महिला करीगरों को मिला बड़ा मंच, सीएम योगी ने की जमकर तारीफ

महिला कारीगरों को उनके काम के जरिये पहचान दिलाने के लिए यूपी टूरिज्म के तहत लखनऊ में शुरू हुआ Indian women artisan Awadh festival

By: Mahendra Pratap

Published: 10 Feb 2018, 08:44 PM IST

लखनऊ. राजधानी लखनऊ के अवध शिल्पग्राम में यूपी सरकार महिला करीगरों और शिलिपकारों को भारतीय महिला कारीगर अवध त्यौहार (आईडब्ल्यूएएएफ) के तहत एक मंच प्रदान कर रहा है। इसमें देश भर के कलाकारों के साथ-साथ राज्य के उपभोक्ताओं को अपनी प्रतिभा और कार्यों का प्रदर्शन करने का सुनहरा मौका दिया जा रहा है। UP Tourism के तहत प्रमोट किए गए इस प्रोग्राम में सीएम योगी आदित्यनाथ और कैबिनेट मिनिस्टर भागुना जोशी मौजूद रहीं।

भारतीय महिला कारीगर अवध त्यौहार (आईडब्ल्यूएएएफ) एक तीन दिवसीय प्रदर्शनी है जो प्रतिभागियों को ये मौका दे रही है कि वे उत्तर प्रदेश के उपभोक्ताओं से जुड़ सकें। रविना टंडन ने बताया कि इसमें महिला कारीगरों को एक प्लैटफॉर्म दिया गया है, जहां वो अपने अनोखे काम के जरिये लोगों से कनेक्ट हो सकें। खुद से बनाए गए सामानों को इस तरह के इवेंट्स में बेचना इन महिलाओं का एक तरह से रोजगार है। ऐसा इसलिए क्योंकि इनके काम सबसे ज्यादा नजरअंदाज किया जाता है। अपने काम का एक चौथाई पैसा भी उनको नहीं मिलता है।

महिला कारीगरों के काम का शोषण सबसे ज्यादा होता है। उन्हें उनके काम का एक चौथाई पैसा भी नहीं मिलता है। इसलिए ऐसे कामों से उनको रास्ता दिखाए जाने की कोशिश की गयी है। सरकार के द्वारा शुरू की गयी मुद्रा धन योजना से इन महिलाओं की मदद की जा रही है। छोटे से अमाउंट से शुरूआत कर वे कैसे अपने काम को ग्लोबल लेवल पर ले जा सकती हैं, इसको लेकर उनकी मदद की जा रही है।

महिला कारीगरों को वर्कशॉप भी दी गयी है। ये वर्कशॉप GeM के जरिये दी गयी है। जेम ई मारकेटिंग प्लेस है जहां सामान्‍य प्रयोक्‍ता वस्‍तुओं की खरीद की जाती है। सरकार के सहयोग के बिना ये शायद मुमकिन नहीं होता।

हेल्थ इशूज पर भी दिया जाता है ध्यान

महिला कारीगर सिर्फ काम नहीं करतीं या फिर यूं कहें कि यहां उनसे सिर्फ काम नहीं करवाया जाता है, बल्कि उनकी सेहत का भी पूरा ध्यान दिया जाता है। किसी को स्किन प्रॉब्लम होती है, तो किसी को तंबाकू की वजह से समस्या है। सबसे ज्यादा किस्से सर्वाइकल कैंसर के हैं। इसलिए इन कारीगरों के काम के साथ-साथ इनकी सेहत पर भी पूरा ध्यान दिया जाता है।

लखनऊ के लोगों को है ये बताना

रविना आगे बताती हैं कि यूपी में इतने खूबसूरत हैंडीक्राफ्ट्स हैं लेकिन लोगों को इसकी जानकारी कम है। यूपी से हैंडीक्राफ्ट्स सामान एक्सपोर्ट जरूर होते हैं लेकिन सिर्फ दो या तीन जगह। अगर ये ज्यादा जगहों पर एक्सपोर्ट हो, तो यूपी की इकोनॉमी इस मामले में बढ़ सकती है। इस मामले में यूपी की इकोनॉमी तो नहीं बढ़ा सकते लेकिन इस इनिशिएटिव से महिला कारीगरों को एक बड़े लेवल का रोजगार जरूर मिल गया है। ये रोजगार है दिल्ली हाट (Dilli Haat) का, जहां इंडियन कल्चर और हैंडिक्राफ्टस का अनोखा बाजार है।

टैलेंट की पहचान के साथ मनोरंजन का भी पूरा इंतजाम

अवध शिल्पग्राम में आयोजित किए गए तीन दिन के प्रोग्राम की शुरूआत कव्वाली से हुई। दूसरे दिन राजस्थानी फेक डांस से आने वाले लोगों का मनोरंजन किया गया और तीसरे दिन की शाम संध्या आरती और बांसुरी से सजाई जाएगी। मनोरंजन का लेवल बस यहीं खत्म नहीं होता। प्रोग्राम का अंत मुंबई से आए संजय लीला भंसाली ग्रुप के डांसर्स अपनी परफॉर्मेंस से करेंगे। इस ग्रुप का नाम है नित्यांजली है।

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