यूपी में इस खास रणनीति पर काम कर रहे सभी दल, विपक्ष को मात देने की सबकी अपनी-अपनी तैयारी

- 2022 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी बीजेपी, सपा, बसपा और कांग्रेस
- छोटे दलों से गठबंधन करेंगे अखिलेश, कांग्रेस-बसपा लड़ेगी अपने दम पर, तैयारियों में जुटी बीजेपी

By: Hariom Dwivedi

Updated: 31 May 2020, 06:53 PM IST

लखनऊ. कहावत है कि दूध का जला छाछ भी फूंक-फूंककर पीता है, कुछ ऐसा ही हाल उत्तर प्रदेश के राजनीतिक दलों का है। खासकर सपा-बसपा और कांग्रेस का, जो गठबंधन की राजनीति से तौबा करते हुए एकला चलो की रणनीति पर फोकस कर रहे हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव सपा-बसपा का गठबंधन सुर्खियों में रहा तो 2017 के विधानसभा चुनाव में सत्ता पर काबिज होने के लिए सपा-कांग्रेस ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा। लेकिन, चुनावी नतीजों ने राजनीतिक दलों को रणनीति बदलने पर बाध्य कर दिया। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 में भले ही काफी वक्त है, लेकिन राजनीतिक पार्टियां अभी से ही कील-कांटा दुरुस्त करने में जुट गई हैं। चाहे वह सत्तारूढ़ दल बीजेपी हो फिर सपा-बसपा और कांग्रेस, सबका फोकस संगठन की मजबूती और विपक्षी दलों को मात देने पर है। पार्टी प्रमुखों का दावा है कि इस बार किसी बड़े दल से गठबंधन नहीं करेंगे, समझौता सिर्फ छोटी पार्टियों से होगा। योगी-मोदी की उपलब्धियों के बूते भाजपाई फिर से सत्ता में लौटने का दावा कर रहे हैं वहीं, सपा-बसपा को खुद के जीत की उम्मीद है। कांग्रेस भी जीत का लक्ष्य लेकर तैयारियों में जुटी है।

प्रियंका अपने दम पर लड़ रही हैं जंग
लोकसभा चुनाव में हारने के बाद से कांग्रेस महासिचव प्रियंका गांधी सरकार पर लगातार हमलावर हैं। कई मुद्दों पर जिस तरह वह उत्तर प्रदेश सरकार को घेर रही हैं, कांग्रेस मुख्य विपक्षी दल की भूमिका में नजर आ रही है। ज्यादातर मामलों में सपा-बसपा का शीर्ष नेतृत्व महज बयानबाजी तक ही सीमित है वहीं, प्रियंका गांधी और यूपी अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू की अगुआई में कांग्रेसी जमीन पर उतर कर पार्टी में नई जान फूंकने की कोशिश कर रहे हैं। संगठन में भी जान फूंकने की कोशिश की जा रही है। पार्टी नेताओं को उम्मीद है कि 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस यूपी में बड़ी जीत हासिल करेगी। कांग्रेस सूत्रों की मानें तो पार्टी अब किसी दल से गठबंधन नहीं करेगी, बल्कि बाहरी लोगों की जगह पार्टी के पुराने और जमीन से जुड़े कार्यकर्ताओं को टिकट देने में तरजीह देगी। वर्तमान में यूपी में सिर्फ सोनिया गांधी ही कांग्रेस की सांसद हैं, जबकि पार्टी के 07 विधायक हैं।

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छोटे दलों का टटोलेंगे मन अखिलेश
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के लिए बड़े दलों से गठबंधन अभी तक घाटे का सौदा रहा है, शायद इसीलिए वह अब इससे तौबा कर रहे हैं। सपा प्रमुख का कहना है कि वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा किसी भी बड़े दल से गठबंधन नहीं करेगी। छोटे दलों को जरूर साथ ले सकते हैं। 2017 के यूपी विस चुनाव में सपा ने कांग्रेस से गठबंधन किया था, लेकिन उम्मीदों के मुताबिक सफलता नहीं मिली। 2012 में अकेले दम सरकार बनाने वाली सपा अच्छे लड़कों (अखिलेश यादव, राहुल गांधी) की दोस्ती के बावजूद सिर्फ 47 सीटों पर ही सिमट गई। 2019 के लोस चुनाव में अखिलेश ने फिर गठबंधन का दांव खेला। इसके लिए उन्होंने पुरानी अदावत को भूलकर चिरप्रतिद्वंदी पार्टी बसपा से गठबंधन किया, लेकिन यहां भी निराशा हाथ लगी। आम चुनाव में सपा केवल 05 सीटें ही जीत सकीं, जबकि बसपा 10 सीटों पर जीत हासिल करने में सफल रही।

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बसपा का एलान किसी का नहीं लेंगे साथ
2019 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी संग गठबंधन कर चुकीं मायावती फिलहाल किसी भी दल से गठबंधन नहीं करेंगी। बसपा प्रमुख का कहना है कि आगामी विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी अकेले ही चुनाव लड़ेगी। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो जिस तरह से बहुजन समाज में नये नेतृत्व की मांग उठ रही है, आगे की राह मायावती के लिए आसान नहीं रहने वाली है। दूसरे दलों का दामन थाम रहे पार्टी के 'बागी' भी बसपा के सामने चुनौतियां बनकर खड़े हैं वहीं, भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर जैसे दल भी मायावती की मुसीबत बढ़ा रहे हैं। वर्तमान में यूपी में बसपा के 10 सांसद और 19 विधायक हैं। इसके अलावा मायावती के सामने भारतीय जनता पार्टी, सपा और कांग्रेस जैसा मजबूत विपक्ष से निपटना किसी चुनौती से कम नहीं है।

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श्रमिक/कामगार लिखेंगे राजनीतिक दलों की तकदीर
कोरोना संकट के बीच उत्तर प्रदेश में दूसरे राज्यों से अब तक करीब 25 लाख लोग आ चुके हैं। योगी सरकार का कहना है कि लोग जब तक आएंगे सरकार उन्हें लाती रहेगी। ऐसे में यह संख्या करीब 40 लाख के पार जा सकती है। इनमें से बड़ी संख्या में लोग गांवों और कस्बों के हैं। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो लॉकडाउन के बीच यूपी पहुंचे श्रमिक/कामगार ही आगामी चुनावों में राजनीतिक दलों की तकदीर लिखेंगे। वह चाहे आगामी पंचायत चुनाव हो या फिर 2022 का विधानसभा चुनाव। शायद यही कारण है कि इस संकट की घड़ी में बीजेपी, सपा-बसपा और कांग्रेस सहित सभी दल आमजन के साथ खड़े हैं, यह दिखाना चाहते हैं।

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