कमजोर पड़ी प्रियंका की हुंकार, आंदोलन में जनता को जोड़ने में नाकामयाब

सोनभद्र और उन्नाव कांड को लेकर किए गए प्रदर्शन में कांग्रेस की सक्रियता नजर आई लेकिन महंगी बिजली पर पार्टी की रणनीति धरी रह गई

लखनऊ. भाजपा सरकार के खिलाफ अक्सर विरोध प्रदर्शन करने वाली कांग्रेस पार्टी की रणनीति इस बार धरी रह गई। सोनभद्र और उन्नाव के माखी गांव कांड को लेकर किए गए प्रदर्शन में कांग्रेस की सक्रियता नजर आई लेकिन पेट्रोल डीजल के बढ़ते रेट और महंगी बिजली (Electricity Rates) को लेकर पार्टी की रणनीति धरी रह गई। राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) ने प्रदेश में चार दिन तक जनआंदोलन की जो हुंकार भरी थी, वह कमजोर पड़ गई।

जनता को आंदोलन से जोड़ने की कोशिश

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी की नजर अगले विधानसभा चुनाव पर है। आम जन तक ज्यादा पहुंच के लिए उन्होंने सक्रियता बढ़ा दी है। सरकार के खिलाफ मिलने वाले हर मुद्दे को वह जोरों से उठा रही हैं। प्रियंका ने हाल ही में बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम और महंगी बिजली पर सरकार का घेराव किया था। उन्होंने सरकार के खिलाफ आंदोलन का ऐलान कर जनता को इस आंदोलन से जोड़ने की कोशिशि की। इसके लिए हर जिले के प्रमुख बाजारों में लालटेन जुलूस, फिर शनिवार, रविवार और सोमवार को ब्लॉक स्तर तक हस्ताक्षर अभियान चलाने के निर्देश दिए।

प्रियंका के निर्देश पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सांकेतिक जुलूस तो निकाल लिया लेकिन हस्ताक्षर अभियान में उनकी सक्रियता कमजोर पड़ गई। इतने गंभीर विषय पर कांग्रेस जनता को नहीं जोड़ सकी। इसकी एक वजह यह भी मानी जा रही है कि संगठन में परिवर्तन की हलचल तो तीन माह से चल रही है लेकिन, अब तक निर्णय नहीं हो सका है। कांग्रेस ने सभी जिला कमेटियां भी भंग कर दीं।'

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Karishma Lalwani
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