भाजपा के सामने बड़ी चुनौती, पिछले साल चलाया था इस वर्ग को मनाने का अभियान, फिर हो गई यह घटना

ताजा मामला बानगी है कि समाज में इस वर्ग को अब भी उसी संकीर्ण सोच का शिकार होना पड़ रहा, जो दशकों पहले थी।

By: Abhishek Gupta

Published: 03 Mar 2019, 10:15 PM IST

लखनऊ. दलितों उत्पीड़न व अत्याचार का मामला एक बार फिर राजनीतिक गलियारों में गर्माने जा रहा है। ताजा मामला लखनऊ के गोसाईगंज इलाके का है जहां एक 25 वर्षीय दलित युवक ने हाथ धोने के लिए शुक्रवार को गोसाईंगंज थाना क्षेत्र में एक मंदिर के बाहर रखे बर्तन से पानी लेने की कोशिश की। यह देख वहां के एक पुजारी ने दलित युवक पर लोहे की रॉड से हमला कर दिया। युवक की हालत गंभीर है। वहीं पुजारी को गिरफ्तार कर लिया गया है। यह मामला बानगी है कि समाज में दलितों को अब भी उसी संकीर्ण सोच का शिकार होना पड़ रहा, जो दशकों पहले थी। इसी के साथ यूपी में दलित उत्पीड़न की कुछ कड़वी यादें ताजा हो गई हैं। साथ ही ताजा हो गई है भाजपा कि वो रणनीति जिसमें वो दलितों को रिझाने का प्रयास कर रही थी।

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दलित-राजपूत संघर्ष-

साल 2017 सहारनपुर में राजपूत-दलित संघर्ष की घटना को आखिर कौन भूल सकता है। उत्तर प्रदेश को योगी आदित्यनाथ के रूप में नया-नया मुख्यमंत्री मिला था, लेकिन उसी के एक महीने बाद ही सहारनपुर के शब्बीरपुर में राजपूत-दलितों के बीच खूनी संघर्ष देखने को मिला। पहले 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती के दौरान सहारनपुर के एक गांव में शोभायात्रा निकालने के दौरान दो गुटों में संघर्ष हुआ। बाद में 5 मई को महाराणा प्रताप जयंती के मौके पर शब्बीरपुर के पास एक गांव में महारणा प्रताप की जयंती पर कार्यक्रम का आयोजन था। लेकिन दलित समाज के लोगों ने इसका विरोध किया और कार्यक्रम नहीं होने दिया। यहीं से बात बिगड़ी। शब्बीरपुर में दलितों और ठाकुरों के बीच हुई तनातनी ने उग्र रूप धारण कर लिया। दोनों पक्षों के बीच पथराव, गोलीबारी और आगजनी भी हुई। क्षत्रिय समाज के लोगों ने दलितों के घरों को तहस नहस कर दिया। मामले में करीब 17 लोग गिरफ्तार हुए। दलित नेता चंद्रशेखर रावण मुख्य आरोपी के तौर पर जेल भी गए।

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दलित दूल्हे को उतारा घोड़ी से-

अगली घटना तो और शर्मनाक थी। बीते साल एटा में ठाकुर बिरादरी के कुछ युवकों ने दलित युवक की बारात के दौरान उस पर हमला कर दिया और उसे घोड़ी से उतार दिया। यहीं नहीं, विवाह के स्थल तक दलित युवक को पैदल जाने के लिए मजबूर भी किया। अपने आपको ठाकुर कहने वालों युवकों ने बारात में शामिल लोगों पर पत्थरबाजी भी की और उन्हें जातिसूचक शब्द बोलकर गालियां दीं।

यूपी में यह हैं आंकड़े-

अब यूपी की बात हो ही रही है तो बात करते हैं आंकड़ो की। NCRB (नेशनल क्राइस रिकॉर्ड्स ब्यूरो) के मुताबिक वर्ष 2016 में अनुसूचित जाति पर हमलों के मामले में यूपी (10,426) शीर्ष स्थान पर रहा। यहां दलित महिलाओं के साथ दुष्कर्म के 1065 मामले दर्ज हुए, जिसमें से अकेले लखनऊ में 88 घटनाएं महिलाओं के साथ घटीं। वहीं राष्ट्रीय स्तर की बात की जाए तो NCRB के आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि जिन राज्यों में दलितों का सर्वाधिक उत्पीड़न हुआ, उन राज्यों में या तो भाजपा की सरकार है या भाजपा के गठबंधन वाली सरकार है।

भाजपा ने शुरू किया था दलितों को मनाने का अभियान-

शायद इसी वजह से बीते वर्ष भाजपा ने दलितों की नाराजगी के माहौल को भांपते हुए दलितों के घर भोजन करने का बाकायदा एक अभियान शुरू किया था। उन्हें रिझाने के लिए भाजपा ने ग्राम स्वराज अभियान का सहारा लिया। 14 अप्रैल से 5 मई, 2017 तक चले इस अभियान में भाजपा सरकार के मंत्री और नेताओं ने दलितों की नब्ज टटोली। वे दूरदराज के गांव पहुंचे, रात में चौपाल लगाई। लेकिन आखिर में हुआ क्या? लखनऊ में दलित पर हुआ हमला शायद इसी सवाल का जवाब है।

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