राजधानी में जुटे बीएड-टीईटी के हजारों अभ्यर्थी, बड़े आंदोलन की कोशिश

बीएड-टीईटी 2011 उत्तीर्ण अभ्यर्थियों ने बुधवार को राजधानी लखनऊ में एक बार फिर डेरा डाला।

By:

Published: 06 Jun 2018, 04:40 PM IST

लखनऊ. बीएड-टीईटी 2011 उत्तीर्ण अभ्यर्थियों ने बुधवार को राजधानी लखनऊ में एक बार फिर डेरा डाला। अपनी मांगो को लेकर हज़ारों अभ्यर्थियों ने ईको गार्डन से विधानसभा तक तिरंगा मार्च निकलने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस ने एहतियातन ईको गार्डन के सभी गेट बंद कर दिए। पुलिस और अभ्यर्थियों के बीच धक्का मुक्की भी हुई जिसमें कई अभ्यर्थी घायल भी हो गए।

ये हैं मांग

अभ्यर्थियों का कहना था कि वे नियुक्ति की मांग को लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ से मुलाकात करना चाहते हैं। सुबह जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने अभ्यर्थियों से मुलाकात कर उन्हें समझाने की कोशिश की लेकिन वे नहीं माने और तिरंगा मार्च निकालने का ऐलान कर दिया। इसके बाद अभ्यर्थियों को रोकने के लिए ईको गार्डन के बाहर भारी संख्या में कई थानों की पुलिस फ़ोर्स तैनात कर दी गई।

इससे पहले भी किया था प्रदर्शन

 

इससे पहले 29 मई को लखनऊ में बीएड टीईटी 2011 के प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों और पुलिस के बीच तगड़ी झड़प हो गई थी. इस दौरान पुलिस ने जहां लाठीचार्ज किया, वहीं अभ्यर्थियों ने भी पुलिस पर पथराव किया। दोनों पक्षों की भिड़ंत में कई पुलिसकर्मी और प्रदर्शनकारी घायल हो गए। खुद सीएम योगी ने अभ्यर्थियों की समस्या को लेकर 3 सदस्यीय समिति गठित की है। अभ्यर्थियों का कहना है कि उनसे 5 से 6 जून तक मुख्यमंत्री से मिलवाने का आश्वासन दिया गया था लेकिन इस पर अभी तक कोई अमल नहीं हो रहा है।

ये है पूरा मामला

दरअसल ये मामाल लगभग साढ़े छह साल पुराना है। साल 2011 नंवबर में 72,825 पदों पर भर्ती निकाली गई थी। इन पदों पर टीईटी के अंकों पर भर्ती होनी थी, जिसे अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट इलाहबाद में चैलेंज किया था. अभ्यर्थियों ने अकादमिक मेरिट पर भर्ती की मांग रखी थी। इसी बीच 2012 में सपा सरकार आ गई और सरकार ने टीईटी मेरिट पर आधारित विज्ञापन को रद्द करके, 7 दिसंबर 2012 को 72825 पदों के लिए अकादमिक मेरिट के आधार पर नया विज्ञापन जारी किया गया। पुराना मामला कोर्ट में चलता रहा।

मुकदमे के दौरान इलाहबाद कोर्ट ने पुराने विज्ञापन को भी सही मानते हुए, उस पर ही भर्ती का आदेश दिया। यह आदेश नवंबर 2014 में आया। सपा सरकार ने विज्ञापन बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। अभ्यर्थियों के अनुसार 25 जुलाई 2017 को SC ने अपने आदेश में नए विज्ञापन को सही मानते हुए अब तक हुए अंतरिम आदेशों पर हुई भर्तियों को सुरक्षित करते हुए, नए विज्ञापन पर भी भर्ती की सरकार को छूट दी लेकिन अभी तक मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद भी भर्ती नहीं हो सकी है। इसी कारण सैकड़ों अभ्यर्थी प्रदर्शन कर रहे हैं।

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned