सीएम योगी ने 37 भंडारगृहों का किया शिलान्यास, कहा- किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलेगा

- दोगुनी आय से किसानों के जीवन में आएगा व्यापक बदलाव

- वैज्ञानिक तरीके से सुरक्षित रखी जाएगी कृषि उपज

- 1.85 लाख मीट्रिक टन बढ़ेगी कृषि उपज भण्डारण क्षम

By: Abhishek Gupta

Updated: 25 Aug 2020, 09:11 PM IST

लखनऊ. सीएम योगी (CM Yogi) ने मंगलवार को राज्य भंडारण निगम द्वारा विभिन्न जिलों में बनाए जा रहे 5-5 हजार की क्षमता वाले 37 भंडारगृहों का ऑनलाइन शिलान्यास किया। किसानों की आय दोगुनी करने के संकल्प को ध्यान में रखते हुए सरकार ने कृषि उपज के लिए सुरक्षित भण्डारण की क्षमता में रिकार्ड बढ़ोत्तरी करने के लिए अहम निर्णय लिया है। प्रदेश में किसानों की उपज भण्डारण की क्षमता में रिकार्ड 1.85 लाख मीट्रिक टन की वृद्धि करने की योजना को जमीन पर उतारा है। उत्तर प्रदेश राज्य भण्डारण निगम 37 मण्डियों में इन नए भण्डारगृहों का निर्माण करेगा, जिनकी अनुमानित लागत 187.32 करोड़ रुपये हैं। इन गोदामों के निर्माण से गाजीपुर, बलिया, बहराइच, फतेहपुर, झांसी, जालौन, कानपुर नगर, कानपुर देहात, रामपुर, जेपी नगर, बिजनौर, बदायूं, बरेली, पीलीभीत, महराजगंज, बस्ती, सिद्धार्थनगर, महोबा, बांदा, हमीरपुर, मिर्जापुर, संतरविदासनगर, फर्रुखाबाद, औरैया, रायबरेली और कौशाम्बी के किसानों को विशेष लाभ होगा।

किसान के उत्पाद को खरीदना और अगले 48 घंटे में उनके खाते में धनराशि जाना एक सपना था-
सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस दौरान कहा कि मार्च 2017 में जब हमारी सरकार बनी, तो हमारे सामने भण्डारगृहों की चुनौती थी। गेहूं खरीदने के बाद सुरक्षित रखने की समस्या सामने आई। कारण, स्टोरेज क्षमता नहीं थी। अप्रैल से गेहूं क्रय शुरू होना था। सबसे पहला प्रश्न स्टोरेज का था। हमनें इस पर काम किया। किसान के उत्पाद को खरीदना और अगले 48 घंटे में उनके खाते में धनराशि जाना एक सपना था। लेकिन पहली ही बार में 37 लाख मीट्रिक टन अनाज खरीदने के साथ न्यूनम समर्थन मूल्य खातों में देने का कार्य किया गया। अगर स्टोरेज क्षमता नहीं होती, तो ऐसा नहीं कर सकते थे।

किसान को विश्वास हुआ है कि खेती घाटे का सौदा नहीं है-

मुख्यमंत्री ने कहा कि हर साल उपज को खरीदने का काम 53 लाख मीट्रिक टन तक पहुंचा है। ये साबित करता है कि किसान को जब उपज का उचित मूल्य मिलता है तो उसके जीवन में व्यापक बदलाव आता है। साथ ही बाजार को भी नियंत्रित करने में मदद मिलती है। इसके अलावा कालाबाजरी पर रोक के साथ किसान का शोषण रुकता है। किसान पहले पलायन को मजबूर था। लेकिन बीते तीन वर्ष में किए गये हमारे प्रयासों से अब वह खेती-किसानों की तरफ वापस आया है। उसे विश्वास हुआ है कि खेती घाटे का सौदा नहीं है। उसे लागत का डेढ़ गुना दाम मिलना प्रारम्भ हुआ है। परम्परागत खेती-किसानी की ओर विमुख होने के बाद अब लोग फिर उस ओर बढ़ रहे हैं। अन्नदाता की भूमिका में वापस लौटे हैं। सहकारिता मंत्री मुकुट बिहारी वर्मा ने बताया, प्रदेश के 37 जनपदों 5-5 हजार मैट्रिक टन क्षमता के गोदाम एवं अन्य सुविधाओं के निर्माण से एक ओर जहां निगम की क्षमता में वृद्धि होगी, वहीं दूसरी ओर किसानों की उपज का अधिक से अधिक भण्डारण कर उन्हें उनकी उपज का उचित मूल्य प्राप्त होगा।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की बागडोर संभालने के साथ ही किसानों को समृद्ध बनाने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संकल्प को आत्मसात कर किसानों की आय दोगुनी करने का कार्य प्रारम्भ किया। कृषि अर्थव्यवस्था के मुताबिक, कृषि क्षेत्र में सिर्फ ‘इनपुट कास्ट‘ और उत्पादन पर मिलने वाला मूल्य ही प्रमुख नहीं होते, बल्कि किसानों को मिलने वाले सस्ते ऋण, उचित मूल्यों पर मिलने उन्नतशील बीज और उर्वरक, सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी, प्राकृतिक आपदाओं से संरक्षण एवं क्षतिपूर्ति तथा उपज के रख-रखाव और बिना किसी बिचैलिए के मंडियों तक उनके उत्पादन की पहुंच बेहद अहम होती है और योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार अन्नदाताओं की आय दोगुनी करने के लिए इस दिशा में निरन्तर आगे बढ़ रही है।

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