राज्य सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध, मुख्यमंत्री ने दुग्ध उत्पादन को लेकर कही बड़ी बात

- अधिक से अधिक राजस्व ग्रामों में दुग्ध समितियों के गठन की कार्रवाई की जा रही
- झांसी, नोएडा, अलीगढ़ तथा प्रयागराज की डेयरियों का उच्चीकरण कराया जा रहा
- जनपद में 01 डेयरी की स्थापना के लिए कार्य कर रही सरकार
- कृषि के साथ पशुपालन किसानों की आमदनी बढ़ाने में सहायक

By: Neeraj Patel

Published: 17 Sep 2020, 09:25 PM IST

लखनऊ. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राज्य सरकार दुग्ध उत्पादन के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए अधिक से अधिक राजस्व ग्रामों में दुग्ध समितियों के गठन की कार्रवाई की जा रही है। वर्तमान में प्रदेश में 7,293 दुग्ध समितियां कार्यरत हैं। इनकी संख्या तेजी से बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। प्रदेश सरकार राज्य में 08 ग्रीनफील्ड डेयरियों की स्थापना करा रही है। यह ग्रीनफील्ड डेयरियां लखनऊ, वाराणसी, मेरठ, बरेली, गोरखपुर, फिरोजाबाद, अयोध्या तथा मुरादाबाद में स्थापित की जा रही हैं। साथ ही, झांसी, नोएडा, अलीगढ़ तथा प्रयागराज की 04 पुरानी डेयरियों के उच्चीकरण का कार्य भी कराया जा रहा है।

मुख्यमंत्री अपने सरकारी आवास पर बनास डेयरी, गुजरात द्वारा उत्तर प्रदेश के दुग्ध उत्पादकों के वार्षिक अन्तर मूल्य (बोनस) भुगतान के सम्बन्ध में आयोजित कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने जनपद उन्नाव व हरदोई के 02-02 दुग्ध उत्पादकों को वार्षिक अन्तर मूल्य भुगतान का चेक प्रदान किया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बनास डेयरी को दुग्ध आपूर्ति करने वाले जनपद बिजनौर, वाराणसी, फतेहपुर, जालौन, आगरा तथा कानपुर देहात के 01-01 किसान से संवाद किया। इन किसानों से उन्होंने दूध के उत्पादन, आपूर्ति, दुग्ध मूल्य के भुगतान आदि के सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने किसानों को आश्वस्त किया कि प्रदेश सरकार द्वारा उन्हें अपने कारोबार को बढ़ाने में पूरा सहयोग दिया जाएगा।

सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर बनास डेयरी द्वारा प्रदेश के किसानों को बोनस भुगतान की कार्यवाही अत्यन्त सराहनीय है। उन्होंने कहा कि किसी भी सहकारी समिति द्वारा सहभागी किसानों को लाभांश का वितरण हम सभी के लिए बहुत प्रेरणादायक है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि राज्य में स्थापित किए जा रहे डेयरी संयंत्रों को बनास डेयरी के साथ समन्वय स्थापित करते हुए संचालित करें। उन्होंने कहा कि बनास डेयरी को दुग्ध उपार्जन एवं प्रसंस्करण के सम्बन्ध में वृहद् अनुभव है। यह अनुभव प्रदेश के किसानों के आर्थिक उन्नयन में सहायक साबित होगा।

पशुपालन किसानों की आमदनी बढ़ाने में सहायक

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री का कहना है कि किसानों की आमदनी दोगुना करने के लिए उन्हें पशुपालन सहित अन्य कृषि कार्यों से जोड़ा जाना आवश्यक है। कृषि के साथ पशुपालन किसानों की आमदनी बढ़ाने में सहायक है। गुजरात राज्य में कृषि और पशुपालन के समन्वय से किसानों में खुशहाली आयी है। प्रदेश में भी इस कार्य को तेजी से आगे बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी द्वारा गोबर के सदुपयोग की बात भी कही जाती है। बनास डेयरी द्वारा गोबर से सी0एन0जी0 बनाने का कार्य किया जा रहा है। इस पद्धति को अपनाकर प्रदेश में भी किसानों के जीवन में खुशहाली लायी जा सकती है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पहले चरण में प्रदेश के प्रत्येक मण्डल में 01 डेयरी, दूसरे चरण में 02 जनपदों में 01 डेयरी तथा अन्तिम चरण में प्रत्येक जनपद में 01 डेयरी की स्थापना के लिए कार्य कर रही है। इससे प्रदेश के युवा आर्थिक रूप से स्वावलम्बी व आत्मनिर्भर बनेंगे।

