आपदा की सच्ची कहानियां’ के भोजपुरी अनुवाद का विमोचन

Anil Ankur

Publish: May, 17 2018 09:44:45 PM (IST)

Lucknow, Uttar Pradesh, India
आपदा की सच्ची कहानियां’ के भोजपुरी अनुवाद का विमोचन

केदारनाथ की त्रासदी से मानव को प्रकृति के साथ तादात्म्य बना कर रखने की सीख लेनी चाहिए

लखनऊ. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज शास्त्री भवन में उत्तराखण्ड राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री एवं सांसद डाॅ0 रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ की पुस्तक ‘केदारनाथ आपदा की सच्ची कहानियां’ के भोजपुरी अनुवाद का विमोचन किया। यह पुस्तक वर्ष 2013 में उत्तराखण्ड के केदारनाथ धाम में आयी आपदा की सच्ची घटनाओं पर आधारित है। पुस्तक का भोजपुरी अनुवाद प्रो0 ए0एन0 वर्मा द्वारा किया गया है। मुख्यमंत्री जी द्वारा इस अवसर पर डाॅ0 निशंक को ‘साहित्य गौरव’ सम्मान से विभूषित किया गया। डाॅ0 निशंक को यह सम्मान मुक्ति मिशन, वाराणसी द्वारा प्रदान किया गया है।
इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि केदारनाथ की त्रासदी ने यह दिखाया कि प्रकृति के साथ खिलवाड़ करने पर उसका रौद्र रूप भी देखना पड़ सकता है। इस घटना से मानव को प्रकृति के साथ तादात्म्य बना कर रखने की सीख लेनी चाहिए। केदारनाथ की घटना पर आधारित सच्ची कहानियों की रचनात्मक प्रस्तुति के लिए डाॅ0 निशंक की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि यह पुस्तक केदारनाथ और भोजपुरी से सम्बन्धित है। केदारनाथ धाम मेरी जन्मभूमि से तथा भोजपुरी भाषा मेरी कर्मभूमि से जुड़ी हुई है। यह पुस्तक मेरी जन्मभूमि और कर्मभूमि को जोड़ती है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि लेखन व्यक्ति की रचनात्मकता को प्रदर्शित करता है। लेखन से व्यक्ति की रचनाधर्मिता सामने आती है। इस मामले में डाॅ0 निशंक अत्यन्त समृद्ध हैं। अपनी व्यस्तता के बावजूद वे साहित्य साधना हेतु समय निकाल लेते हैं, जो उनकी रचनात्मक ऊर्जा को दिखाता है। उन्होंने भरोसा जताया कि डाॅ0 निशंक की यह कृति भावी पीढ़ी को अपनी धरोहर को जानने-समझने के लिए महत्वपूर्ण मार्गदर्शिका साबित होगी।
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने कहा कि यह पुस्तक केदारनाथ में उनकी आंखांे-देखी ऐसी घटनाओं पर आधारित है, जिन्होंने उन्हें लम्बे समय तक विचलित रखा। उन्होंने कहा कि केदारनाथ की यात्रा के दौरान उन्होंने लोगों के अनेक रूप देखे। ऐसी अनेक घटनाएं देखी, जब अपनो को खो चुके लोग दूसरों को बचाने के लिए अपने प्राण दांव पर लगा रहे थे। पुस्तक में आपदा की स्थिति में मानव व्यवहार में होने वाले सकारात्मक बदलाव से सम्बन्धित प्रेरणादायी कहानियां हैं।
इस अवसर पर सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह, सांसद राजेन्द्र अग्रवाल, प्रहलाद पटेल सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।

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