...जब लालजी टंडन हुए गिरफ्तार 

पूर्व सांसद और लोकतंत्र सेनानी लालजी टंडन ने लखनऊ के संगीत नाटक अकादमी सभागार में आयोजित लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान समारोह में आपातकाल के दौर को याद करते हुए अपने अनुभव साझा किये। 

लखनऊ. पूर्व सांसद और लोकतंत्र सेनानी लालजी टंडन ने लखनऊ के संगीत नाटक अकादमी सभागार में आयोजित लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान समारोह में आपातकाल के दौर को याद करते हुए अपने अनुभव साझा किये। मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे टंडन ने कार्यक्रम में कहा कि जेपी आंदोलन के दौरान उन्हें लखनऊ के आंदोलन की कमान सौपी गई थी। टंडन ने कहा कि इमरजेंसी लागू होने के बाद लखनऊ में सबसे पहले गिरफ़्तारी उनकी हुई थी। 

जेपी के साथ थे नानाजी 

कार्यक्रम में लालजी टंडन ने कहा कि जयप्रकाश नारायण बिहार में सक्रिय होने के बाद आंदोलन का उत्तर प्रदेश में विस्तार करने के लिए प्रयासरत थे। इस आंदोलन में सभी गैर कांग्रेसी दल जेपी का साथ दे रहे थे। दीनदयाल उपाध्याय के सबसे करीबी नानाजी देशमुख थे। जेपी के नेतृत्व में नानाजी साथ थे। जेपी के समाजवादी शिष्य भीड़ के संयोजन में बाधा पैदा कर रहे थे। इसमें नानाजी ने सहयोग किया। 

समाजवादियों के विरोध को इस तरह रोका 

टंडन ने कहा कि लखनऊ में  आंदोलन का संयोजक मुझे बनाया गया। इस बात की सम्भावना थी कि समाजवादी मुझे परेशान करते। इसके लिए मैंने चम्बल के डाकुओं का सरेंडर कराने वाले सर्वोदयी नेता महावीर भाई का सहयोग लिया। मैंने महावीर भाई को सामने रखा जिसके बाद समाजवादी मुझे किसी तरह से परेशान नहीं कर सके। 

सबसे पहले टंडन हुए थे गिरफ्तार 

टंडन ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि जब इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल की घोषणा की तो लखनऊ में सबसे पहले गिरफ़्तारी उनकी हुई। उन्होंने कहा कि इसके बाद आपातकाल के खिलाफ लगभग 22 महीनों तक संघर्ष चला और देश में लोकतंत्र की वापसी हुई। आपातकाल खत्म होने के बाद हुए चुनाव में इंदिरा गाँधी की बुरी तरह हार हुई। 

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Laxmi Narayan
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