दुग्ध उत्पादकों को प्रोत्साहित करने के लिए कार्य कर रही राज्य सरकार

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार दुग्ध सहकारिताओं से जुड़े दुग्ध उत्पादकों को प्रोत्साहित करने के लिए कार्य कर रही है। इसके तहत प्रदेश स्तर पर सर्वाधिक दुग्ध उत्पादन करने वाले उत्पादक को 02 लाख रुपए तथा द्वितीय स्थान वाले दुग्ध उत्पादक को 1.50 लाख रुपए की पुरस्कार राशि दी जाती है। इसी प्रकार जनपद स्तर पर सर्वाधिक दूध उत्पादन करने वाले दुग्ध उत्पादक को ‘गोकुल पुरस्कार’ के रूप में 51,000 रुपए तथा प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाता है। सहकारी दुग्ध समितियों के माध्यम से भारतीय गोवंश द्वारा प्रदेश में सर्वाधिक दुग्ध उत्पादन करने वाले को 51,000 रुपए, जनपद स्तर पर सर्वाधिक दुग्ध उत्पादन करने वाले को 21,000 रुपए तथा विकास खण्ड स्तर पर सर्वाधिक दुग्ध उत्पादन करने वाले को 5,100 रुपए की धनराशि ‘नन्द बाबा पुरस्कार’ के रूप में दी जाती है।

बनास डेयरी द्वारा सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जा रही धनराशि

मुख्यमंत्री ने कहा कि बनास डेयरी एशिया की सबसे बड़ी सहकारी डेयरी होने के साथ ही, अमूल की सबसे बड़ी सदस्य है। बनास डेयरी द्वारा दुग्ध उत्पादकों को लाभांश दिए जाने की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि बनास डेयरी ने लगभग 30 करोड़ रुपए, दुग्ध भावान्तर (बोनस) के रूप में किसानों को अतिरिक्त रूप से देना तय किया है। यह कुल खरीद का 4.41 प्रतिशत है। यह धनराशि बनास डेयरी द्वारा सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जा रही है। कार्यक्रम को वर्चुअल माध्यम से बनास डेयरी, गुजरात के अध्यक्ष शंकर भाई चैधरी तथा गुजरात मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन के प्रबन्ध निदेशक आरएस सोढ़ी ने भी सम्बोधित किया। चैधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं गो-पालक हैं। प्रधानमंत्री के किसानों की आय दोगुनी करने के संकल्प को साकार करने के लिए मुख्यमंत्री द्वारा किया जा रहा प्रयास प्रेरणादायक है। उन्होंने बताया कि बनास डेयरी द्वारा वर्ष 2013 में उत्तर प्रदेश के किसानों से 14 करोड़ रुपए प्रतिमाह की दूध खरीद की जाती थी। वर्तमान में यह खरीद 60 करोड़ रुपए प्रतिमाह की है। उन्होंने कहा कि यह प्रगति मुख्यमंत्री द्वारा राज्य में बनाए गए वातावरण से ही सम्भव हुई है।

ये अधिकारी रहे मौजूद

शंकर भाई चैधरी ने कहा कि बनास डेयरी द्वारा गो-पालन व गो-संवर्धन के लिए 06 माह का एक पाठ्यक्रम संचालित किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश के चयनित युवाओं को इस पाठ्यक्रम में रहने-खाने की निःशुल्क सुविधा के साथ-साथ प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बनास डेयरी द्वारा उत्तर प्रदेश में 02 नए दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। वाराणसी में गौ-आधारित एक सी0एन0जी0 प्लाण्ट भी लगाया जाएगा। कार्यक्रम के अन्त में, प्रमुख सचिव पशुपालन भुवनेश कुमार ने कार्यक्रम में उपस्थित तथा वर्चुअल माध्यम से जुड़े महानुभाव के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर मुख्य सचिव आर0के0 तिवारी, कृषि उत्पादन आयुक्त आलोक सिन्हा, अपर मुख्य सचिव गृह एवं सूचना अवनीश कुमार अवस्थी, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री एसपी गोयल, अपर मुख्य सचिव एमएसएमई नवनीत सहगल, सूचना निदेशक शिशिर, बनास डेयरी के पदाधिकारीगण सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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