नवरात्र में ब्रह्मचारिणी माता को इस मंत्र के जप से करें खुश

माता ब्रह्मचारिणी की कथा

By: Ritesh Singh

Published: 17 Oct 2020, 08:08 PM IST

लखनऊ , पंडित शक्ति ने बतायाकि मां दुर्गा का दूसरा रूप ब्रह्मचारिणी है। मां दुर्गा का यह रूप भक्तों को अनंत फल प्रदान करने वाली है। उन्होंने कहाकि इनकी उपासना से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम की भावना जागृत होती है।

माता ब्रह्मचारिणी की कथा

ब्रह्मचारिणी ( शांति पूर्ण रूप) दूसरी उपस्तिथि नौ दुर्गा में माँ ब्रह्माचारिणी की है। ब्रह्मा शब्द उनके लिए लिया जाता है जो कठोर भक्ति करते है और अपने दिमाग और दिल को संतुलन में रख कर भगवान को खुश करते है । यहाँ ब्रह्मा का अर्थ है तप । माँ ब्रह्मचारिणी की मूर्ति बहुत ही सुन्दर है। उनके दाहिने हाथ में गुलाब और बाएं हाथ में पवित्र पानी के बर्तन ( कमंडल ) है। वह पूर्ण उत्साह से भरी हुई है । उन्होंने तपस्या क्यों की उसपर एक कहानी है।

पार्वती हिमवान की बेटी थी। एक दिन वह अपने दोस्तों के साथ खेल में व्यस्त थी नारद मुनि उनके पास आये और भविष्यवाणी की "तुम्हरी शादी एक नग्न भयानक भोलेनाथ से होगी और उन्होंने उसे सती की कहानी भी सुनाई। नारद मुनि ने उनसे यह भी कहा उन्हें भोलेनाथ के लिए कठोर तपस्या भी करनी पढ़ेगी। इसीलिए माँ पार्वती ने अपनी माँ मेनका से कहा की वह शम्भू (भोलेनाथ ) से ही शादी करेगी नहीं तोह वह अविवाहित रहेगी। यह बोलकर वह जंगल में तपस्या निरीक्षण करने के लिए चली गयी। इसीलिए उन्हें तपचारिणी ब्रह्मचारिणी कहा जाता है।

मंत्र का 108
ब्रह्मचारिणी : ह्रीं श्री अम्बिकायै नम:

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