भाजपा में उपेक्षा से नाराज राहुल संग आ सकते हैं वरुण गांधी!

भाजपा में उपेक्षा से नाराज राहुल संग आ सकते हैं वरुण गांधी!
Varun Gandhi

Shatrudhan Gupta | Updated: 28 Oct 2017, 05:31:44 PM (IST) Lucknow, Uttar Pradesh, India

भाजपा में साइडलाइन चल रहे सुल्तानपुर के सांसद और फायरब्रांड नेता वरुण गांधी जल्द ही कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं।

लखनऊ. भाजपा में साइडलाइन चल रहे सुल्तानपुर के सांसद और फायरब्रांड नेता वरुण गांधी जल्द ही कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं। यह फैसला भाजपा को बड़ा झटका देने वाला होगा। दरअसल, पार्टी में अपनी उपेक्षा से नाराज वरुण गांधी 2018 में कोई बड़ा कदम उठा सकते हैं। सूत्र बताते हैं कि वरुण आगामी लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं। वरुण अपनी बहन प्रियंका के बुलावे और वक्त की नजाकत को देखते हुए कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं। सूत्रों की मानें तो कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के पार्टी की कमान मिलते ही वरुण को कांग्रेस में सम्मानजनक पद देकर महत्व दिया जा सकता है।

सूत्र बताते हैं कि प्रियंका ने वरुण से घर वापसी के बाबत बात की है। वरुण के रिश्ते प्रियंका से हमेशा मधुर रहे हैं। ऐसे में संभव है कि भाजपा में अपनी उपेक्षा से नाराज वरुण घर वापसी कर लें। वहीं, वरुण ने राहुल गांधी के खिलाफ कभी भी किसी रैली या सभा में सीधा हमला नहीं बोला है। राहुल ने भी विपक्षी दल में रहने के बावजूद भाई वरुण या चाची मेनका के खिलाफ कभी सीधा मोर्चा नहीं खोला। वरुण के रिश्ते सोनिया गांधी से भी अच्छे हैं। इसलिए इस चर्चा को और दम मिल रहा है कि जल्द ही वरुण कांग्रेस को देश व यूपी में मजबूती देने के लिए राहुल गांधी के साथ आएंगे।

भाजपा सरकार को कई मुद्दों पर घेरा

कांग्रेस सूत्र बताते हैं कि राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष बनते ही वरुण गांधी की कांग्रेस में एंट्री हो सकती है। अगर ऐसा हुआ तो लगभग साढ़े तीन दशक बाद नेहरू-गांधी परिवार में एकता आ सकती है। मालूम हो कि भाजपा में वरुण गांधी साइड लाइन चल रहे हैं। वह ने तो पार्टी की किसी सभा में शामिल हो रहे हैं और न ही किसी अन्य कार्यक्रम में। सुल्तानपुर के सांसद वरुण गाधी अब यह बखूबी समझने लगे हैं कि उनके परिवार का विरोध करने तथा कांग्रेस मुक्त भारत का सपना देखने वाली भाजपा में उनका राजनीतिक भविष्य उज्जवल नहीं है। ऐसे में वे परोक्ष-अपरोक्ष रूप से अपनी ही सरकार को समय-समय पर किसी न किसी मुद्दे पर घेरते नजर आते हैं।

मोदी-शाह के रहते पार्टी में नहीं गलेगी दाल

अब वरुण गांधी किसान-गरीबों की बात करने के साथ सामाजिक न्याय और सबकी सहभागिता की बात करने लगे हैं। उन्हें यह भी पता है कि भाजपा भले ही सामाजिक एवं सामरिक न्याय की बात करे, पर इस नए युग वाली भाजपा में यह सब मुश्किल है। उन्हें पता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के रहते उन्हें भाजपा में अहम ओहदा नहीं मिल सकता। ऐसे में वरुण अब नए नाव की सवारी कर सकते हैं और यह नाव कांग्रेस से अच्छी कोई और नहीं हो सकती।

सिर्फ सांसद बन कर रह गए हैं वरुण

मालूम हो कि जब तक राजनाथ सिंह पार्टी अध्यक्ष थे, तब तक वरुण गांधी की पार्टी में सम्मानजनक स्थिति थी। वह पार्टी के महासचिव रहने के साथ ही पश्चिम बंगाल और असम के प्रभारी भी थे। अब स्थितियां बदली हैं। अमित शाह के हाथ में पार्टी की कमान आते ही वह साइड कर दिए गए। उनसे राज्यों का प्रभार वापस ले लिया गया। राष्ट्रीय महासचिव के पद से भी हटा दिया गया। मसलन, उन्हें पूरी तरह से हाशिए पर ढकेल दिया गया, जो अब तक कायम है। वरुण अब केवल सांसद बन कर रह गए हैं।

तराई क्षेत्रों में है अच्छी पकड़

उत्तर प्रदेश में वरुण गांधी तराई के पीलीभीत, सुल्तापुर, लखीमपुर खीरी के साथ ही इससे सटे इलाकों में अच्छी पकड़ है। यदि वरुण कांग्रेस में शामिल होते हैं तो यूपी में कांग्रेस को संजीवनी मिल सकती है। राहुल गांधी वरुण के भरोसे भाजपा को यूपी में पटखनी दे सकते हैं। ऐसे में कांग्रेस व राहुल-प्रियंका चाहती हैं कि वरुण की घर वासपी हो। फिलहाल इस पर अंतिम फैसला वरुण गांधी को लेना है।

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