जेएनयू हिंसा पर बोले यूपी कांग्रेस अध्यक्ष, शिक्षा के मंदिरों में गुण्डागर्दी फैला रही है बीजेपी संरक्षित एबीवीपी

कहा- सर्वोच्च न्यायालय की देखरेख में वर्तमान न्यायाधीश से जेएनयू मामले की हो न्यायिक जांच

By: Hariom Dwivedi

Published: 06 Jan 2020, 07:36 PM IST

लखनऊ. देश की राजधानी स्थित भारत के सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय जेएनयू में कल केन्द्र सरकार के संरक्षण में पुलिस की मौजूदगी में आरएसएस एवं एबीवीपी के नकाबपोश गुण्डों द्वारा छात्रावास एवं परिसर के अन्दर की गयी मारपीट, हिंसा एवं अराजकता पर उ0प्र0 कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए घटना की निन्दा की है। लल्लू ने कहा कि केन्द्र में बीजेपी सरकार बनने के पश्चात लगातार एक दर एक जिस तरीके से शैक्षणिक संस्थाओं को निशाना बनाया जा रहा है और अपने पिछले कार्यकाल में भाजपा ने लगातार जेएनयू को बदनाम करने की कोशिश की, जब उनकी यह साजिश कामयाब नहीं हो पाई तो सुनियोजित तरीके से सीधे अपने नकाबपोश गुण्डे भेजकर हिंसा करवाई। यह दर्शाता है कि भारतीय जनता पार्टी देश के छात्रों, युवाओं की आवाज दबाकर संविधान को कमजोर कर रही है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि विश्व के सर्वश्रेष्ठ शैक्षणिक संस्थानों में से एक जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) जहां से निकले छात्र विश्व में कीर्तिमान स्थापित कर भारत का नाम ऊंचा कर रहे हैं कल उसी शिक्षा के मंदिर में भारतीय जनता पार्टी समर्थित नकाबपोश गुण्डे घुसकर जिस तरह छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों को महिला छात्रावास एवं परिसर के अन्दर पुलिस की मौजूदगी में मारा और अधमरा कर दिया। बहुत सारे लोगों को एम्स में भर्ती कराना पड़ा, यह दर्शाता है कि यह सरकार गांधी की सत्य, अहिंसा और प्रेम की विचारधारा को भय और हिंसा के बल पर दबा देना चाहती है, गांधी जी की विचारधारा के बल पर ही इस देश की आजादी की लड़ाई लड़ी गयी और सर्व-धर्म-समभाव का नारा देकर समन्वयवादी विशाल लोकतंत्र स्थापित हो सका, उन महान महापुरूषों के बनाये संविधान के दम पर ही देश आज यहां तक चलकर आया और विश्व की आर्थिक, सामरिक और राजनैतिक महाशक्ति बना। जिसमें इस विचारधारा और इन शैक्षणिक संस्थानों का सबसे बड़ा योगदान रहा है।

अजय कुमार लल्लू जी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी बीजेपी सरकार की इस तानाशाही और जुल्म ज्यादती के खिलाफ हर स्तर पर छात्र-छात्राओं और शिक्षकों के साथ खड़ी है और लोकतांत्रिक तरीके से उनके अधिकारों की रक्षा करेगी। हम मांग करते हैं कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय स्वतः इस घटना का संज्ञान लेकर अपनी देखरेख में वर्तमान न्यायाधीश से इसकी न्यायिक जांच कराए। जिससे देश में बीजेपी सरकार द्वारा बनाये जा रहे भय के माहौल में छात्रों और शिक्षकों का भरोसा कानून व्यवस्था, संविधान और न्याय पालिका पर सुदृढ़ हो।

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