सोशल डिस्टेंसिंग और नगदी के लिए करना होगा ये काम

- सोशल डिस्टेसिंग और नगदी के लिए त्वरित बैंकिग उपाय
- कोरोना से बचाव के लिए सभी को सभी को मानने होंगे सोशल डिस्टेंसिंग के नियम

By: Abhishek Gupta

Updated: 29 Jun 2020, 06:45 PM IST

कोरोना संक्रमण तेजी से फैल रहा है। इसके मामले न केवल भारत में बल्कि पूरी दुनिया में लगातार बढ़ रहे हैं। भारत में मामले बढ़ने का कारण सोशल डिस्टेसिंग के सामान्य व सरल तरीकों का पालन न करना है। वैज्ञानिकों व शोधों का निष्कर्ष यही है कि कोरोना संक्रमण को वर्तमान में सिर्फ सोशल डिस्टेसिंग व साफ-सफाई जैसे सरल तरीकों से दूर किया जा सकता है जब तक कि कोई वैक्सीन तैयार नहीं हो जाती। वैज्ञानिकों का मानना है इिसमें अभी समय लग सकता है।

कोरोना महामारी को रोकने के लिए भारत सरकार को लॉकडाउन का सहारा लेना पड़ा। ऐसे समय में आम जनमानस के सामने रोजमर्रा के कामकाज के लिए नगदी की आवश्यकता बनी रहती है। खास कर जो लोग दिहाडी पर काम कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं इनका रोजगार छिन जाने से इन पर दोहरी मार पड़ी है। इनकी समस्या को देखते हुए भारत सरकार पीएम गरीब योजना के तहत राशि इनके बैंक खातों में डालने जा रही है। कई राज्य सरकारों जैसे उत्तर प्रदेश ने दिहाड़ी मजदूर भरण पोषण योजना 2020 के तहत एक-एक हजार रुपये पंजीकृत श्रमिकों के खातों में देने का फैसला किया है। साथ ही पहले से चल रही वृद्धावस्था, निराश्रित महिला पेंशन, दिव्यांग व कुष्ठावस्था पेंशन के लाखों लाभार्थियों के बैंक खातों में दो माह की पेंषन हस्तान्तिरित की जा रही है। इसी प्रकार के अन्य तरह कदम अन्य राज्य भी उठा रहे हैं।

इस तरह के त्वरित प्रयास अच्छे हैं। चूंकि देश में बैंकिग के प्रसार व जनधन बैंक खाता योजना के आने से इनको भुगतान बैंक खातों के माध्यम से ही होता है। जो ई-बैंकिग का उपयोग पहले से कर रहे हैं के द्वारा अपना काम चला लेते हैं। परन्तु इस तरह के संकट के समय आम आदमी जो इस तरह की बैकिंग सुविधा का उपयोग करना नहीं जानते, उनके सामने एक बड़ी समस्या नकदी की उत्पन्न होती है। इस कारण बैंकिंग सुविधाओं की सुगमता हेतु त्वरित कदम यदि नहीं उठाये गये तो यह प्रयास सोशल व शारीरिक दूरी के सिद्धान्त पर भारी पड़ सकते हैं। क्योंकि खातों में रुपये आते ही लोग रुपये निकालने के लिए बैंकों में एकत्रित होने लगते हैं। चूंकि इन लोगों में जागरूकता का अभाव रहता है। अतः यह कोरोना महामारी की लड़ाई में कमजोर कड़ी साबित हो सकती है। महीने के शुरुआती दिनों में बैंकों में रुपये निकालने हेतु लम्बी-लम्बी कतारें दिखाई देती है। इनमें पेंशन भोगी बुजर्ग व सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों की संख्या अधिक होती है। यह वह लोग हैं जो ई-मार्केटिंग या आनलाइन सामान खरीदने की प्रक्रिया से अवगत नहीं हैं। जो थोड़ा जानकार हैं वह किन्हीं वजहों से नहीं करते। वैसे भी ऑनलाईन सामान खरीदने में रोजमर्रा की जरूरत का सामान या कहें जीवन जीने के लिये जो आवष्यक हैं, की मात्रा कम ही होती है। जबकि इनकी प्राथमिक्ता अपनी रोजमर्रा की जरूरतों को पूरी करने की होती है। जिसके लिये यह सभी नगदी प्राप्ति हेतु बैंकों की तरफ भागते हैं और इस कारण बैंकों में भीड़ एकत्रित होती है।

