अवस्थी व ध्रुव त्रिपाणी का नाम शामिल था। वहीं हाल में छह बच्चों के भागने के प्रकरण व उचित व्यवस्था न होने पर जिला प्रोबेशन अधिकारी सर्वेश पांडेय को हटाया गया। वहीं अधीक्षक उदय शंकर मालवीय द्वारा कार्यभार संभालते ही सोमवार को किशोर की मौत का बड़ा मामला सामने आया है। सूत्रों का कहना है कि अशोक अवस्थी पर गलत आरोप लगाकर प्रशासन ने छुट्टी के दिन आनन-फानन में हटा दिया था। लेकिन हाल में आए दूसरे अधिकारियों के करीबी लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही।

सीसीटीवी कैमरे खराब
भले ही दावा किया जाता है कि यहां सीसीटीवी कैमरे निगरानी के लिए लगवाए गए हैं। लेकिन सूत्रों के अनुसार अंदर कोई भी कैमरा ठीक से काम नहीं करता। वहीं सीसीटीवी पर मॉनिटरिंग भी नहीं की जाती। इसका सबूत है कि पूर्व में बच्चों के भागने के दौरान कोई भी फुटेज नहीं मिल पाई थी न ही उनकी प्लानिंग की कोई भनक लगी।

क्या कहते हैं जिम्मेदार
मैंने 22 जून से यहां का पदभार संभाला है। इसके बाद से यहां कभी मारपीट जैसी कोई घटना नहीं हुई है। साथ ही जिस बच्चे की मौत हुई उसके साथ भी ऐसा नहीं हुआ था। - उदय शंकर मालवीय (अधीक्षक, संप्रेक्षण गृह)

शासन की मीटिंग में व्यस्त हूं। अभी इस विषय पर बात नहीं कर सकता। - बीएन निरंजन (डीपीओ)


संप्रेक्षण गृह से जुड़ी घटनाएँ

21 अगस्त - एक किशोर की संप्रेक्षण गृह में मौत हुई। आरोप लगा कि उसे बेरहमी से पीटा गया।
8 जुलाई - छह किशोर बालउंड्री व छत पर लगे गेट का लोहे का कुंडा तोड़कर फरार हुए।
2 जून - बलरामपुर अस्पताल से मेडिकल करा लौट रहे दो किशोर चक्कमा देकर भागे, एक को मौके पर पकड़ लिया गया।
2 जून - उन्नाव का किशोर कर्मचारियों को चक्कमा देकर भाग निकला।
11 मई - आठ किशोर एक्जास्ट फैन खोलकर भाग निकले।

Dhirendra Singh
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