लालू के दिन गुजर गए, गुजरात मॉडल से बिहार में विकास भी हुआ और कानून व्यवस्था भी सुधरी

बिहार के राज्यपाल लालजी टंडन से बातचीत-

By: Anil Ankur

Published: 30 Dec 2018, 04:54 PM IST


अनिल के. अंकुर
लखनऊ। जमीन से उठकर सीढ़ी दर सीढ़ी चढ़कर बिहार के राज्यपाल बने लालजी टंडन बिहार के विकास और कानून व्यवस्था से संतुष्ट हैं। उनका कहना है कि गुजरात मॉडल से विकास आसानी से संभव है। बिहार में विकास भी हुआ है और वहां की कानून व्यवसथा में सुधार भी हुआ है। राजनीति में सभासद के रूप में कदम रखने वाले लालजी टंडन ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। वे यूपी की सरकार चार बार मंत्री बने और फिर सांसद भी चुने गए। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के वे परम अनुयायी हैं और अटल की स्मृति में तरह तरह तरह के आयोजन करवा रहे हैं। उनका मानना है कि बिहार में विकास की अपार संभावनाएं हैं। उन संभावनाओं का और दोहन होना चाहिए। हमेशा चर्चा में रहने वाले बिहार के बारे में पत्रिका से उन्होंने विस्तार से बात की। पेश है अंंश-

सवाल- आपको बिहार में कैसा लग रहा है?
उत्तर- बहुत अच्छा, बिहार प्राकृतिक सम्पन्नता वाला प्रदेश है। उसका सही उपयोग होना चाहिए।

सवाल- आप तो यूपी की राजधानी लखनऊ से पटना गए। क्या अंतर है दोनो राजधानियों में?
उत्तर- बिहार की अपनी खूबसूरती है। पटना अदभुद स्थान है। बलग में पटना साहिब गुरुद्वारा है। आनंद ही आनंद की अनुभूति होती है, ऐसी पवित्र स्थली पर।

सवाल- बिहार में लालू राज का कितना असर बचा है?
उत्तर- लालू राज खत्म हो गया है वहां। अब वह दिन नहीं रहे कि शाम के बाद लोग घर से निकलने में डरें।

सवाल- बिहार में कानून व्यवस्था का बहुत बड़ा सवाल था। अब क्या स्थिति है?
उत्तर- बिहार में कानून व्यवस्था में काफी बदलाव आया है। काफी हद तक सुधार हो रहा है। अभी गुंजाईश बाकी है। वह भी ठीक हो जाएगा।

सवाल- बिहार पहले अविकसित क्षेत्र में गिना जाता था। अब क्या स्थिति है?
उत्तर- दरअसल, विकास का जो गुजरात मॉडल तैयार हुआ, उसने सबको प्रेरणा दी। इसका लाभ बिहार को भी मिला। वहां काफी विकास हुआ है।

सवाल- पुरातन समय में बिहार ने उच्च शिक्षा में काफी योगदान दिया है। अब क्या स्थिति है।
उत्तर- मैं विश्व विद्यालयों को कुलाधिपति होता हूं। लगातार कुलपतियों और अन्य विद्वानों से शैक्षिक विकास के लिए चर्चा करता रहता हूं। बिहार में जो शैक्षिक विकास हो रहा है वह अदभुद है। वहां के लोग पढऩे पर विश्वास रखते हैं। यह सोच उन्हें आगे ले जाएगी।

Anil Ankur Desk/Reporting
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