शिकंजे में बसपा, माया के भाई आनंद की लखनऊ में भी जांची जाएगी संपत्ति

शिकंजे में बसपा, माया के भाई आनंद की लखनऊ में भी जांची जाएगी संपत्ति

Karishma Lalwani | Publish: Jul, 20 2019 04:48:19 PM (IST) Lucknow, Lucknow, Uttar Pradesh, India

- Mayawati के भाई आनंद कुमार पर आयकर विभाग का शिकंजा

- नोए़डा के बाद लखनऊ में भी जाएगी संपत्ति

- 400 करोड़ की संपत्ति जब्त

लखनऊ. बसपा सुप्रीमो मायावती (Mayawati) के भाई व पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आनंद कुमार (Anand Kumar) पर आयकर विभाग ने शिकंजा कसा है। नोएडा में 400 एकड़ की खरीदी जमीन का खुलासा होने के बाद अब लखनऊ में भी उनकी संपत्ति की जांच की जाएगी। यूपी वेस्ट में प्रधान आयकर निदेशक जांच अमरेंद्र कुमार के नेतृत्व में कानपुर, लखनऊ और गाजियाबाद सहित उन सभी शहरों में जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है, जहां आनंद कुमार या इनके परिजन रहते हैं। यूपी विंग को भी अलर्ट कर दिया गया है।

करीबी के नाम पर खरीदी थी संपत्ति

आयकर विभाग की बेनामी विंग ने नोएडा स्थित सेक्टर-94 में खरीदी गई 400 करोड़ की जमीन को जब्त कर लिया। आयकर विभाग की जांच में सामने आया कि 21 एकड़ जमीन में 7 एकड़ जमीन विजन टाउन प्लानर्स के नाम से 400 करोड़ में खरीदी गई थी। जांच में सामने आया कि आनंद कुमार ने यह संपत्ति अवैध तरीके से किसी करीबी के नाम पर खरीदी दी।

इन कंपनियों के नाम आए शामिल

प्रापर्टी खरीदने के लिए जिस कंपनी के माध्यम से 400 करोड़ का भुगतान किया गया था, उसकी जांच में लिंक एक अन्य कंपनी से मिला है। जांच में आनंद कुमार और उनकी पत्नी विचित्रलता का नाम सामने आया। जिन फर्जी कंपनियों के नाम सामने आए उनमें यूरो एशिया मर्केंटाइल, सनी कास्ट एंड फोर्ज और करिश्मा इंडस्ट्रीज हैं।

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आयकर विभाग की ओर से आनंद कुमार के भूखंड को अटैच करने के बाद उनके साथ नोएडा प्राधिकारण में काम कर चुके अधिकारियों पर भी सीबीआई की नजर है। शुक्रवार को नोएडा प्राधिकरण की सीईओ रितु माहेश्वरी ने इस भूखंड से संबंधित मामले की जानकारी लेने के लिए फाइल मंगवाई। सीईओ ने व्यावसायिक विभाग से संबंधित अधिकारियों से इस भूखंड के बारे में पूरी जानकारी ली।

बीजेपी के पूर्व सासंद की शिकायत पर सामने आया मामला

बीजेपी के पूर्व सांसद किरीट सोमैया ने आनंद कुमार की फर्जी कंपनियों की शिकायत सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट और ईडी से की थी। यह 2011का मामला है। उस दौरान कांग्रेस की सरकार थी और तब मामले की जांच नहीं हुई थी।

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