इस महामारी के समय ऐसा न हो और सोशल व शारीरिक दूरी के सिद्धान्त का पूर्णतः पालन हो। इस हेतु बैंकिग व्यवस्था के साथ और कदम उठाने कि आवश्यकता है। पहला डोर-टू-डोर बैंकिंग प्रणाली पर जोर दिया जा सकता। इस तरह की व्यवस्था पहले भी बैंकों द्वारा देश के दूर-दराज इलाकों में हैं। यह प्रसारित करना होगा कि हफ्ते में एक या दो दिन मोबाईल बैंक एवं एटीएम सुविधा आपके द्वार उपलब्ध हो। आज देष के सभी डाकघर बैंक बन चुके हैं। इसलिये उनके सहयोग से इसको लागू किया जा सकता है। इससे ग्रामीण स्तर पर कस्बों एवं ब्लाक स्तर पर भीड़ को एकत्रित होने से रोका जा सकता है।

दूसरा टोकेन प्रणाली अपना कर बैंक भीड़ को नियन्त्रित कर सकते हैं। यह टोकेन व्यवस्था उसी प्रकार हो सकती है जैसे आज कई बैंक ग्राहकों के आने पर टोकेन व्यवस्था अपना रखी है। जब एक ग्राहक बैंक जाता है तो गेट पर ही एक टोकर नम्बर ले लेता है। इसके बाद ग्राहक टोकन पर अंकित सीरियल नम्बर के आने तक प्रतीक्षा करता है। जिस काउन्टर पर टोकेन नम्बर प्रदर्शित होता उसी क्रम में ग्राहक उस काउन्टर पर जा कर अपना कार्य निष्पादन करता है। बैंक खातों में ग्राहक का एक अधिकृत मोबाईल नम्बर रजिस्टर्ड होता है। प्रत्येक बैंक को अपने ग्राहकों के लिए टोल फ्री नम्बर जारी करना होगा। ग्राहक द्वारा इस नम्बर पर मिस्ड काल करने पर स्वतः ओटीपी आधारित एक टोकेन नम्बर उसके अधिकृत मोबाईल पर आये। जिस पर दिन, दिनांक, समय (लंच के पहले/बाद) एवं एक सीरियल नम्बर अंकित हो। उसी आधार पर ग्राहक बैंक आकर अपना कार्य कर सकता है। इसी के साथ बैंक सम-विषम विधि को भी अपना सकती हैं।

इन उपायों को तत्काल लागू किया जा सकता है। क्योंकि इस समय लोग घरों में हैं और बैंकों पर दबाव अभी कम है। अर्थात लोगों को समझने ओर बैंकों को इन्हें लागू करने हेतु दोनों को पर्याप्त समय मिल सकेगा। इन उपायों को लागू करते समय यह अवश्य ध्यान रखा जाये कि पुरानी व्यवस्था कुछ बदलावों के साथ यथावत चलती रहेंगी। कोरोना महामारी की वर्तमान स्थिति को देखते हुए सामाजिक एवं शारीरिक दूरी सिद्धान्त को लम्बे समय तक जारी रखने की जरूरत है। अच्छा होगा सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक व सभी वाणिज्यिक बैंक, भूमि विकास बैंक, ग्रामीण विकास बैंक, सहकारी समितियों आदि मिल कर समन्वय के साथ उपरोक्त उपायों को लागू करने का काम कर सकती हैं।

लेखक
डॉ करुणा शंकर कनौजिया
असिस्टेन्ट प्रोफेसर, व्यावहारिक अर्थशास्त्र विभाग
लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ

Corona virus coronavirus
Abhishek Gupta Desk/Reporting
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