फूलपुर उपचुनाव के संभावित नतीजों से भाजपा परेशान, हार की आशंका

- इलाहाबाद उत्तरी शहर में कम मतदान और फूलपुर-सोरावं में ज्यादा मतदान से बेचैनी, फूलपुर और सोरावं क्षेत्र में पिछले चुनाव में भी सपा को मिली थी बढ़त

By: आलोक पाण्डेय

Published: 13 Mar 2018, 11:49 AM IST

लखनऊ. फूलपुर और गोरखपुर के उपचुनावों में भाजपा के नेताओं का ब्लड प्रेशर बढ़ा दिया है। सोमवार की देर शाम समीक्षा बैठक के दौरान निष्पक्ष निकला कि गोरखपुर में कमल का राज कायम रहेगा, लेकिन फूलपुर में जबरदस्त हार की आशंका है। फूलपुर लोकसभा क्षेत्र के दिग्गज नेताओं और कार्यकर्ताओं ने विभिन्न क्षेत्रों के वोटिंग प्रतिशत और पिछले चुनावों में उक्त क्षेत्रों में भाजपा और सपा को मिले वोटों की तुलना के आधार पर यह निष्कर्ष तैयार किया है। रिपोर्ट से भाजपा की प्रदेश इकाई भी सहमत है, लेकिन कोई बड़ा नेता खुलकर कुछ भी कहने के लिए तैयार नहीं है।


इलाहाबाद उत्तर में सिर्फ 21 फीसदी वोट से भाजपा निराश

फूलपुर में भाजपा की हार होगी तो बड़ी वजह फूलपुर लोकसभा क्षेत्र के इलाहाबाद उत्तर क्षेत्र में कम मतदान प्रतिशत होगा। समीक्षा बैठक में सामने आया कि सबसे ज्यादा मतदान फूलपुर विधानसभा क्षेत्र में 46.32 फीसदी हुआ, दूसरे नम्बर पर सोरांव विधानसभा में 45 फीसदी वोट पड़े। फाफामऊ विधनासभा में 43 फीसदी और इलाहाबाद पश्चिमी विधानसभा में 31 फीसदी वोट पड़े, जबकि इलाहाबाद उत्तरी विधानसभा क्षेत्र में सबसे कम यानी महज 21.65 फीसद लोगों ने मताधिकार का इस्तेमाल किया। ऐसे में भाजपा की रिपोर्ट बताती है कि यह सीट जीतना मुश्किल होगा। कारण पिछले चुनावों में भाजपा को इलाहाबाद उत्तरी विधानसभा क्षेत्र तथा फाफामऊ बढ़त मिली थी, जबकि फूलपुर और सोरांव में सपा के उम्मीदवारों ने बाजी मारी थी। अब इलाहाबाद उत्तरी विधानसभा क्षेत्र तथा फाफामऊ में कम वोटिंग का मतलब है भाजपा का नुकसान, जबकि फूलपुर और सोरांव में ज्यादा वोटिंग का मतलब है सपा की साइकिल की रफ्तार तेज हुई है। इसके अलावा अन्य क्षेत्रों में बसपा के भी कुछेक वोट सपा के खाते में अवश्य गए हैं। रिपोर्ट कहती है कि इस आधार पर फूलपुर सीट पर भाजपा की जीत मुश्किल है।


50 फीसदी वोटिंग पर जीत पक्की मान रही थी भाजपा

50 या उससे अधिक मतदान प्रतिशत पर सत्तारूढ़ भाजपा अपने उम्मीदवारों की जीत पक्की मान रही थी। समीक्षा बैठक में सामने आया कि फूलपुर में सिर्फ 38 फीसदी मतदान से बढ़त का सवाल ही खारिज हो गया है। अब सवाल सिर्फ जीत का है। पार्टी मुख्यालय में समीक्षा बैठक में पूर्व अध्यक्ष ने स्वीकार किया कि इलाहाबाद उत्तरी क्षेत्र में भाजपा के सर्वाधिक वोटर हैं, लेकिन वहां सिर्फ 21 फीसदी मतदान होना शुभ संकेत नहीं है। उन्होंने चुनाव आयोग की रिपोर्ट रखते हुए कहाकि फूलपुर व सोरांव विधानसभा में जमकर मतदान हुआ है, जिसके कारण सपा की उम्मीद बढ़ी है।


अतीक भी फेल हुए, कांग्रेस नहीं काट पाई वोट

भाजपा को सपा-बसपा के गठबंधन की स्थिति में अतीक अहमद से उम्मीद थी, लेकिन निर्दलीय उम्मीदवार अतीक अहमद का पटाखा फुस्स हो गया। इसके अलावा मतदान के दिन कांग्रेस भी बैकफुट पर नजर आई। दर्जन भर ऐसे बूथ रहे जहां कांग्रेस के पोलिंग एजेंट तक दिखाई नहीं पड़े और जो दिखे वह बोलते रहे कि अंतिम वक्त में कांग्रेस ने सपा को समर्थन कर दिया है। ऐसे में फूलपुर में सीधा मुकाबला सपा और भाजपा के बीच हुआ है। फिलहाल समीक्षा के आधार पर सपा का पलड़ा भारी दिखता है। उदाहरण के तौर पर राजापुर मल्हुआ पोलिंग बूथ पर सपा समर्थकों की भारी भीड़ के साथ ही जातिगत आंकड़े कम से कम यही कहते हैं। भाजपा कार्यकताओं ने बताया कि जिस मतदान केंद्र पर यादव मतदाताओं की संख्या अधिक थी वहां सपा का पलड़ा भारी था, लेकिन दलित वोटों के समीकरण से यह बढ़त और बढ़ गई। फाफामऊ विधानसभा के कछारी इलाकों में सपा के लिए इकतरफा वोटिंग की खबर मिली है। यह इलाका यादवों के गढ़ में गिना जाता है और मुस्लिम मतदाता भी काफी संख्या में है। गौरतलब है कि पिछले चुनाव में भाजपा के पास तीन लाख से अधिक वोटों की बढ़त थी। वह वोटों की बढ़त भरपूर वोटिंग नहीं होने से पूरी तरह खत्म हो गई है। लड़ाई अब आमने-सामने की है और निश्चित है कि हार-जीत कम अंतराल से होगी और परिणाम चौंकाने वाला मुमकिन है।

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आलोक पाण्डेय
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