'संत' ने संभाली प्रदेश की कमान, अब ग्रह और नक्षत्र के आधार पर लगेंगे पेड़

'संत' ने संभाली प्रदेश की कमान, अब ग्रह और नक्षत्र के आधार पर लगेंगे पेड़
yogi adityanath

प्रदेश वासियों को स्वस्थ रखने के लिए योगी अब लेंगे ग्रह और नक्षत्र का सहारा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुखिया सीएम योगी आदित्यनाथ ने अपने शपथ ग्रहण से लेकर 5 केडी में गृह प्रवेश नक्षत्र के आधार पर किया था। अब वे संतों की तरह प्रदेश वासियों को स्वस्थ रखने के लिए भी ग्रह और नक्षत्र का सहारा लेंगे। CM ने इस संदर्भ में प्रदेश के सभी नगर निगमों, विकास प्राधिकरणों और आवास विकास के sarkaari पार्कों में नक्षत्र वाटिका, नवग्रह वाटिका और पंचवटी की स्थापना करने के निर्देश दे दिए हैं। विज्ञानिक भी पंचवटी के चमत्कार पर मोहर लगा चुके हैं। उनका कहना है कि पीपल, बरगद, आंवले, बेल, अशोक जैसे पेड़ पास होने से मन प्रसन्न और शरीर स्वस्थ रहता है सीडीआरआई के वैज्ञानिकों ने भी अपने शोध में रामायण काल में पंचवटी के इस्तेमाल को शामिल किया है।

बनेंगी पंचवटी, नक्षत्र और नवग्रह वाटिका
वैज्ञानिकों ने एक शोध के बाद पांच वृक्षों की एक जगह पंचवटी लगाने की सलाह दी है। यह अच्छी और सस्ती भी है। ये आदेश तत्कालीन अपर मुख्य सचिव संजीव शरण ने प्रमुख सचिव नगर विकास अपर मुख्य सचिव आवास एवं शहरी नियोजन, अपर मुख्य सचिव औद्योगिक विकास को जारी किए थे इन सभी विभागों को पंचवटी, नक्षत्र और नवग्रह वाटिका के संबंध में साहित्य और तकनीकी जानकारियां वन विभाग के द्वारा उपलब्ध कराई जाएंगी।

पंचवटी वाटिका में पांच वृक्ष

पंचवटी के जरिए निरोग और स्वस्थ रह सकते हैं। सीडीआरआई के वैज्ञानिकों ने भी एक शोध में इसका जिक्र किया है। सीडीआरआई में पंचवटी में शामिल 5 वृक्षों 
पीपल, बरगद, आंवले, बेल, अशोक का शोध किया गया। शोध के बाद परिणाम आए कि इन पेड़ो के आस पास रहने से बीमारियों की आशंका कम हो जाती है। शोध में शामिल वैज्ञानिक प्रदीप श्रीवास्तव कहते हैं कि पंचवटी में लगे पौधों से अलग-अलग फायदे पहुंचते हैं। यह मानव शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।

नवग्रह वाटिका में नौ ग्रहों के आधार पर पेड़
इसके अलावा नवग्रह वाटिका भी तैयार की जाएगी। इसमें नौ ग्रहों के अनुसार पौधे लगाए जाएंगे। इसमें ज्योतिष विद्या का सहारा लिया गया है। सूर्य के लिए मंदार का पौधा, चंद्रमा के लिए पलाश, मंगल के लिए ख़ैर, बुद्ध के लिए चिरचिरी, बृहस्पति के लिए पीपल, शुक्र के लिए गूलर, शनि के लिए शमी, राहु के लिए दुर्वा, और केतु के लिए कुश लगाया जाएगा। इन पौधों को लगाते हुए दिशा का भी ख्याल रखा जाएगा। उत्तर दिशा में पीपल, नार्थ ईस्ट में लटजीरा, पूर्व में गूलर, अग्निकोण में ढाक और दक्षिण में ख़ैर लगाया जाएगा। इन पेड़ों से गर्भस्त्राव, घाव को भरने, त्वचा संबंधी रोग और पेट के कीड़ों को दूर करने में प्रयोग किया जाता है।

नक्षत्र वाटिका में 27
नक्षत्रों के आधार पर पेड़
नक्षत्र वाटिका में कुल 27 नक्षत्रों के लिए ज्योतिषीय शास्त्र के अनुसार अलग-अलग गुण वाले पेड़ पौधे लगाए जाएंगे। इसमें अश्विनी के लिए कुचिला, भरणी के लिए आमला,कृत्तिका के लिए गूलर,रोहिणी के लिए जामुन, मृगशिरा के लिए खैर, आर्द्रा के लिए शीशम, पुनर्वसु के लिए बाँस, पुष्य के लिए पीपल, आश्लेषा के लिए नागकेशर, मघा के लिए बरगद, पूर्व फाल्गुनी के लिए  पलाश, उत्तर फाल्गुनी के लिए पाठड़, हस्त के लिए अरीठा, चित्रा के लिए बेलपत्र, स्वाती के लिए  अर्जुन, विशाखा के लिए कटाई, अनुराधा के लिए  मौल श्री, ज्येष्ठा के लिए  चीड़, मूल के लिए  साल,पूर्वाषाढ़ा के लिए जलवन्त, उत्तराषाढ़ा के लिए कटहल,श्रवण के लिए मंदार, घनिष्ठा के लिए शमी,शतभिषा के लिए कदम्ब, पूर्वभाद्रपद के लिए आम,उत्तरभाद्रपद के लिए नीम,रेवती के लिए महुआ लगाया जाएगा।

इन पेड़ों के हैं साइंटिफिक फायदे

इन पेड़ों का साइंटिफिक असर भी देखा गया है। पीपल का एक सामान्य पेड़ 1800 किलोग्राम की दर से आक्सीजन छोड़ता है। बरगद का वृक्ष गर्मी को रोकता है यानी नेचुरल AC का कार्य करता है। आंवले में पाए जाने वाले वॉटमीन सी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का सबसे सस्ता उपाय है। बेल के सेवन से पेट की बीमारियां दूर होती है। अशोक का वृक्ष महिलाओं को कई बीमारियों से बचाने में कारगर साबित होता है।
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