नेहरू के गढ़ में ही BJP की राज्य कार्यकारिणी की बैठक क्यों ?

नेहरू के गढ़ में ही BJP की राज्य कार्यकारिणी की बैठक क्यों ?
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इलाहाबाद में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक करने के पीछे है कई कारण

लखनऊ. संगम नगरी इलाहाबाद हमेशा से ही इतिहास और पौराणिक गतिविधियों के लिए फेमस रहा है। इसी शहर के आगोश में स्वतंत्रता संग्राम और कांग्रेस की सोच का जन्म हुआ था। लेकिन 12-13 जून को बीजेपी यहां राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक आयोजित कर रही है। यह बैठक जवाहरलाल नेहरू के निवास आनंद भवन से 5 किलोमीटर दूर केपी कॉलेज ग्राउंड में होगी, जहां भाजपा नया इतिहास रचने के फिराक में होगी। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि बीजेपी ने कार्यकारिणी की बैठक के लिए इलाहाबाद को ही क्यों चुना? 

इलाहाबाद ही क्यों?
इलाहाबाद को इसलिए भी चुना गया है क्योंकि इस शहर से हिन्दुओं की असीम भावनाएं जुड़ी हुई है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह भाजपा का अलग तरह से चला जाति कार्ड है। यहां से भाजपा एक नया इतिहास लिखने का प्रयास कर रही है, इसलिए पुराने ऐतिहासिक पात्रों को अपने पात्रों से ढकने की यह एक नयी तरकीब है। बेशक इलाहाबाद राजनीतिक विचारों से कांग्रेस का गढ़ हो पर नेहरू की गृह नगरी में भाजपा नेताओं ने भारत रत्न पुरुषोत्तम दास टंडन की भूमिका को हवाला दिया है। बता दें कि टंडन एक स्वतंत्रता सेनानी थे और उन्होंने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी में इलाहाबाद का प्रतिनिधित्व भी किया था, पर कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रपति पद से नेहरू द्वारा वह बाहर कर दिए गए थे।


हालांकि कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि भाजपा को इससे दोहरा फ़ायदा भी मिल सकता है। उनका मानना है कि भाजपा दलित वोट खीचने के लिए भी ऐसा कर रही है।

पिछड़ी जाति के वोटर को लुभाने की चाल
फूलपुर इलाहाबाद क्षेत्र में आता है और यह वही क्षेत्र है, जहां से भाजपा के वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्या एमपी हैं। पिछड़े चेहरे के तौर पर प्रदेश अध्यक्ष बने मौर्या के भरोसे भाजपा दलित वोट भी खींचना चाहती है। यह मौका मौर्या के लिए अपना राजनैतिक कद बढ़ाने के लिए भी है। मौर्या के लिए यह एक बड़ी चुनौती इसलिए भी है, क्योंकि उनसे पहले 13 साल तक प्रदेश अध्यक्ष ब्राह्मण चेहरा ही रहा है। 

भाजपा दोहराएगी अपना गेम प्लान 
प्रदेश में भी एक बार फिर भाजपा अपना गेम प्लान रिपीट कर रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में भाजपा के दो वर्ष पूरे होने पर सभा सहारनपुर में सम्बोधित की थी। मंशा साफ़ थी बसपा का वोट बैंक काटना। अब यही भाजपा इलाहाबाद में दोहराना चाहती है। 
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